
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने साल 2026 की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाओं को लेकर एक ऐसा क्रांतिकारी फैसला सुनाया है, जिससे प्रदेश के लाखों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों ने राहत की सांस ली है। बोर्ड ने स्पष्ट कर दिया है कि इस साल परीक्षा देने जा रहे लगभग 53 लाख छात्रों को अटेंडेंस (हाजिरी) के कड़े नियमों से बड़ी छूट दी जाएगी। अब 75% उपस्थिति अनिवार्य होने के बावजूद, कम हाजिरी के आधार पर किसी भी छात्र को परीक्षा से वंचित नहीं किया जाएगा।
यूपी बोर्ड का मानवीय दृष्टिकोण: अब ‘हाजिरी’ नहीं बनेगी भविष्य में रोड़ा
यूपी बोर्ड अपनी सख्ती और अनुशासन के लिए देशभर में जाना जाता है। सामान्य नियमों के तहत बोर्ड परीक्षा में बैठने के लिए कम से कम 75% उपस्थिति अनिवार्य होती है। लेकिन ग्रामीण इलाकों की विषम परिस्थितियों, खेती-किसानी के सीजन, बीमारी या अन्य पारिवारिक कारणों से कई छात्र स्कूल नहीं पहुंच पाते थे। बोर्ड का मानना है कि परीक्षा देना हर छात्र का मौलिक अधिकार है और महज हाजिरी कम होने की वजह से किसी भी मेधावी का एक साल बर्बाद नहीं होना चाहिए। 2026 की परीक्षाओं के लिए बोर्ड ने “छात्र हित सर्वोपरि” का नारा बुलंद किया है।
53 लाख छात्रों को मिलेगा मौका, प्रिंसिपलों को दिए सख्त निर्देश
इस साल यूपी बोर्ड की 10वीं और 12वीं की परीक्षा में रिकॉर्ड 53 लाख छात्र शामिल हो रहे हैं। बोर्ड के अधिकारियों ने सभी स्कूलों के प्रधानाचार्यों को सख्त निर्देश दिए हैं कि वे उपस्थिति की कमी का हवाला देकर किसी भी छात्र का एडमिट कार्ड न रोकें। बोर्ड ने स्कूलों को सलाह दी है कि वे छात्रों की हाजिरी को सहानुभूति के साथ देखें और विशेष अनुमति देकर उन्हें परीक्षा में शामिल होने का मार्ग प्रशस्त करें। इस कदम का उद्देश्य प्रदेश में ‘ड्रॉपआउट रेट’ को कम करना और छात्रों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़े रखना है।
एडमिट कार्ड वितरण प्रक्रिया हुई तेज, डिजिटल पोर्टल पर अपडेट
अटेंडेंस की उलझन सुलझने के साथ ही अब एडमिट कार्ड जारी करने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ ली है। उत्तर प्रदेश के स्कूलों को पोर्टल पर छात्रों का डेटा अपडेट करने के लिए अतिरिक्त समय दिया गया था। अब स्कूल जल्द ही एडमिट कार्ड डाउनलोड कर छात्रों को वितरित करना शुरू कर देंगे। बोर्ड ने छात्रों को सतर्क किया है कि एडमिट कार्ड मिलते ही वे अपना नाम, पिता का नाम, फोटो और विषयों की जांच अच्छी तरह कर लें, ताकि परीक्षा केंद्र पर किसी तकनीकी समस्या का सामना न करना पड़े।
अभिभावकों ने जताई खुशी, बोर्ड के फैसले की चौतरफा सराहना
यूपी बोर्ड के इस फैसले की हर तरफ सराहना हो रही है। खासकर ग्रामीण अंचल के अभिभावकों का कहना है कि कई बार मजबूरीवश बच्चे स्कूल नहीं जा पाते थे, जिससे उनके मन में साल खराब होने का डर बना रहता था। बोर्ड की इस नरमी ने न केवल छात्रों का तनाव कम किया है, बल्कि उन्हें और बेहतर तरीके से तैयारी करने के लिए प्रोत्साहित भी किया है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से बोर्ड परीक्षा के परिणामों में भी सकारात्मक सुधार देखने को मिल सकता है।














