
हमारे देश में शादी की बातचीत में पारंपरिक नियमों का दबदबा रहा है, लेकिन अब इसमें धीरे-धीरे परिवर्तन हो रहा है । शादी.कॉम की नई रिपोर्ट, शादी ट्रेंडिंग के मुताबिक भारत में ऐसी लड़कियों की संख्या बढ़ रही है, जो खुद कदम बढ़ाकर बातचीत की शुरुआत करती हैं, और ये लड़कियाँ आत्मविश्वास के साथ बात शुरू करती हैं ।
अपने प्लेटफॉर्म से मिले डेटा के आधार पर इस रिपोर्ट में सामने आया है कि आधुनिक समय में भारत में मैचमेकिंग की शुरुआत करने का तरीका बदल रहा है । अब लड़कियाँ यह इंतजार नहीं कर रही हैं कि कोई उनसे आगे बढ़कर संपर्क करेगा, बल्कि वो बातचीत की शुरुआत खुद कर रही हैं । वो सक्रिय रहकर अपनी रुचि जाहिर कर रही हैं और संबंधों की शुरुआत पर अपना नियंत्रण स्थापित कर रही हैं ।
दिलचस्प बात यह है कि यह परिवर्तन केवल बड़े मेट्रो शहरों में नहीं हो रहा है, बल्कि टियर 2 और टियर 3 शहरों में भी देखने को मिल रहा है। इस प्लेटफॉर्म पर शादी की बातचीत शुरू करने में लखनऊ, पटना, मदुरई, विशाखापट्नम और नागपुर की लड़कियाँ सबसे आगे हैं । छोटे शहरों में हो रहा यह परिवर्तन इस धारणा को कमजोर कर रहा है कि डेटिंग के व्यवहार में परिवर्तन आमतौर से मेट्रो शहरों से शुरू होता है।
इसके विपरीत, चेन्नई, हैदराबाद और दिल्ली जैसे टियर 1 शहरों में लड़कियों द्वारा बातचीत की शुरुआत कम देखने को मिल रही है, वहीं मुंबई और बैंगलुरू में यह रूझान बिल्कुल भी दिखाई नहीं देता ।
ये नतीजे संस्कृति में एक बड़ा बदलाव प्रदर्शित करते हैं । विकसित होते हुए भारत में लड़कियाँ पारंपरिक नियमों को बदल रही हैं और दिल के मामलों में अपना ज्यादा नियंत्रण स्थापित कर रही हैं ।
स्बसे ज्यादा मैच वाले शहरः
भारत में मैचमेकिंग के नियम फिर से बन रहे हैं । इसमें मेट्रो शहरों पर केंद्रित पुरानी मान्यता बदल रही है । शादी.कॉम की नई रिपोर्ट, शादी ट्रेंडिंग के अनुसार, जिन शहरों में सबसे अधिक संख्या में मैच बने हैं, उनमें संबंधों के विकास में एक जबरदस्त परिवर्तन प्रदर्शित होता है ।
उत्तर भारत मैचमेकिंग में आई तेजी का स्पष्ट केंद्र बनकर उभरा है । गुरुग्राम, नोएडा, दिल्ली, लखनऊ और पंचकुला में सबसे अधिक मैचमेकिंग हुई हैं। वहीं एनसीआर और उत्तर भारत भी मैचमेकिंग के केंद्र बन गए हैं । अकेले गुड़गाँव में मुंबई के मुकाबले 36 प्रतिशत अधिक मैच बने, जिससे प्रदर्शित होता है कि यहाँ पर बातचीत किस प्रकार आगे बढ़कर मजबूत रिश्तों में तब्दील होती है। गुड़गाँव के यूज़र्स में मुंबई के यूज़र्स के मुकाबले 48 प्रतिशत अधिक दिलचस्पी दर्ज होती है, जिससे इस बढ़त का अनुमान मिलता है ।
लेकिन कहानी यहीं खत्म नहीं होती ।
इस रूझान में दक्षिण भारत के शहर केवल शामिल ही नहीं हो रहे हैं, बल्कि तेजी से रफ्तार भी पकड़ रहे हैं । चेन्नई, बैंगलुरू, सिकंदराबाद और कोयम्बटूर में सबसे अधिक संख्या में मैच बन रहे हैं, वहीं मैसुरू, मदुरई और कोच्चि में मैच बनने की दर में 30 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज हुई है। यह तेजी केवल एक मेट्रो शहर तक सीमित नहीं है । यह बड़े शहरों और टियर 2 शहरों में भी देखने को मिल रही है ।
असल में, यूज़र्स को 16 से अधिक मैच मिलने वाले हर पाँच में से दो शहर टियर 2 शहर थे। इससे लंबे समय से चली आ रही यह मान्यता कमजोर होती है कि मैचमेकिंग केवल मेट्रो शहरों की आबादी में सफल होती है ।
इन नतीजों से उत्तर और दक्षिण भारत में हो रहा व्यवहार का एक बड़ा परिवर्तन प्रदर्शित होता है कि उत्साह और सहभागिता उन जगहों को आकार दे रहे हैं, जहाँ सबसे अधिक संबंध बनते हैं ।















