बाराबंकी शूटआउट: हिस्ट्रीशीटर शोएब किदवई हत्याकांड में STF का एक्शन, 3 संदिग्ध हिरासत में, वकीलों में जबरदस्त उबाल

बाराबंकी। उत्तर प्रदेश के बाराबंकी जिले में शुक्रवार दोपहर हुए दुस्साहसिक हत्याकांड ने पूरे प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। नगर कोतवाली क्षेत्र के असेनी मोड़ के पास हिस्ट्रीशीटर अधिवक्ता शोएब किदवई उर्फ बॉबी की दिनदहाड़े गोली मारकर हत्या के बाद अब शासन ने मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच की कमान लखनऊ एसटीएफ (STF) को सौंप दी है। इस हाई-प्रोफाइल मामले में एसटीएफ और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीम ने देर रात बड़ी कार्रवाई करते हुए तीन संदिग्धों को दबोच लिया है।

एसटीएफ और पुलिस का एक्शन: लखनऊ में दी दबिश

शोएब किदवई हत्याकांड के खुलासे के लिए एसटीएफ और बाराबंकी पुलिस की एसओजी (SOG) टीम पूरी ताकत झोंक रही है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार, बीती रात लखनऊ के विभिन्न ठिकानों पर छापेमारी के दौरान तीन संदिग्धों को हिरासत में लिया गया है। बताया जा रहा है कि इन संदिग्धों से गुप्त स्थान पर गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस का दावा है कि वे मुख्य शूटरों और इस पूरी साजिश के मास्टरमाइंड के बेहद करीब पहुंच चुके हैं। सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस डेटा के जरिए हत्यारों के भागने के रूट को ट्रैक किया जा रहा है।

मुख्तार अंसारी गैंग से जुड़े रहे हैं तार

अधिवक्ता शोएब किदवई का पुराना आपराधिक इतिहास रहा है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, शोएब का नाम मुख्तार अंसारी गैंग से भी जुड़ा रहा है। इसी बैकग्राउंड को देखते हुए एसटीएफ की एंट्री को बेहद अहम माना जा रहा है। जांच एजेंसियां इस बात की भी पड़ताल कर रही हैं कि कहीं यह हत्या पुरानी रंजिश या गैंगवार का नतीजा तो नहीं है। असेनी मोड़ जैसे व्यस्त इलाके में इस तरह के शूटआउट ने पुलिसिंग और सुरक्षा घेरे की पोल खोल कर रख दी है।

वकीलों में भारी आक्रोश: 48 घंटे का अल्टीमेटम

इस हत्याकांड के बाद बाराबंकी के वकीलों में जबरदस्त उबाल देखने को मिल रहा है। शनिवार को पोस्टमार्टम हाउस से लेकर कलेक्ट्रेट परिसर तक वकीलों ने जमकर प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। बाराबंकी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष नरेश वर्मा ने पुलिस प्रशासन को सख्त चेतावनी देते हुए 48 घंटे का समय दिया है। उन्होंने कहा, “पूरे उत्तर प्रदेश में अधिवक्ताओं को निशाना बनाया जा रहा है। अगर 48 घंटे के भीतर हत्यारों की गिरफ्तारी और घटना का खुलासा नहीं हुआ, तो हम कार्य बहिष्कार कर बड़े आंदोलन के लिए मजबूर होंगे।”

न्याय के लिए लामबंद हुए अधिवक्ता

वकीलों के आक्रोश को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के आला अधिकारी उन्हें शांत करने में जुटे हैं। कलेक्ट्रेट परिसर में सुरक्षा बढ़ा दी गई है। वकीलों ने साफ कर दिया है कि वे अब केवल ठोस कार्रवाई चाहते हैं। बार एसोसिएशन का कहना है कि एक अधिवक्ता की दिनदहाड़े हत्या न्यायपालिका और समाज के लिए बड़ा खतरा है। फिलहाल पूरी नजर एसटीएफ की अगली कार्रवाई पर टिकी है, जिससे इस सनसनीखेज मर्डर मिस्ट्री से पर्दा उठ सके। 

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