नई रिसर्च में चौंकाने वाला खुलासा….वायु प्रदूषण से बढ़ रही दिमागी बीमारी, इन लोगों को ज्यादा खतरा

नई दिल्ली/वॉशिंगटन: हम अक्सर वायु प्रदूषण को केवल सांस की बीमारियों, अस्थमा या फेफड़ों के कैंसर से जोड़कर देखते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि जिस हवा में आप सांस ले रहे हैं, वह आपके सोचने-समझने की शक्ति को भी खत्म कर रही है? एक ताजा और चौंकाने वाली रिसर्च ने दुनिया भर के हेल्थ एक्सपर्ट्स की चिंता बढ़ा दी है। इस स्टडी के अनुसार, हवा में मौजूद जहरीले कण सीधे आपके दिमाग पर हमला कर रहे हैं, जिससे बुजुर्गों में अल्ज़ाइमर (Alzheimer’s) और याददाश्त खोने जैसी गंभीर बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।


2.78 करोड़ बुजुर्गों पर महा-स्टडी: दिमाग तक पहुंच रहे हैं सूक्ष्म कण

अमेरिका की मशहूर एमोरी यूनिवर्सिटी (Emory University) की टीम ने एक विशाल अध्ययन किया है, जिसने प्रदूषण और दिमागी सेहत के बीच के खतरनाक संबंध को बेनकाब किया है। यह रिसर्च साल 2000 से 2018 के बीच लगभग 2.78 करोड़ बुजुर्गों (65 साल से अधिक उम्र) पर की गई।

अध्ययन में पाया गया कि हवा में मौजूद पार्टिकुलेट मैटर (PM 2.5) यानी सूक्ष्म कण सांस के जरिए फेफड़ों में और फिर वहां से खून के प्रवाह के साथ सीधे मस्तिष्क तक पहुंच जाते हैं। ये कण इतने बारीक होते हैं कि शरीर का नेचुरल डिफेंस सिस्टम इन्हें रोक नहीं पाता।

कैसे दिमाग को ‘बीमार’ बनाता है प्रदूषण?

प्रदूषण के कण जब दिमाग में प्रवेश करते हैं, तो वहां सूजन (Inflammation) पैदा करते हैं। रिसर्च के मुताबिक, यह प्रक्रिया दिमाग के न्यूरॉन्स के बीच होने वाले संचार को कमजोर कर देती है।

  • टाउ प्रोटीन (Tau Protein): प्रदूषण के कारण मस्तिष्क में ‘टाउ’ नामक प्रोटीन का असामान्य जमाव होने लगता है। यही वह प्रोटीन है जो धीरे-धीरे याददाश्त को नष्ट करता है और अल्जाइमर का मुख्य कारण बनता है।
  • न्यूरो डिसऑर्डर: लंबे समय तक प्रदूषित हवा में रहने से दिमाग के काम करने की क्षमता घटने लगती है, जिससे डिमेंशिया और अन्य न्यूरोलॉजिकल बीमारियां जन्म लेती हैं।

इन लोगों को है सबसे ज्यादा खतरा

स्टडी ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण हर किसी के लिए बुरा है, लेकिन कुछ लोगों के लिए यह ‘साइलेंट किलर’ साबित हो रहा है:

  1. पहले से बीमार व्यक्ति: जिन्हें पहले कभी स्ट्रोक आ चुका हो या जो हाई ब्लड प्रेशर के मरीज हों, उनमें प्रदूषण के कारण अल्जाइमर होने की संभावना सबसे अधिक होती है।
  2. बुजुर्ग: 65 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का मस्तिष्क इन सूक्ष्म कणों के प्रति अधिक संवेदनशील होता है।
  3. अन्य समस्याएं: हालांकि दर कम है, लेकिन प्रदूषण से डिप्रेशन और स्ट्रोक का खतरा भी लगातार बना रहता है।

प्रदूषण के वार से दिमाग को कैसे बचाएं?

विशेषज्ञों का कहना है कि अब समय आ गया है कि हम वायु प्रदूषण को केवल ‘पर्यावरण’ नहीं बल्कि ‘मेंटल हेल्थ’ की समस्या के रूप में देखें। बचाव के लिए ये तरीके अपनाएं:

  • AQI चेक करें: बाहर निकलने से पहले एयर क्वालिटी इंडेक्स जरूर देखें। अगर प्रदूषण ज्यादा है, तो बुजुर्गों को बाहर जाने से बचें।
  • एयर प्यूरीफायर: घर के अंदर की हवा को शुद्ध रखने के लिए अच्छे क्वालिटी के एयर प्यूरीफायर का इस्तेमाल करें।
  • मास्क का प्रयोग: बाहर जाते समय N95 मास्क पहनें, जो सूक्ष्म कणों को रोकने में सक्षम है।
  • पौष्टिक आहार: एंटी-ऑक्सीडेंट से भरपूर भोजन लें, जो शरीर और दिमाग की सूजन को कम करने में मदद कर सके।  में और जानकारी चाहते हैं?

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