राष्ट्रपति को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट से करारा झटका…ट्रंप का गुस्सा और ‘प्लान-बी’ का ऐलान: 10% ग्लोबल टैरिफ लागू

वाशिंगटन/नई दिल्ली।  अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ‘टैरिफ राज’ पर वहां की सर्वोच्च अदालत ने कड़ा प्रहार किया है। शुक्रवार, 20 फरवरी 2026 को आए एक ऐतिहासिक फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप द्वारा लगाए गए ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ और अन्य व्यापारिक शुल्कों को असंवैधानिक और गैरकानूनी करार दे दिया है। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स की अध्यक्षता वाली पीठ ने 6-3 के बहुमत से फैसला सुनाते हुए कहा कि राष्ट्रपति ने अपनी शक्तियों की सीमा लांघी है। इस फैसले के बाद न केवल ट्रंप का आर्थिक एजेंडा लड़खड़ा गया है, बल्कि अब अमेरिकी सरकार पर जमा किए गए अरबों डॉलर वापस (Refund) करने का भारी दबाव भी बन गया है।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: ‘IEEPA कोई टैक्स वसूलने वाला कानून नहीं’

अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति ने 1977 के इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA) का गलत अर्थ निकाला। कोर्ट ने कहा कि यह कानून राष्ट्रपति को आपातकाल के दौरान लेन-देन को ‘विनियमित’ (Regulate) करने की शक्ति देता है, न कि दुनिया भर पर एकतरफा टैक्स या टैरिफ थोपने की। चीफ जस्टिस जॉन रॉबर्ट्स ने कड़े शब्दों में कहा— “संविधान ने टैक्स लगाने की शक्ति स्पष्ट रूप से संसद (Congress) को दी है, राष्ट्रपति को नहीं। राष्ट्रपति बिना विधायी अनुमति के खुद को असीमित शक्तियों का स्वामी नहीं मान सकते।”

खजाने में आए 264 अरब डॉलर पर संकट, रिफंड की मांग तेज

भले ही ट्रंप के टैरिफ ने अमेरिकी खजाने को मालामाल कर दिया था, लेकिन अब वही पैसा सरकार के लिए गले की फांस बन गया है। आंकड़ों के अनुसार:

  • राजस्व संग्रह: साल 2025 में अमेरिका ने कुल 264 अरब डॉलर का सीमा शुल्क (Customs Revenue) वसूला, जो 2024 के 79 अरब डॉलर के मुकाबले तीन गुना से भी ज्यादा था।
  • रिफंड का दावा: विशेषज्ञों का अनुमान है कि अवैध घोषित किए गए IEEPA टैरिफ के तहत एकत्र किए गए 175 अरब डॉलर तक की राशि अब कंपनियों को लौटानी पड़ सकती है।
  • कंपनियों की तैयारी: 1,000 से अधिक वैश्विक कंपनियों ने पहले ही रिफंड के लिए कानूनी मोर्चा खोल दिया है।

ट्रंप का गुस्सा और ‘प्लान-बी’ का ऐलान: 10% ग्लोबल टैरिफ लागू

अदालती फैसले से भड़के राष्ट्रपति ट्रंप ने जजों को ‘अदेशभक्त’ बताते हुए अपनी नाराजगी जाहिर की है। हालांकि, उन्होंने हार मानने के बजाय तुरंत ‘प्लान-बी’ का ऐलान कर दिया:

  1. सेक्शन 122 का सहारा: ट्रंप ने अब 1974 के ट्रेड एक्ट के ‘सेक्शन 122’ के तहत सभी देशों पर 10% ग्लोबल टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह कानून बैलेंस ऑफ पेमेंट (BOP) के आधार पर 150 दिनों के लिए शुल्क लगाने की अनुमति देता है।
  2. भारत पर असर: ट्रंप ने स्पष्ट किया कि भारत के साथ जो व्यापार समझौता (Interim Trade Deal) हुआ है, उसमें कोई बदलाव नहीं होगा। भारतीय निर्यातकों को अभी भी तय सीमा के भीतर टैरिफ देना होगा, हालांकि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से कूटनीतिक मेज पर भारत की स्थिति मजबूत हुई है।

वैश्विक ट्रेड वॉर पर क्या होगा असर?

सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले ने फिलहाल के लिए वैश्विक व्यापारिक साझेदारों को बड़ी राहत दी है। चीन, कनाडा, मैक्सिको और भारत जैसे देशों के निर्यातकों के लिए यह कानूनी जीत एक नई उम्मीद लेकर आई है। हालांकि, स्टील और एल्यूमिनियम पर लगे पुराने टैरिफ (Section 232) अभी भी जारी रहेंगे। आने वाले दो हफ्ते अमेरिकी अर्थव्यवस्था और वैश्विक बाजार के लिए निर्णायक होंगे, क्योंकि ट्रंप प्रशासन अब वैकल्पिक कानूनी रास्तों से अपने ‘टैरिफ वॉल’ को बनाए रखने की कोशिश करेगा। 

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