बच्चों का यौन शोषण कर पोर्न वीडियो बेचने के दोषी दंपति को सजा-ए-मौत : 34 बच्चों का यौन शोषण करके वीडियो-फोटो विदेशाें में बेचने का था आरोप


इंटरपोल की रिपोर्ट के आधार अक्टूबर 2020 में सीबीआई ने दर्ज किया केस

भास्कर ब्यूरो

बांदा। बच्चों का यौन शोषण करने और उनके पोर्न वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने के आरोपी दंपति को आखिरकार अदालत ने फांसी की सजा सुना दी। विशेष न्यायाधीश पाक्सो एक्ट ने मामले को जघन्य अपराध मानते हुए दोनों पति-पत्नी को मृत्यु तक फंदे से लटकाने और अलग-अलग छह लाख पांच हजार रुपए का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। अदालत ने सरकार को प्रत्येक पीड़ित को दस-दस लाख बतौर मुआवजा देने की भी हिदायत दी है।
बता दें कि नरैनी के खरौंच गांव निवासी चित्रकूट में सिंचाई विभाग के अवर अभियंता रामभवन पर वर्ष 2020 के अक्टूबर माह में इंटरपोल की रिपोर्ट के आधार पर सीबीआई ने दिल्ली में बच्चों को यौन शोषण का शिकार बनाने और उनके पोर्न वीडियो बनाकर विदेशों में बेचने का मुकदमा दर्ज किया था।

आराेपी जेई को 18 नवंबर 2020 सीबीआई ने नरैनी थाने के खरौंच गांव से गिरफ्तार करके जेल भेज दिया था। पीड़ित बच्चों के बयान के आधार पर आरोपी जेई के कुकृत्यों में सहयोग करने वाली उसकी पत्नी दुर्गावती को भी गिरफ्तार किया था। आरोपों की पुष्टि के लिए पीड़ित 34 बच्चों का नई दिल्ली स्थित एम्स में मेडिकल परीक्षण कराया गया और मामले के विवेचक सीबीआई के डिप्टी एसपी अमित कुमार ने गहन विवेचना करते हुए दोनों के खिलाफ चार्जशीट दािखल की थी।

अभियोजन पक्ष ने प्रभावी पैरवी के दौरान सीबीआई की ओर से मामले में कुल 74 गवाह पेश किए गए और सीबीआई के अपर लोक अभियोजक धारा सिंह ने स्थानीय स्तर पर पाॅक्सो कोर्ट के लोक अभियोजक कमल सिंह गौतम के सहयोग से मामले को अंजाम तक पहुंचाने का काम किया। शुक्रवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट प्रदीप कुमार मिश्रा ने जघन्य घटना के आरोपी दंपति को मृत्यु होने तक फंदे से लटकाने की सजा सुनाई। साथ ही दोनों पर अलग-अलग छह लाख पांच हजार रुपए का जुर्माना भी ठोका है। अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया है कि केंद्र और राज्य सरकारें आपसी सामंजस्य के आधार पर सभी पीड़ित बच्चों को दस-दस लाख रुपए बतौर मुआवजा अदा करें।

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