होली के रंग तो उतर गए, लेकिन कई घरों में मुस्कान छोड़ गई ‘खुशियों के रंग, अपनों के संग’ पहल

पार्थ गौतम फाउंडेशन के अभियान से सैकड़ों जरूरतमंद परिवारों तक पहुंची मदद, त्योहार बीतने के बाद भी चर्चा में बनी है यह मानवीय पहल

होली का त्योहार बीत चुका है। शहर की गलियों से रंग और गुलाल धीरे-धीरे धुल गए हैं, लेकिन बरेली के कई परिवारों के लिए इस बार की होली लंबे समय तक याद रहने वाली बन गई। वजह है एक ऐसी पहल, जिसने जरूरतमंदों के घरों में सिर्फ रंग ही नहीं बल्कि उम्मीद, अपनापन और सहारा भी पहुंचाया।

समाजसेवी पार्थ गौतम और उनकी संस्था पार्थ गौतम फाउंडेशन द्वारा चलाया गया अभियान “खुशियों के रंग, अपनों के संग” इस होली कई जरूरतमंद परिवारों के लिए खास बन गया।

भारत में त्योहार सिर्फ उत्सव नहीं, बल्कि रिश्तों और भावनाओं का संगम होते हैं। लेकिन समाज में ऐसे भी कई परिवार हैं जिनके लिए आर्थिक कठिनाइयों, बीमारी या सामाजिक परेशानियों की वजह से त्योहारों की खुशियां अधूरी रह जाती हैं। ऐसे ही परिवारों तक इस अभियान के माध्यम से संस्था द्वारा सहायता पहुंचाने की कोशिश की गई।

इस अभियान के तहत संस्था के फाउंडर पार्थ गौतम और उनकी टीम कई बस्तियों और घरों तक पहुंचे, परिवारों के साथ बैठकर उनकी बातें सुनीं और उनकी जरूरतों समझीं और जहां तक हो सका उन्हें पूरा करने की कोशिश की। किसी परिवार को मेडिकल सहायता की जरूरत थी, तो कहीं बच्चों की पढ़ाई की चिंता थी। कहीं आर्थिक सहयोग की आवश्यकता थी, तो कहीं सिर्फ यह भरोसा कि मुश्किल समय में कोई साथ खड़ा है।

संस्था का उद्देश्य केवल एक दिन की खुशी देना नहीं, बल्कि परिवारों को लंबे समय तक सहारा देना है। पार्थ का मानना है कि त्योहार हमें केवल खुशियां मनाने का ही नहीं, बल्कि समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने का भी मौका देते हैं।

बताते चलें कि इससे पहले भी संस्था द्वारा “हर घर दिवाली” अभियान के माध्यम से 500 से अधिक परिवारों तक सहायता पहुंचाई गई थी। इसके अलावा सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता फैलाने के लिए अब तक लगभग 2000 हेलमेट वितरित किए जा चुके हैं। गर्मियों में संस्था की ओर से लगाए गए जल सेवा केंद्रों से जहां हर रोज़ करीब 7000 लोगों की प्यास बुझाई जा रही है तो वहीं बीती सर्दियों राहत 5000 से अधिक परिवारों तक कंबल एवं जैकेट वितरण कर उन्हें राहत पहुँचाने का सार्थक प्रयास किया गया।

संस्था के युवा संगठन ‘युवा सेवक संघ’ के माध्यम से जरूरतमंद लोगों को यथासंभव फ्री मेडिकल सेवाएं और ट्रीटमेंट की सुविधा प्रदान करने का प्रयास भी सराहनीय है। हालिया होली अभियान भी संस्था के समाज की निरंतर सेवा के प्रयास की एक महत्वपूर्ण कड़ी बनकर सामने आया है।

“खुशियों के रंग, अपनों के संग” जैसे अभियानों का मुख्य संदेश यही है कि त्योहार की असली ख़ूबसूरती और असली मज़ा तब ही है, जब समाज का हर व्यक्ति उस ख़ुशी में शामिल हो सके

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