बंगाल में ‘खेला’ हो गया! ममता बनर्जी के 19 लोकसभा सांसदों ने खोला मोर्चा, राज्यसभा और विधानसभा में भी महाबगावत

कोलकाता: पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कांग्रेस (TMC) इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण राजनीतिक संकट के मुहाने पर खड़ी है। पार्टी के भीतर सुलग रही असंतोष की चिंगारी अब एक ऐसी ज्वाला बन चुकी है जिसने लोकसभा से लेकर राज्यसभा और बंगाल विधानसभा तक ममता बनर्जी के साम्राज्य को हिलाकर रख दिया है। शुक्रवार को सामने आई एक सीक्रेट लिस्ट ने देश की सियासत में भूचाल ला दिया है, जिसमें टीएमसी के 19 लोकसभा सांसदों के नाम शामिल हैं। इस सूची में पार्टी के कई ऐसे कद्दावर और ग्लैमरस चेहरे हैं जो अब तक ममता के सबसे खास सिपहसालार माने जाते थे।

इन 19 सांसदों के नामों से हिला कोलकाता से दिल्ली तक का गलियारा

सूत्रों के हवाले से जो सूची लीक हुई है, उसमें टीएमसी के कई बड़े और बेहद चर्चित सांसदों के नाम दर्ज हैं। इनमें शामिल हैं:

  • सायोनी घोष

  • यूसुफ पठान (पूर्व क्रिकेटर)

  • काकोली घोष दस्तीदार

  • शताब्दी रॉय

  • रचना बनर्जी

  • दीपक अधिकारी (देव)

  • जून मलिया

  • पार्थ भौमिक

  • बापी हलदार

  • डॉ. शर्मिला सरकार

  • प्रसून बंद्योपाध्याय

  • जगदीश बर्मा बसुनिया

  • असित कुमार माल

  • अरूप चक्रवर्ती

  • खलीलुर रहमान

  • अबू ताहेर खान

  • मिताली बाग

  • माला रॉय

  • कालीपद सोरेन

दावा किया जा रहा है कि लंबे समय से 20 सांसदों के अलग गुट बनाने की तैयारी चल रही थी और यह पूरी स्क्रिप्ट सिर्फ एक बेहद वरिष्ठ सांसद के अंतिम फैसले के इंतजार में रुकी हुई थी।

मई में ही स्पीकर ओम बिरला को सौंप दिया था पत्र, NDA में जाने की अटकलें तेज

सियासी गलियारों से आ रही बेहद चौंकाने वाली खबर के मुताबिक, इन 19 बागी सांसदों ने मई महीने में ही लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर उन्हें अपना एक साझा पत्र सौंप दिया था। हालांकि, इस बात को लेकर अभी सस्पेंस बरकरार है कि यह बागी गुट सीधे राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) का हिस्सा बनेगा या फिर संसद में एक अलग समूह के तौर पर बैठकर सरकार को बाहर से समर्थन देगा।

राज्यसभा में ताश के पत्तों की तरह बिखरी TMC, महज 4 दिन में 4 बड़े इस्तीफे

लोकसभा के साथ-साथ उच्च सदन यानी राज्यसभा में भी ममता बनर्जी की जमीन खिसकती नजर आ रही है। पिछले महज चार दिनों के भीतर टीएमसी को एक के बाद एक चार बड़े झटके लगे हैं। ताजा घटनाक्रम में सांसद कोयल मलिक ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनसे ठीक पहले सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश बरेक जैसे दिग्गज नेता भी संसद सदस्यता से त्यागपत्र दे चुके हैं। सुखेंदु शेखर रे ने तो पार्टी के सभी संगठनात्मक पदों से भी पूरी तरह नाता तोड़ लिया है। इन ताबड़तोड़ इस्तीफों के बाद राज्यसभा में टीएमसी की ताकत आधी रह गई है और सांसदों की संख्या 13 से घटकर अब सिर्फ 9 बची है।

विधानसभा में भी तख्तापलट की तैयारी? रिताब्रता बनर्जी का दावा- साथ हैं 64 विधायक

बगावत की यह आग सिर्फ दिल्ली तक सीमित नहीं है, बल्कि कोलकाता के राज्य विधानसभा मुख्यालय में भी दावानल बन चुकी है। बागी गुट का झंडा बुलंद कर रहे नेता रिताब्रता बनर्जी ने एक विस्फोटक दावा करते हुए कहा है कि उनके संपर्क में आने वाले विधायकों का आंकड़ा अब 64 तक पहुंच चुका है। गौरतलब है कि टीएमसी ने विधानसभा चुनाव में 80 सीटों पर फतह हासिल की थी। अगर रिताब्रता बनर्जी का यह दावा कानूनी तौर पर सही साबित होता है, तो ममता बनर्जी के खेमे में महज 16 विधायक ही रह जाएंगे। ऐसी स्थिति में पश्चिम बंगाल की ममता सरकार अल्पमत में आकर गिर सकती है।

शिवसेना और NCP जैसा हश्र? चुनाव आयोग जा सकता है बागी गुट, नाम और निशान पर खतरा

इस पूरे सियासी ड्रामे का सबसे खतरनाक मोड़ आना अभी बाकी है। कयास लगाए जा रहे हैं कि यह बागी गुट बहुत जल्द भारत निर्वाचन आयोग (ECI) का दरवाजा खटखटा सकता है। यह समूह बहुमत का हवाला देकर चुनाव आयोग के सामने खुद को ‘असली तृणमूल कांग्रेस’ घोषित करने की मांग रखेगा। यदि कानून और आंकड़ों के खेल में आयोग ने इस बागी गुट के पक्ष में फैसला दे दिया, तो ममता बनर्जी के हाथों से उनकी अपनी बनाई पार्टी का नाम और ‘जोड़ा फूल’ (आधिकारिक चुनाव चिह्न) भी हमेशा के लिए छिन सकता है। इससे पहले महाराष्ट्र में शिवसेना (उद्धव ठाकरे) और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार) के साथ भी देश ऐसा ही दल-बदल और पार्टी छिनने का खेल देख चुका है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment