लंदन : ऑस्ट्रेलिया और कनाडा की राह पर चलते हुए अब ब्रिटेन ने भी बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य और सुरक्षा को लेकर एक बेहद सख्त और ऐतिहासिक कदम उठाने का फैसला किया है. ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने देश के नाम एक बड़े संदेश में ऐलान किया है कि उनकी सरकार 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया के इस्तेमाल पर पूरी तरह प्रतिबंध (बैन) लगाने जा रही है. प्रधानमंत्री स्टार्मर ने इसे देश के भविष्य के लिए एक बड़ा और बेहद जरूरी कदम बताया है. ब्रिटिश सरकार की योजना इस कानून को आगामी क्रिसमस से पहले संसद से पास कराने की है, जिसके बाद सुरक्षा के ये कड़े उपाय फरवरी-मार्च 2027 तक पूरे देश में प्रभावी रूप से लागू कर दिए जाएंगे. प्रधानमंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि गहन रिसर्च और ठोस सबूतों को देखने के बाद ही बच्चों को इस डिजिटल लत से बचाने का फैसला लिया गया है क्योंकि सोशल मीडिया यूके (UK) के बच्चों को लगातार उदास, तनावग्रस्त और असुरक्षित महसूस करा रहा है.
तेजी से बदलती डिजिटल दुनिया बच्चों को पहुंचा रही है भारी नुकसान
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर जारी एक भावुक और विचारणीय वीडियो संदेश में ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने एक पिता के तौर पर अपने अनुभव साझा किए. उन्होंने कहा कि हर माता-पिता अपने बच्चों के लिए दुनिया का सबसे बेहतरीन और सुरक्षित माहौल चाहते हैं. मैं भी अपने दोनों बच्चों के लिए दिल से यही चाहता हूं कि वे सुरक्षित रहें और खुश रहें. स्टार्मर ने अपने बचपन को याद करते हुए कहा कि जब हम बड़े हो रहे थे, तब स्थितियां इतनी जटिल नहीं थीं और माहौल काफी आसान था. लेकिन आज के दौर में बच्चों को एक ऐसी आभासी दुनिया में कदम रखना पड़ता है जो बहुत तेजी से बदल रही है. आजकल टेक्नोलॉजी बच्चों की जिंदगी के हर छोटे-बड़े पहलू में इस कदर दाखिल हो चुकी है कि वह चाहकर भी इससे दूर नहीं रह पाते और हम सभी जानते हैं कि यह स्थिति उन्हें गंभीर नुकसान पहुंचा रही है.
अंतहीन स्क्रॉलिंग की लत से छूटा खेल, नींद और परिवार का साथ
प्रधानमंत्री स्टार्मर ने देशव्यापी परामर्श (कंसल्टेशन) का हवाला देते हुए बताया कि इस मुद्दे पर माता-पिता की राय बिल्कुल साफ और हैरान करने वाली रही है. देश के हजारों पेरेंट्स ने बेहद चिंता जताते हुए स्वीकार किया है कि उनके बच्चों को सोशल मीडिया की भयानक लत लग चुकी है. यह प्लेटफॉर्म्स बच्चों को एक ऐसे कभी न खत्म होने वाले स्क्रॉलिंग के चक्रव्यूह (रील और शॉर्ट्स के जाल) में फंसा देते हैं, जहां से निकलना उनके वश में नहीं होता. इस लत के कारण बच्चों के खेलने-कूदने की उम्र घर के कमरों में सिमट रही है, उनकी नींद का चक्र पूरी तरह बिगड़ चुका है और सबसे दुखद यह है कि वे अपने परिवार के साथ समय बिताने से कूर भाग रहे हैं. यह स्थिति बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य (Mental Health) को सीधे तौर पर तबाह कर रही है, जिसके लिए पेरेंट्स को सरकार के सख्त सहयोग की जरूरत थी.
टेक दिग्गजों से टक्कर लेने को तैयार ब्रिटिश सरकार, कहा- हम ही जीतेंगे
इस कड़े फैसले के राजनीतिक और व्यावसायिक पहलुओं पर खुलकर बात करते हुए ब्रिटिश प्रधानमंत्री ने कहा कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों पर बैन लगाने का यह काम इतना आसान नहीं है और वे इस बारे में पूरी तरह ईमानदार हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि सरकार ने इसमें किसी तरह की जल्दबाजी नहीं की है, बल्कि विभिन्न देशों के अनुभवों और वैज्ञानिक सबूतों का बेहद बारीकी से अध्ययन किया है. स्टार्मर ने कहा कि जैसे-जैसे टेक्नोलॉजी बदल रही है, हमें भी बच्चों को बचाने के तरीके बदलने होंगे. उन्होंने खुलकर स्वीकार किया कि इस फैसले का दुनिया की कुछ सबसे अमीर और ताकतवर टेक कंपनियों (सोशल मीडिया संगठनों) द्वारा भारी विरोध किया जा रहा है और आगे भी तीखा विरोध झेलना पड़ेगा. लेकिन उन्होंने हुंकार भरते हुए कहा कि हम इन कंपनियों के सामने पूरी मजबूती से खड़े होंगे और जीत हमारी ही होगी क्योंकि हमारे देश के बच्चे एक मजबूत, निष्पक्ष ब्रिटेन में एक खुशहाल और सुरक्षित बचपन पाने के हकदार हैं.
स्नैपचैट, टिकटॉक और इंस्टाग्राम पर गिरेगी गाज, व्हाट्सऐप को राहत
ब्रिटिश सरकार द्वारा जारी आधिकारिक बयान के मुताबिक, यूके के अधिकारी इस सोशल मीडिया प्रतिबंध को लागू करने के लिए ऑस्ट्रेलिया के सफल डिजिटल मॉडल का इस्तेमाल करने की योजना बना रहे हैं. इस ऐतिहासिक प्रतिबंध के दायरे में दुनिया के सबसे लोकप्रिय सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म जैसे स्नैपचैट (Snapchat), टिकटॉक (TikTok), यूट्यूब (YouTube), इंस्टाग्राम (Instagram), फेसबुक (Facebook) और एक्स (X) शामिल होंगे. हालांकि, सरकार ने व्यावहारिक कनेक्टिविटी को ध्यान में रखते हुए व्यक्तिगत और पारिवारिक बातचीत के लिए इस्तेमाल होने वाली मैसेजिंग सर्विसेज जैसे व्हाट्सऐप (WhatsApp) और सिग्नल (Signal) को फिलहाल इस कड़े प्रतिबंध के दायरे से बाहर रखने का फैसला किया है.
18 साल से कम उम्र वालों के लिए AI ‘रोमांटिक पार्टनर’ चैटबॉट्स पर भी रोक
सोशल मीडिया के साथ-साथ ब्रिटिश सरकार ने एक और बड़े डिजिटल खतरे पर कड़ा प्रहार किया है. सरकार ने तथाकथित आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) ‘रोमांटिक पार्टनर’ चैटबॉट्स के बढ़ते चलन पर चिंता जताई है. आधिकारिक बयान में कहा गया है कि जो AI चैटबॉट्स यूजर्स के साथ सेक्शुअल रिलेशनशिप या एडल्ट रोलप्ले करने के लिए डिजाइन किए गए हैं, उनके इस्तेमाल के लिए अब न्यूनतम उम्र सीमा 18 वर्ष तय की जाएगी. किशोरों के मानसिक और शारीरिक विकास को सुरक्षित रखने के लिए देश के ज्यादातर हिस्सों में 18 साल से कम उम्र के युवाओं के लिए AI चैटबॉट्स की इस तरह की अंतरंग या इंटिमेट फंक्शनैलिटीज को पूरी तरह से ब्लॉक और रिस्ट्रिक्ट कर दिया जाएगा.
देश के 90 फीसदी माता-पिता और खुद युवाओं ने किया इस फैसले का समर्थन
ब्रिटेन सरकार का यह ऐतिहासिक ऐलान हवा में नहीं किया गया है, बल्कि इसके पीछे देशव्यापी सर्वे और जनता की भारी मांग है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, बच्चों के माता-पिता से बातचीत में सामने आया कि लोग बच्चों को बचाने के लिए ऐसी ही सख्त कार्रवाई की मांग लंबे समय से कर रहे थे. देश के 10 में से 9 माता-पिता (लगभग 90%) ने साफ तौर पर कहा कि वे 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन का पूरी तरह समर्थन करते हैं. चौंकाने वाली बात यह है कि देश के बहुसंख्यक युवाओं ने भी सरकार के इस कदम की सराहना की है. सर्वे में शामिल दो-तिहाई युवाओं ने खुद माना कि 16 साल से कम उम्र के बच्चों को मानसिक शांति और सुरक्षा के लिए कम से कम कुछ मुख्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स के इस्तेमाल की इजाजत बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.















