यूरोप में आसमान से बरस रही ‘आग’: सड़कों की ट्रैफिक लाइटें मोम की तरह पिघलीं, 1300 से ज्यादा मौतें, WHO ने जारी किया बड़ा अलर्ट

बर्लिन। यूरोप के कई देशों में इस वक्त कुदरत का ऐसा कहर देखने को मिल रहा है, जिसने पूरी दुनिया को हिलाकर रख दिया है। जून के अंतिम सप्ताह से शुरू हुई रिकॉर्डतोड़ हीटवेव (भीषण गर्मी) अब सिर्फ एक असहज मौसम नहीं, बल्कि एक जानलेवा मानवीय संकट बन चुकी है। सोशल मीडिया पर यूरोप के अलग-अलग शहरों से दिल दहला देने वाले वीडियो और तस्वीरें वायरल हो रही हैं। कहीं गाड़ियां गर्मी से फूलकर पिघलती दिख रही हैं, तो कहीं चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें मोमबत्ती की तरह पिघलकर लटक गई हैं। सड़कों का डामर बह रहा है और रेल की पटरियां तक टेढ़ी हो गई हैं। हर तरफ एक ही सवाल गूंज रहा है कि आखिर पूरा यूरोप क्यों जल रहा है?

WHO का बड़ा अलर्ट: 21 जून के बाद 1,300 से ज्यादा लोगों ने गंवाई जान

इस खौफनाक मंजर के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने एक बेहद डरावनी चेतावनी जारी की है। WHO के मुताबिक, 21 जून के बाद से यूरोप में अत्यधिक गर्मी के कारण 1,300 से अधिक अतिरिक्त मौतें दर्ज की जा चुकी हैं। स्वास्थ्य संगठन का साफ कहना है कि जलवायु परिवर्तन (Climate Change) की वजह से आ रही यह भीषण हीटवेव अब कोई अपवाद नहीं है, बल्कि यह हर साल आने वाली एक परमानेंट आफत बनती जा रही है। अस्पतालों पर मरीजों का दबाव चरम पर पहुंच गया है।

यूरोप में हीटवेव की तबाही: 10 बड़े पॉइंट्स में समझें पूरा संकट

  • 1. विश्व स्वास्थ्य संगठन की गंभीर चेतावनी: WHO ने यूरोप में गर्मी से हुई 1,300 से अधिक मौतों को एक ‘गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट’ घोषित किया है। हालात तेजी से बेकाबू हो रहे हैं।

  • 2. कई देशों में टूटे गर्मी के सारे रिकॉर्ड: फ्रांस, स्पेन, इटली, जर्मनी और पोलैंड जैसे देशों में शुरुआती गर्मी ने ही पिछले कई दशकों के रिकॉर्ड ध्वस्त कर दिए हैं। अधिकांश बड़े शहरों में पारा 40 डिग्री सेल्सियस के पार जा चुका है।

  • 3. 15 करोड़ आबादी पर मंडराया संकट: WHO के महानिदेशक टेड्रोस अधानोम घेब्रेयेसस के अनुसार, वर्तमान में यूरोप के करीब 15 करोड़ लोग इस जानलेवा गर्मी को सीधे झेलने के लिए मजबूर हैं, जिससे जनजीवन ठहर गया है।

  • 4. स्कूल हुए बंद, बिजली ग्रिड हुए फेल: असामान्य और असहनीय गर्मी के चलते कई देशों में आनन-फानन में स्कूलों को बंद करना पड़ा है। लगातार एयर कंडीशनर (AC) और कूलिंग सिस्टम चलने के कारण बिजली व्यवस्था (Power Grid) चरमरा गई है।

  • 5. ‘साइलेंट किलर’ बनी हीट स्ट्रेस: डॉक्टरों का कहना है कि अत्यधिक तापमान शरीर के अंगों को फेल कर रहा है। हीट स्ट्रेस के कारण हार्ट अटैक, ब्रेन स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और सांस की बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ गया है।

  • 6. सबसे तेजी से गर्म हो रहा है यूरोप: पर्यावरण विशेषज्ञों का दावा है कि यूरोप महाद्वीप दुनिया के बाकी हिस्सों की तुलना में दोगुनी रफ्तार से गर्म हो रहा है, जो बेहद चिंताजनक है।

  • 7. ग्लोबल वार्मिंग का सीधा असर: जो भीषण हीटवेव पहले कई दशकों में एकाध बार आती थी, वह अब ग्लोबल वार्मिंग के चलते हर साल का नियम बन चुकी है।

  • 8. आम जनता के लिए विशेष हेल्थ एडवाइजरी: WHO ने नागरिकों से दोपहर के वक्त घरों से बाहर न निकलने, लगातार पानी पीते रहने, हल्के सूती कपड़े पहनने और ठंडे स्थानों पर रहने की अपील की है।

  • 9. घरों को ठंडा रखने के देसी नुस्खे: संगठन ने सलाह दी है कि दिन के समय खिड़कियों और पर्दों को पूरी तरह बंद रखें ताकि धूप अंदर न आए, और रात के वक्त हवा के लिए उन्हें खोल दें। साथ ही गैर-जरूरी इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को बंद रखने को कहा गया है।

  • 10. बुजुर्ग और बच्चे सबसे बड़े टारगेट पर: 65 वर्ष से अधिक उम्र के बुजुर्गों, दिल और किडनी के मरीजों पर विशेष नजर रखने की हिदायत दी गई है। इसके अलावा बच्चों या पालतू जानवरों को भूलकर भी बंद गाड़ियों में अकेला न छोड़ने की सख्त चेतावनी दी गई है।

  

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