हमीरपुर। उत्तर प्रदेश के हमीरपुर जिले से न्याय की एक बड़ी और तसल्लीबख्श खबर सामने आई है। राठ तहसील क्षेत्र में करीब चार साल पहले एक किशोर का बेरहमी से अपहरण करने के बाद उसकी हत्या कर शव को जंगल में फेंकने वाले गुनहगारों को अदालत ने उनके किए की अंतिम सजा सुना दी है। विशेष न्यायाधीश (एससी/एसटी) रनवीर सिंह की माननीय अदालत ने इस जघन्य हत्याकांड के दोषी सगे भाइयों समेत चारों आरोपियों को सोमवार को दोषी करार देते हुए उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सख्त सजा सुनाई है।
भारी-भरकम जुर्माना और पीड़ित परिवार को मुआवजा देने का आदेश
अदालत ने दोषियों पर न सिर्फ कानून का चाबुक चलाया है, बल्कि उन पर कड़ा आर्थिक जुर्माना भी लगाया है। विशेष न्यायाधीश ने चारों दोषियों—आलोक कुमार, जितेंद्र कुमार, भान सिंह उर्फ किल्टा और प्रवेंद्र पर 60-60 हजार रुपये का जुर्माना ठोंका है। इसके साथ ही माननीय न्यायालय ने संवेदनशीलता दिखाते हुए यह भी आदेश दिया है कि इस जुर्माने की राशि में से 75 हजार रुपये पीड़ित परिजनों को बतौर प्रतिकर (मुआवजे) के रूप में दिए जाएं, ताकि पीड़ित परिवार को कुछ आर्थिक संबल मिल सके।
3 लाख की फिरौती के लिए रची गई थी खूनी साजिश
इस मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से पैरवी कर रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विजय सिंह ने पूरी घटना की कानूनी जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि यह पूरी वारदात महज 3 लाख रुपये की फिरौती (रैंसम) वसूलने के लालच में अंजाम दी गई थी। अपहरणकर्ताओं ने किशोर को अगवा करने के बाद उसके परिवार से मोटी रकम की डिमांड की थी। घटना के बाद मृतक किशोर के दादा की लिखित तहरीर और मुस्तैदी के आधार पर पुलिस ने चारों आरोपियों के खिलाफ अपहरण, जबरन वसूली और हत्या का मुकदमा दर्ज किया था।
बाबा से फोन पर बात कराने के बाद नाती को उतारा था मौत के घाट
अदालत में पेश की गई मुख्य तहरीर के अनुसार, सिकंदरपुरा राठ के रहने वाले जगमोहन ने पुलिस को बताया था कि उनका नाती सर्वेश कुमार (पुत्र राजेश कुमार) 18 अगस्त 2022 को चरखारी रोड पुलिया के पास खड़ा था। इसी दौरान बाइक पर सवार होकर आए कुल्हैडा निवासी आलोक कुमार और बंगरा निवासी जितेंद्र कुमार सर्वेश को जबरन बाइक पर बिठाकर अगवा कर ले गए।
इसके बाद आरोपियों ने सर्वेश के दादा जगमोहन को फोन किया और 3 लाख रुपये की फिरौती मांगी। अपहरणकर्ताओं ने जब सर्वेश की बात उसके दादा से कराई, तो मासूम सर्वेश ने रोते हुए फोन पर बताया कि मौके पर गोहानी निवासी दो सगे भाई भान सिंह उर्फ किल्टा और प्रवेंद्र भी मौजूद हैं और वे सब उसे मार डालेंगे। इस बातचीत के कुछ ही देर बाद जगमोहन के भाई हलकुट्टा ने फोन पर सूचना दी कि सर्वेश का लहूलुहान शव शंकरशाला के पास जंगल में पड़ा मिला है।
ठोस गवाही और सबूतों के आधार पर मिली कड़ी सजा
पुलिस ने घटना के तुरंत बाद शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम कराया था और चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। मामले की तफ्तीश के दौरान पुलिस ने अदालत के समक्ष पुख्ता वैज्ञानिक साक्ष्य, कॉल डिटेल्स और चश्मदीदों के बयान पेश किए। अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और गवाहों के बयानों का बारीकी से अध्ययन करने के बाद चारों आरोपियों को सर्वेश के अपहरण और हत्या का मुख्य दोषी पाया। सोमवार को अदालत ने अपना ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए चारों को उम्रकैद की सजा देकर साफ कर दिया कि कानून के राज में अपराधियों के लिए कोई जगह नहीं है।










