नई दिल्ली। सोशल मीडिया क्षेत्र की दिग्गज कंपनी मेटा (Meta) इन दिनों अपने प्लेटफॉर्म इंस्टाग्राम पर बच्चों के यौन शोषण और दुर्व्यवहार से जुड़ी सामग्री (CSEAM) को बढ़ावा देने वाले पेड विज्ञापनों को लेकर भारत सरकार के निशाने पर है। इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) द्वारा भेजे गए एक बेहद सख्त नोटिस के बाद, कैलिफोर्निया के मेनलो पार्क स्थित मेटा मुख्यालय ने मंगलवार को एक विस्तृत ब्लॉग पोस्ट जारी कर अपनी सफाई पेश की है। कंपनी ने दावा किया है कि वह इस तरह के संवेदनशील और भयानक अपराधों के खिलाफ जीरो-टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है और इसे रोकने के लिए बड़े पैमाने पर आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक टूल्स का सहारा लिया जा रहा है।
बीबीसी की रिपोर्ट के बाद आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव का बड़ा एक्शन
यह पूरा विवाद तब शुरू हुआ जब बीबीसी (BBC) की एक खोजी रिपोर्ट में यह सनसनीखेज आरोप लगाया गया कि मेटा का रिकमेंडेशन एल्गोरिदम बच्चों के यौन शोषण से जुड़े वीडियो और कंटेंट को प्रमोट कर रहा था। रिपोर्ट में खुलासा हुआ कि इंस्टाग्राम पर ‘रेप वीडियो’ और ‘चाइल्ड वीडियो’ जैसे बेहद आपत्तिजनक कीवर्ड्स वाले पेड विज्ञापन धड़ल्ले से दिखाए जा रहे थे। ये विज्ञापन यूजर्स को सीधे टेलीग्राम (Telegram) चैनलों पर रीडायरेक्ट करते थे, जहां कथित तौर पर ऐसी अवैध सामग्री बेची जा रही थी। इस गंभीर सुरक्षा चूक के सामने आते ही केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अधिकारियों को तुरंत सख्त कदम उठाने के निर्देश दिए, जिसके बाद मंत्रालय ने मेटा को समन जारी कर 7 दिनों के भीतर विस्तृत स्पष्टीकरण मांगा और ऐसे विज्ञापनों को फौरन ब्लॉक करने का आदेश दिया।
‘सोच-समझकर विज्ञापन दिखाना पूरी तरह गलत’, मेटा ने दी सफाई
सरकार के इस कड़े रुख के बाद मेटा ने अपने ब्लॉग में कहा है कि यह आरोप पूरी तरह से बेबुनियाद और गलत है कि वह जानबूझकर ऐसे विज्ञापन लोगों को दिखाती है जिनमें बच्चे हों या जो किसी गलत दिलचस्पी पर आधारित हों। कंपनी ने स्पष्ट किया, ‘हम इन चिंताओं को बेहद गंभीरता से लेते हैं। हम कभी नहीं चाहते कि ऐसा कोई भी कंटेंट हमारे प्लेटफॉर्म पर मौजूद रहे। हम बुरे तत्वों को अपने ऐप्स से दूर रखने और अपने विज्ञापन समीक्षा सिस्टम को मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।’ मेटा ने बताया कि उनकी विज्ञापन समीक्षा प्रक्रिया में विज्ञापनों के लाइव होने से पहले और बाद में ऑटोमेटेड सिस्टम के साथ-साथ इंसानी समीक्षकों (Human Reviewers) की भी मदद ली जाती है, हालांकि कंपनी ने यह भी माना कि कोई भी सिस्टम शत-प्रतिशत त्रुटिहीन नहीं हो सकता।
पिछले साल हटाए 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स और 3.6 करोड़ कंटेंट
अपनी सफाई के पक्ष में आंकड़े पेश करते हुए फेसबुक, इंस्टाग्राम और वॉट्सऐप की पैरेंट कंपनी मेटा ने बताया कि उसने बच्चों के शोषण के खिलाफ AI-बेस्ड एनफोर्समेंट सिस्टम को काफी मजबूत किया है, जो दुनिया भर की 98 प्रतिशत भाषाओं को कवर करता है। पिछले एक साल के भीतर मेटा ने वैश्विक स्तर पर 40 लाख से ज्यादा संदिग्ध अकाउंट्स और बच्चों के शोषण से जुड़े लगभग 3.6 करोड़ कंटेंट को खुद ही (ऑटो-डिटेक्ट करके) हटा दिया है। इसके अलावा, नीति का उल्लंघन करने वाले विज्ञापनदाताओं के बिजनेस अकाउंट्स, विज्ञापन अकाउंट्स और पेजों को हमेशा के लिए प्रतिबंधित कर दिया गया है।
एडवांस्ड AI टूल्स की मदद से भारत में भी हुई बड़ी कार्रवाई
भारत के संदर्भ में डेटा साझा करते हुए मेटा ने बताया कि उसके एडवांस्ड एआई डिटेक्शन टूल्स उन संदिग्ध ऑफ-प्लेटफॉर्म लिंक्स और सिग्नल्स की पहचान करने में सक्षम हैं, जो बच्चों के शोषणकारी गतिविधियों की ओर इशारा करते हैं। पिछले छह महीनों के दौरान भारत में इस तकनीक की मदद से शोषणकारी गतिविधियों से जुड़े संदिग्ध लिंक पोस्ट करने वाले 1,60,000 से ज्यादा अकाउंट्स को चिन्हित कर प्लेटफॉर्म से पूरी तरह डिलीट कर दिया गया है। सरकारी सूत्रों के मुताबिक, फिलहाल शनिवार को भेजे गए नोटिस पर मेटा के आधिकारिक और लिखित जवाब का इंतजार किया जा रहा है, जिसके बाद सरकार इस दिशा में उठाए जाने वाले सुधारात्मक कदमों की समीक्षा करेगी।








