अयोध्या। श्री राम जन्मभूमि मंदिर में भव्य चढ़ावे की चोरी के मामले में उत्तर प्रदेश की अयोध्या पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। इस सनसनीखेज कांड के मुख्य आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश को अदालत ने पूछताछ और छुपाए गए सामान की बरामदगी के लिए 40 घंटे की पुलिस कस्टडी रिमांड (PCR) पर भेज दिया है। विशेष न्यायाधीश (भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम) की अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद यह महत्वपूर्ण आदेश जारी किया।
26 जून से जेल में बंद हैं तीनों आरोपी, 7 दिन की मांगी थी रिमांड
राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के आरोप में गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपी अनुकल्प मिश्रा, लवकुश मिश्रा और करुणेश बीते 26 जून से जिला जेल में न्यायिक कस्टडी में बंद हैं। इस हाई-प्रोफाइल मामले के विवेचक (जांच अधिकारी) आशुतोष त्रिपाठी ने जेल में जाकर तीनों से पूछताछ की थी, जहां आरोपियों ने कबूला था कि उन्होंने चोरी की गई भारी-भरकम धनराशि और मंदिर से जुड़े कई अहम सामान अपने-अपने ठिकानों पर छिपाकर रखे हुए हैं। इसी छिपाई गई रकम और सामान को बरामद करने के लिए जांच अधिकारी ने कोर्ट से आरोपियों की 7 दिनों की पुलिस कस्टडी रिमांड मांगी थी।
कोर्ट रूम में वकीलों के बीच तीखी बहस, वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से जुड़े आरोपी
रिमांड अर्जी पर सुनवाई के दौरान कोर्ट में माहौल काफी गरमा गया था। वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए जेल से तीनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया गया। सुनवाई के दौरान अभियुक्तों के वरिष्ठ अधिवक्ता कुल शेखर सिंह ने पुलिस रिमांड का पुरजोर विरोध किया। उन्होंने ‘भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता’ की धारा 97 का हवाला देते हुए दलील दी कि पुलिस जिलाधिकारी (DM) से सीधे सर्च वारंट लेकर भी आरोपियों के घर की तलाशी ले सकती है, क्योंकि जगह पुलिस को पहले से पता है। इसके लिए पुलिस रिमांड की कोई आवश्यकता नहीं है। इसके जवाब में विशेष लोक अभियोजक ने कोर्ट को आश्वस्त किया कि आरोपियों को साथ लिए बिना और उनकी सटीक निशानदेही के बगैर छिपाए गए माल की शत-प्रतिशत बरामदगी मुमकिन नहीं है।
कड़े पहरे और शर्तों के बीच 8 जुलाई की सुबह 7 बजे से शुरू हुई रिमांड
दोनों पक्षों की तीखी बहस सुनने के बाद विशेष अदालत ने पुलिस को 40 घंटे की सशर्त रिमांड मंजूर की। कोर्ट के आदेश के मुताबिक, पुलिस इन तीनों आरोपियों से 8 जुलाई की सुबह 7 बजे से लेकर 9 जुलाई की रात 10 बजे तक ही हिरासत में पूछताछ कर सकेगी। अदालत ने इस दौरान आरोपियों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पुलिस के सामने कड़ी शर्तें भी रखी हैं।
कोर्ट ने लगाईं ये सख्त शर्तें:
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मेडिकल टेस्ट अनिवार्य: जांच अधिकारी को आरोपियों को जेल से अपनी कस्टडी में लेने से पहले और रिमांड अवधि खत्म होने के बाद वापस जेल में दाखिल करने से ठीक पहले उनका विस्तृत मेडिकल परीक्षण कराना होगा।
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थर्ड डिग्री पर पूरी रोक: पूछताछ के दौरान पुलिस किसी भी सूरत में आरोपियों पर ‘थर्ड डिग्री’ या किसी भी तरह के शारीरिक व मानसिक उत्पीड़न का इस्तेमाल नहीं कर पाएगी।
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वकीलों को निगरानी की छूट: यदि आरोपी चाहें, तो उनके अधिवक्ता पुलिस की इस पूरी कार्रवाई और पूछताछ के दौरान उचित दूरी बनाकर अपनी नजर रख सकते हैं।
अब जिला जेल से रिमांड पर बाहर आने के बाद पुलिस की स्पेशल टीम तीनों आरोपियों को उनके आवास और अन्य गुप्त ठिकानों पर लेकर जाएगी, जहां मंदिर के चढ़ावे से चोरी हुई बड़ी रकम और अन्य जरूरी साक्ष्यों को बरामद करने की कोशिश की जाएगी।











