Amarnath Yatra 2026: 5 दिन में ही क्यों अंतर्ध्यान हो गए बाबा बर्फानी? एक लाख के पार पहुंचा आंकड़ा

श्रीनगर। बाबा बर्फानी के दर्शन की आस लेकर जम्मू-कश्मीर पहुंच रहे लाखों श्रद्धालुओं के लिए एक भावुक कर देने वाली खबर सामने आई है। पवित्र अमरनाथ गुफा में प्राकृतिक रूप से निर्मित होने वाला अलौकिक हिम शिवलिंग इस बार यात्रा शुरू होने के महज पांच दिन के भीतर ही पूरी तरह से अंतर्ध्यान (पिघल) हो गया है। इस खबर ने देश-दुनिया से आ रहे शिवभक्तों को हैरान और थोड़ा मायूस जरूर किया है, लेकिन इसके बावजूद बाबा अमरेश्वर के प्रति उनकी आस्था रत्ती भर भी कम नहीं हुई है। हिम शिवलिंग के विलीन होने के बाद भी जयकारों के साथ श्रद्धालुओं का उत्साह चरम पर है और यात्रा पूरी तेजी के साथ आगे बढ़ रही है।

पांच ही दिन में एक लाख के पार पहुंचा आंकड़ा

इस वर्ष 57 दिनों तक चलने वाली यह पावन अमरनाथ यात्रा बीते 3 जुलाई से शुरू हुई थी, जो आगामी 28 अगस्त तक चलेगी। यात्रा की शुरुआत से ही श्रद्धालुओं में गजब का जोश देखा जा रहा है। पहले चार दिनों के भीतर ही करीब 86 हजार भक्तों ने बाबा के दरबार में हाजिरी लगा ली थी। वहीं, अधिकारियों के मुताबिक पांचवें दिन यह आंकड़ा एक लाख को पार कर गया है। आपको बता दें कि इस साल यात्रा के लिए लगभग चार लाख श्रद्धालुओं ने एडवांस रजिस्ट्रेशन कराया है। इसका मतलब है कि अभी भी तीन लाख से ज्यादा भक्तों का आना बाकी है। हालांकि, अब आने वाले तीर्थयात्री हिम शिवलिंग के साक्षात दर्शन तो नहीं कर पाएंगे, लेकिन पवित्र गुफा की चौखट पर सिर झुकाकर आशीर्वाद जरूर ले सकेंगे।

समय से पहले क्यों पिघले बाबा बर्फानी? उठे गंभीर सवाल

अमरनाथ गुफा में हिम शिवलिंग के इतनी जल्दी अंतर्ध्यान होने के बाद अब विशेषज्ञों और पर्यावरणविदों के बीच चिंता की लकीरें खिंच गई हैं। समय से पहले शिवलिंग पिघलने को लेकर कई तरह के कयास लगाए जा रहे हैं। जानकारों का मानना है कि लगातार बढ़ता तापमान, ग्लोबल वार्मिंग, जलवायु परिवर्तन और बदलते पर्यावरणीय समीकरण इसका सबसे मुख्य कारण हैं। इसके अलावा, कुछ स्थानीय लोगों और जानकारों का यह भी कहना है कि यात्रा प्रबंधन के तहत गुफा के आसपास बड़ी संख्या में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती, कर्मचारियों की मौजूदगी और लगातार हो रहे निर्माण कार्यों की वजह से वहां का प्राकृतिक संतुलन प्रभावित हुआ है। हालांकि, इन दावों को लेकर अभी तक कोई भी आधिकारिक बयान या रिपोर्ट सामने नहीं आई है।

शिवलिंग विलीन पर अटूट है श्रद्धा, गुफा के दर्शन ही सौभाग्य

आमतौर पर माना जाता है कि शिवलिंग के पिघलने से श्रद्धालुओं की संख्या कम हो सकती है, लेकिन इस बार जमीन पर नजारा बिल्कुल उलट है। पवित्र गुफा की ओर बढ़ने वाले भक्तों के कदम जरा भी नहीं डगमगाए हैं। कश्मीर घाटी के रास्तों पर ‘बम-बम भोले’ और ‘हर-हर महादेव’ के नारे लगातार गूंज रहे हैं। श्रद्धालुओं का कहना है कि उनके लिए सिर्फ हिम शिवलिंग ही नहीं, बल्कि भगवान शिव की यह पूरी पवित्र गुफा ही साक्षात पूजनीय है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी रहस्यमयी गुफा में महादेव ने माता पार्वती को अमरता की कथा सुनाई थी। यही वजह है कि भक्त इस पावन गुफा के दर्शन मात्र से ही खुद को धन्य मान रहे हैं।

लगातार तीसरे साल भक्तों को नहीं मिले पूर्ण स्वरूप के दर्शन

बाबा के दरबार में पहुंचे कई श्रद्धालुओं ने अपना दर्द और अटूट विश्वास साझा करते हुए बताया कि वे लगातार तीसरे साल इस कठिन यात्रा पर आए हैं। बीते दो वर्षों की तरह इस बार भी उन्हें बाबा बर्फानी के पूर्ण भव्य स्वरूप के दर्शन नसीब नहीं हो सके, क्योंकि उनके पहुंचने से पहले ही बर्फ पिघल चुकी थी। इसके बाद भी उनके चेहरे पर कोई शिकवा नहीं है। भक्तों का साफ कहना है कि भोलेनाथ के धाम तक सुरक्षित पहुंचना, दुर्गम रास्तों को पार करना और उस पावन स्थली को छू लेना ही उनके जीवन का सबसे बड़ा सौभाग्य है। बाबा का बुलावा आना ही सबसे बड़ा आशीर्वाद है।

दोनों रूटों पर सुरक्षा के कड़े इंतजाम, यात्रा सुचारू रूप से जारी

प्रशासन के मुताबिक, अमरनाथ यात्रा को दोनों ही पारंपरिक मार्गों से पूरी सुरक्षा के साथ संचालित किया जा रहा है। पहला नुनवान-पहलगाम मार्ग है, जो करीब 48 किलोमीटर लंबा और थोड़ा कठिन है। वहीं दूसरा बालटाल मार्ग है, जो गांदरबल जिले से होकर जाता है और इसकी लंबाई करीब 14 किलोमीटर है। प्रशासन ने साफ किया है कि हिम शिवलिंग के अंतर्ध्यान होने के बाद भी सुरक्षा और व्यवस्था में कोई ढील नहीं दी गई है। यात्रा पूरी तरह शांतिपूर्ण ढंग से चल रही है और भक्तों का मानना है कि बाबा के दरबार में लगाई गई हाजिरी कभी खाली नहीं जाती, उनका दर्शन हर हाल में पूर्ण है।

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