
लखनऊ: समाजवादी पार्टी (सपा) के कद्दावर नेता और पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव की मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने आय से अधिक संपत्ति और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में बड़ी कार्रवाई करते हुए दीप नारायण सिंह यादव और उनके पारिवारिक सदस्यों के लखनऊ तथा झांसी स्थित कई ठिकानों पर एक साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की है। ईडी की इस अचानक हुई कार्रवाई से राजनीतिक और प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मच गया है। जांच एजेंसी ने यह कदम यूपी विजिलेंस एस्टेब्लिशमेंट द्वारा दर्ज की गई एफआईआर (FIR) को आधार बनाकर उठाया है। तड़के सुबह शुरू हुई इस छापेमारी के दौरान ईडी की टीमों ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज, डिजिटल डिवाइस और बेनामी संपत्तियों से जुड़े जमीनी रिकॉर्ड को अपने कब्जे में ले लिया है।
विजिलेंस और यूपी पुलिस के बाद अब ED का शिकंजा, जेल में बंद हैं पूर्व MLA
झांसी की गरौठा विधानसभा सीट से दो बार समाजवादी पार्टी के विधायक रह चुके दीप नारायण सिंह यादव का विवादों से पुराना नाता रहा है। जांच टीम के सूत्रों के मुताबिक, पूर्व विधायक पर डकैती, रंगदारी, जमीन कब्जाने और आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने जैसे करीब 60 गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। वर्तमान समय में वह जेल की सलाखों के पीछे बंद हैं। अब उनके पूरे व्यापारिक और राजनीतिक साम्राज्य पर ईडी, यूपी विजिलेंस और उत्तर प्रदेश पुलिस का चौतरफा शिकंजा कस गया है। दीप नारायण सिंह यादव बुंदेलखंड क्षेत्र में समाजवादी पार्टी के बड़े चेहरों में गिने जाते रहे हैं, जिन्होंने साल 2007 और 2012 के विधानसभा चुनाव में गरौठा सीट से सपा के टिकट पर शानदार जीत दर्ज की थी।
छात्र राजनीति से शुरू हुआ सफर, मुलायम सिंह के करीबी बनकर उभरे दीप नारायण
21 जुलाई 1969 को झांसी में जन्मे दीप नारायण सिंह यादव के राजनीतिक करियर की शुरुआत एक आक्रामक छात्र नेता के रूप में हुई थी। उन्होंने कांग्रेस के छात्र संगठन एनएसयूआई (NSUI) के बैनर तले बुंदेलखंड इंटर कॉलेज से छात्रसंघ का पहला चुनाव जीता था। इसके बाद साल 1992 में वह बुंदेलखंड कॉलेज के छात्रसंघ अध्यक्ष चुने गए। इसी दौरान उनकी राजनीतिक सक्रियता को देखते हुए वे सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के संपर्क में आए और समाजवादी पार्टी का दामन थाम लिया। साल 1991 में उन्हें समाजवादी युवजन सभा का झांसी जिला अध्यक्ष बनाया गया। इसके ठीक दो साल बाद, वह झांसी जिला सहकारी बैंक के अध्यक्ष बने और 1998 तक इस पद पर काबिज रहे। सपा संगठन में उन्होंने जिलाध्यक्ष, प्रदेश सचिव, और लोहिया वाहिनी के प्रदेश व राष्ट्रीय अध्यक्ष जैसे कद्दावर पदों की जिम्मेदारी संभाली। साल 2007 में गरौठा सीट से पहली बार विधायक बनने के बाद 2012 में उन्होंने दोबारा जीत दर्ज की, लेकिन 2017 की मोदी लहर में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
डकैती, रंगदारी और जमीन हड़पने के दर्जनों मामले; करोड़ों की संपत्ति हो चुकी है कुर्क
पूर्व विधायक दीप नारायण सिंह यादव पर मारपीट, जान से मारने की धमकी, रंगदारी, डकैती और गैंगस्टर एक्ट जैसी संगीन धाराओं में दर्जनों मुकदमे दर्ज हैं। प्रशासन की ओर से अब तक उनकी करोड़ों रुपये की अवैध और बेनामी संपत्तियां कुर्क की जा चुकी हैं। उन पर सबसे ताजा और बड़ा शिकंजा पिछले साल नवंबर में कसा, जब मोंठ के भुजौंद गांव के रहने वाले प्रेम सिंह पालीवाल ने दीप नारायण, उनके साले अनिल मामा और अन्य करीबियों के खिलाफ बेहद गंभीर धाराओं में केस दर्ज कराया था। आरोप था कि पूर्व विधायक उनकी पुश्तैनी जमीन पर जबरन कब्जा करना चाहते थे। जब पीड़ित परिवार ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ सरेआम मारपीट की गई, जान से मारने की धमकी दी गई और घर में लूटपाट भी की गई। इसके साथ ही पीड़ित से 20 लाख रुपये की मोटी रंगदारी भी मांगी गई थी। इस मामले में पुलिसिया कार्रवाई से बचने के लिए दीप नारायण कई दिनों तक फरार रहे, लेकिन चौतरफा दबाव के बाद उन्होंने कोर्ट में सरेंडर कर दिया, जिसके बाद से वह जेल में हैं।
आय से अधिक संपत्ति मामले में भी घिरे, बुंदेलखंड में खलबली
आपराधिक मुकदमों के अलावा दीप नारायण सिंह यादव के खिलाफ उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग में आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने का एक बड़ा मामला भी चल रहा है। आरोप है कि विधायक रहते हुए उन्होंने अपने पद और रसूख का दुरुपयोग कर आय के ज्ञात स्रोतों से कई गुना ज्यादा संपत्ति खड़ी की। इसी मामले की कड़ियों को जोड़ते हुए प्रवर्तन निदेशालय (ED) की एंट्री हुई है। झांसी और राजधानी लखनऊ में एक साथ हुई इस छापेमारी के बाद बुंदेलखंड की राजनीति में भारी खलबली मची हुई है। कयास लगाए जा रहे हैं कि जब्त किए गए डिजिटल डिवाइस और दस्तावेजों की जांच के बाद पूर्व विधायक और उनके करीबियों पर कानूनी फंदा और ज्यादा मजबूत हो सकता है।










