नेपाल में कांवड़ यात्रा के दौरान भड़की हिंसा: 5 जिलों में कर्फ्यू, ट्रेन-बसें ठप और 3 की मौत; जानिए कैसे शुरू हुआ विवाद और क्यों भड़की हिंसा

काठमांडू/जनकपुर। भारत की सीमा से लगे नेपाल के मधेश प्रांत में हालात एक बार फिर बेहद नाजुक हो गए हैं। प्रांत के पांच जिले सांप्रदायिक हिंसा की आग में झुलस रहे हैं, जहां हिंदू और मुस्लिम समुदाय के बीच उपजे तनाव ने हिंसक रूप ले लिया है। बिगड़ती स्थिति को देखते हुए प्रशासन ने प्रभावित इलाकों में अनिश्चितकालीन कर्फ्यू लगा दिया है। कर्फ्यू के चलते क्षेत्र में सभी शैक्षणिक परीक्षाएं रद्द कर दी गई हैं, वहीं भारत-नेपाल सीमा से सटे इलाकों में ट्रेन और बसों की आवाजाही पूरी तरह ठप हो गई है। सबसे ज्यादा प्रभाव सीमावर्ती जिलों में देखा जा रहा है।

सुनसरी से जनकपुर तक दंगे का खौफनाक असर

हिंसा का सबसे विकराल रूप सुनसरी, सरलाही, जनकपुर और धनुषा जिलों में देखने को मिल रहा है। शुरुआत में स्थानीय स्तर पर उपजे इस विवाद को संभालने में नेपाल प्रशासन नाकाम साबित हुआ, जिसके बाद हालात बेकाबू होते चले गए। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रधानमंत्री बालेन शाह ने काठमांडू में तत्काल सर्वदलीय बैठक बुलाई है। हिंसा पर काबू पाने और शांति बहाल करने के मकसद से सरकार ने गृह मंत्री सुदान गुरुंग को प्रभावित क्षेत्रों में भेजने का फैसला किया है।

जानिए कैसे शुरू हुआ विवाद और क्यों भड़की हिंसा

सांप्रदायिक झड़प की शुरुआत सुनसरी जिले के कप्तानगंज इलाके से हुई। कांवड़ यात्रा की तैयारियों के बीच कुछ युवकों ने इलाके में बिजली के पोल पर लगे एक विशेष समुदाय के धार्मिक झंडे को हटाकर वहां भगवा ध्वज लगा दिया। इसके बाद स्थानीय मंदिर के बाहर तेज आवाज में डीजे बजाया जाने लगा। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, दूसरे पक्ष के युवकों ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया। शुरुआत में हुई नोकझोंक ने देखते ही देखते उग्र रूप धारण कर लिया और दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए।

पुलिस फायरिंग में 3 की मौत, सरकार ने किया मुआवजे का ऐलान

माहौल बिगड़ते ही भीड़ ने पथराव और हिंसा शुरू कर दी। गृह मंत्री सुदान गुरुंग के मुताबिक, उपद्रवियों को खदेड़ने और स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए पुलिस को बल प्रयोग करते हुए गोलियां चलानी पड़ीं। इस गोलीबारी में दो हिंदू युवकों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि एक अन्य युवक गणेश यादव ने भी इलाज के दौरान दम तोड़ दिया। हिंसा में हुई मौतों के बाद जनआक्रोश को देखते हुए सरकार ने सभी मृतक युवकों के परिजनों को 10-10 लाख रुपये का मुआवजा देने की घोषणा की है।

8 साल में 17 बार सुलगा नेपाल: आखिर क्या है बार-बार हिंसा की वजह?

नेपाल में हिंदू-मुस्लिम समुदायों के बीच यह कोई पहली झड़प नहीं है। बीते 8 वर्षों के आंकड़ों पर नजर डालें तो इस तरह के 17 बड़े दंगे हो चुके हैं। इसी साल जनवरी में वीरगंज में हुई हिंसक झड़पों के बाद इलाके में पूरे एक सप्ताह तक कर्फ्यू लागू करना पड़ा था। इससे पहले 2017 में कपिलवस्तु में हुई भयानक हिंसा के कारण 100 से अधिक परिवारों को अपना घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी थी।

धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र का दर्जा और बदलती सामाजिक परिस्थितियां

अंतरराष्ट्रीय संगठनों और विशेषज्ञों ने भी नेपाल में लगातार बढ़ रहे इस तनाव पर चिंता जताई है। यूएन मानवाधिकार काउंसिल (UNHRC) की रिपोर्ट के अनुसार, हाल के वर्षों में नेपाल में धार्मिक ध्रुवीकरण तेजी से बढ़ा है। वर्ष 2008 से पहले नेपाल दुनिया का एकमात्र घोषित हिंदू राष्ट्र था, लेकिन नए संविधान के लागू होने के साथ ही इसे धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र घोषित कर दिया गया।

अमेरिका स्थित गेटिसबर्ग कॉलेज की प्रोफेसर मेगन एडमसन सिजापति के विश्लेषण के अनुसार, 2008 के बाद नेपाल में धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार मजबूत हुए, जिसके बाद अल्पसंख्यक समुदायों ने अपनी धार्मिक पहचान और अधिकारों को लेकर खुलकर मुखर होना शुरू किया। दूसरी ओर, देश की कुल आबादी में 82 प्रतिशत हिस्सेदारी रखने वाले बहुसंख्यक हिंदू समुदाय के बीच अपनी धार्मिक और सांस्कृतिक पहचान को लेकर एक नया जनजागरण देखा जा रहा है। इसी सामाजिक व राजनीतिक बदलाव के संतुलन में आ रही दरारें अक्सर हिंसक संघर्षों का कारण बन रही हैं।

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