चमोली : उत्तराखंड के चमोली जिले के पीपलकोटी में स्थित टीएचडीसी (THDC) की विष्णुगाड़-पीपलकोटी जल विद्युत परियोजना की निर्माणाधीन सुरंग में एक बड़ा और भीषण हादसा हो गया है। टनल के भीतर अचानक भारी मात्रा में मलबा और पानी आ जाने से अंदर काम कर रहे करीब 22 मजदूर फंस गए थे। युद्धस्तर पर चलाए जा रहे राहत एवं बचाव अभियान (Rescue Operation) के दौरान अब तक 20 मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है, जिनमें से 9 मजदूरों की मौत की पुष्टि हो चुकी है, जबकि 14 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनका इलाज चल रहा है।
विभिन्न राज्यों के रहने वाले हैं पीड़ित मजदूर, एसपी ने दी जानकारी
प्रशासन से मिली जानकारी के मुताबिक, इस हादसे में जान गंवाने वाले श्रमिकों में एक-एक व्यक्ति उत्तराखंड के टिहरी और चमोली जिले का रहने वाला है, जबकि अन्य सभी मृतक मजदूर बिहार और झारखंड के मूल निवासी हैं। इसके अलावा, जो मजदूर घायल हुए हैं, उनमें अधिकांश लोग झारखंड, बिहार और छत्तीसगढ़ से ताल्लुक रखते हैं। हादसे का शिकार हुए अन्य लोगों में एक व्यक्ति पंजाब और एक हिमाचल प्रदेश का निवासी बताया जा रहा है। चमोली के पुलिस अधीक्षक सुरजीत सिंह पवार ने बताया कि यह दुर्घटना शाम करीब 6:30 से 6:45 बजे के बीच हुई, जब पीपलकोटी हाइड्रो प्रोजेक्ट की सुरंग के लगभग 1.8 किलोमीटर अंदर एक कैविटी से अचानक भारी मात्रा में पानी और मलबा बाहर आ गया।
बचाव कार्य जारी, टनल में पानी और कीचड़ बढ़ने से आई बाधा
अधिकारियों के अनुसार, सुरंग के द्वार से करीब 1.5 किलोमीटर अंदर यह मलबा आने से श्रमिक अंदर ही फंस गए थे। मौके पर एसडीआरएफ (SDRF) और एनडीआरएफ (NDRF) की टीमें पूरी ताकत और मुस्तैदी के साथ जुटी हुई हैं। टीएचडीसी और एससीसी की भारी मशीनें लगातार मलबा हटाने के काम में लगी हैं। इसके अलावा, टनल के भीतर जमा पानी को बाहर निकालने के लिए 3 बड़े पंप भी लगाए गए हैं। हालांकि, टनल के अंदर पानी और कीचड़ का स्तर बढ़ने के कारण राहत कार्यों में कुछ बाधा भी आई है, लेकिन ताजा जानकारी के मुताबिक बचाव दल ने कुछ और लोगों को ट्रेस कर लिया है और शेष बचे श्रमिकों की तलाश तेजी से की जा रही है।
गंभीर घायलों का चल रहा इलाज, सीएम पुष्कर सिंह धामी ने की हाई-लेवल बैठक
सुरक्षित बाहर निकाले गए 14 मजदूरों में से 3 से 4 मजदूरों की हालत बेहद गंभीर बताई जा रही है, जिन्हें जिला अस्पताल गोपेश्वर में भर्ती कराया गया है। जरूरत पड़ने पर उन्हें उच्च स्तरीय और बेहतर मेडिकल सुविधाएं मुहैया कराने के पूरे पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। घटना की गंभीरता को देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तुरंत स्टेट इमरजेंसी ऑपरेशन केंद्र में एक उच्च स्तरीय बैठक बुलाई और पूरे रेस्क्यू ऑपरेशन की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सरकार की इस वक्त सबसे पहली और सर्वोच्च प्राथमिकता सुरंग में फंसे हर एक व्यक्ति को सुरक्षित बाहर निकालना है। प्रशासन को सख्त निर्देश दिए गए हैं कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की ढिलाई न बरती जाए।
तमक नाले के उफान पर आने से बह गया था लोहे का पुल
चमोली जनपद में मौसम की खराबी और लगातार हो रही भारी बारिश के कारण स्थिति पहले से ही चुनौतीपूर्ण बनी हुई थी। कुछ समय पहले अचानक हुई मूसलाधार बारिश के कारण चमोली का तमक नाला पूरी तरह उफान पर आ गया था। नाले के पानी का बहाव इतना खतरनाक था कि सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा हाल ही में बनाया गया लोहे का एक नया पुल कुछ ही पलों में पानी में बह गया था। पहाड़ी इलाका होने के कारण छोटी नदियां और नाले अचानक उफान पर आ जाते हैं, जिससे स्थानीय लोगों की मुश्किलें और बढ़ जाती हैं। बहरहाल, प्रशासनिक अमला टनल हादसे के रेस्क्यू ऑपरेशन को जल्द से जल्द पूरा करने के लिए पूरी तरह मुस्तैद है।














