
उत्तर प्रदेश के औरैया जिले के बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड में न्याय का इंतजार कर रहे परिजनों को वर्षों बाद बड़ी राहत मिली है। बुधवार को विशेष एमपी-एमएलए कोर्ट के न्यायाधीश विनय प्रकाश ने मामले की अंतिम सुनवाई करते हुए समाजवादी पार्टी के पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक समेत सभी 10 मुख्य आरोपियों को आजीवन सश्रम कारावास की सजा सुनाई। अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए प्रत्येक दोषी पर 50-50 हजार रुपये का भारी अर्थदंड भी आयद किया है। करीब 900 से अधिक अदालती तारीखों और लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद आए इस फैसले के मद्देनजर न्यायालय परिसर में पूरे दिन गहमागहमी और सुरक्षा बलों की हलचल बनी रही।
पंचमुखी मंदिर विवाद में ली गई थी अधिवक्ता और उनकी बहन की जान
यह दर्दनाक मामला मोहल्ला नारायणपुर स्थित प्रसिद्ध पंचमुखी मंदिर के आधिपत्य और वर्चस्व की लड़ाई से जुड़ा हुआ है। वादी आशीष कुमार द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी के अनुसार, मंदिर पर अवैध कब्जे को लेकर दोनों पक्षों के बीच विवाद गहरा गया था। 15 मार्च 2020 को इसी रंजिश के तहत आरोपियों ने ताबड़तोड़ गोलीबारी कर आशीष के भाई मंजुल चौबे (जो पेशे से अधिवक्ता थे) और उनकी बहन सुधा की निर्मम हत्या कर दी थी। घटना के बाद औरैया कोतवाली में पूर्व एमएलसी कमलेश पाठक, उनके भाइयों संतोष पाठक व रामू पाठक सहित कुल आठ नामजद और तीन अज्ञात के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमले व आर्म्स एक्ट की गंभीर धाराओं में मामला पंजीकृत किया गया था।
कड़ी पैरवी से मुकाम तक पहुंची कानूनी जंग
घटना के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। विवेचना अधिकारी ने मजबूत साक्ष्य जुटाकर समय सीमा के भीतर अदालत में विस्तृत आरोप पत्र दाखिल किया। केस की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस मॉनीटरिंग टीम, पैरोकार हेड कांस्टेबल विनय कुमार और अभियोजन अधिकारी चंद्रभूषण तिवारी की टीम ने लगातार प्रभावी पैरवी की। अभियोजन पक्ष ने निर्धारित तिथियों पर गवाहों को अदालत में पेश कर जुर्म साबित किया। अदालत ने सुनवाई पूरी करते हुए कमलेश पाठक, संतोष पाठक, रामू पाठक, कुलदीप अवस्थी उर्फ पप्पू, विकल्प अवस्थी उर्फ चैनू, राजेश शुक्ला, अवनीश प्रताप सिंह, आशीष दुबे, शिवम अवस्थी और रविंद्र उर्फ लला चौबे को दोषी करार दिया।
कड़े पुलिस पहरे में जेल भेजे गए सभी दोषी
लंच के उपरांत अदालत ने सजा के बिंदु पर अंतिम फैसला सुनाया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए कचहरी परिसर और आसपास के इलाकों को छावनी में तब्दील कर दिया गया था। पीएसी और भारी पुलिस बल की तैनाती के बीच जैसे ही कोर्ट ने उम्रकैद का फरमान सुनाया, सुरक्षाकर्मियों ने सभी 10 दोषियों को हिरासत में लेकर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच जिला जेल भेज दिया। फैसले के बाद पीड़ित वादी आशीष कुमार ने भावुक होते हुए अदालत के इस निर्णय का स्वागत किया और इसे सत्य एवं न्याय की जीत करार दिया।











