
अयोध्या (ब्यूरो)। उत्तर प्रदेश की धार्मिक नगरी अयोध्या में 14 कोसी परिक्रमा मार्ग को फोरलेन बनाने और चौड़ीकरण के अभियान के तहत जिला प्रशासन ने रविवार को बड़ी कार्रवाई की। जनौरा नाका क्षेत्र में नाका हनुमानगढ़ी के सामने मार्ग के दायरे में आ रहे नजूल की जमीन पर बने तीन बड़े भवनों पर प्रशासन का बुलडोजर चला। ध्वस्तीकरण की इस कार्रवाई के दौरान पूरे इलाके में अफरा-तफरी का माहौल रहा और स्थानीय लोगों ने इस पर कड़ा विरोध जताया।
कार्रवाई के दौरान किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए क्षेत्र की बिजली आपूर्ति पूरी तरह बंद कर दी गई थी और भारी संख्या में पीएसी (PAC) तथा पुलिस बल की तैनाती की गई थी।
हाईकोर्ट के दिशा-निर्देशों के बाद लिया गया एक्शन
प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के विस्तार को अंतिम रूप देने के लिए यह कार्रवाई बेहद जरूरी थी। यह विवाद काफी दिनों से लंबित चल रहा था।
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मुआवजे का भुगतान: जिला प्रशासन का दावा है कि ध्वस्त किए गए भवनों के भूस्वामियों को पूर्व में ही मुआवजे का भुगतान कर दिया गया था।
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हाईकोर्ट की शरण: मुआवजे के बाद कुछ प्रभावित लोग मामले को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट गए थे। प्रशासन का कहना है कि उन्होंने हाईकोर्ट के स्पष्ट दिशा-निर्देशों का अनुपालन करते हुए ही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की है।
मौके पर मौजूद रहे आला अधिकारी
ध्वस्तीकरण के दौरान एडीएम (वित्त एवं राजस्व) अमित भट्ट, एसडीएम, सीओ सिटी श्रीयश त्रिपाठी समेत कई उच्च प्रशासनिक व पुलिस अधिकारी भारी फोर्स के साथ मौके पर डटे रहे। अधिकारियों ने स्थिति को नियंत्रित करते हुए चिन्हित अवैध निर्माणों को पूरी तरह ध्वस्त करा दिया।
प्रशासन के अनुसार, इस कार्रवाई के साथ ही 14 कोसी परिक्रमा मार्ग के चौड़ीकरण के काम को गति मिलेगी, जिससे आने वाले समय में श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगम व सुरक्षित यातायात की सुविधा मिल सकेगी।











