US H-1B Visa Restrictions: अमेरिका में H-1B वीजा की सख्ती से भारतीय प्रतिभाओं का मोहभंग, जर्मनी-ब्रिटेन बने पहली पसंद; देखें रिपोर्ट

US H-1B Visa Impact: अमेरिका में H-1B वीजा नियमों में लगातार हो रहे बदलावों और बढ़ती सख्ती ने भारतीय पेशेवरों और शोधकर्ताओं के सामने बड़ा संकट खड़ा कर दिया है। बीते एक साल में वीजा फीस में बढ़ोतरी और प्रशासनिक अनिश्चितता के कारण अब भारतीय प्रोफेशन्स अमेरिका को छोड़कर जर्मनी, ब्रिटेन जैसे देशों का रुख कर रहे हैं। वहीं, कई विशेषज्ञों ने अपने वतन भारत लौटने का मन भी बना लिया है।

तीन दशक का रिकॉर्ड टूटा: 29% स्कॉलर्स ने छोड़ा अमेरिका

‘अमेरिकन इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिक्स’ के हालिया आंकड़े अमेरिका के प्रति घटते रुझान की स्पष्ट तस्वीर पेश करते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, भौतिकी (Physics) में पीएचडी करने वाले विदेशी स्कॉलर्स के अमेरिका छोड़ने की दर 2023-24 में 16% थी, जो 2024-25 में बढ़कर 29% हो गई। बीते 30 वर्षों (तीन दशक) में एक ही साल के भीतर यह सबसे बड़ा उछाल है।

इसके अलावा, अमेरिका के लगभग 60% विश्वविद्यालयों में विदेशी छात्रों के आवेदनों में बड़ी गिरावट दर्ज की गई है। मौजूदा वित्त वर्ष के शुरुआती नौ महीनों के आंकड़ों को देखें तो वीजा आवेदनों में 10% की भारी कमी आई है।

सपनों के देश से पलायन का दर्द: पढ़ें प्रभावित भारतीयों की दास्तान

अमेरिकी मीडिया संस्थान बिजनेस इनसाइडर की एक पड़ताल से साफ हुआ है कि कभी सपनों का देश कहे जाने वाले अमेरिका से अब पलायन करना कई भारतीयों की नियति बन चुका है।

  • अन्या जोशी (वैज्ञानिक): शिकागो में कार्यरत वैज्ञानिक अनन्या जोशी को जब उनकी कंपनी ने H-1B स्पॉन्सरशिप देने से मना कर दिया, तो उन्हें मजबूरी में जर्मनी शिफ्ट होना पड़ा।

  • सुंजना रमना (इंजीनियर): कोलंबिया यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में मास्टर्स कर चुकीं सुंजना रमना ने H-1B वीजा पाने के लिए तीन बार प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। आखिरकार उन्होंने ब्रिटेन का ‘हाई-पोटेंशियल वीजा’ हासिल किया और अब लंदन की एक फिनटेक कंपनी में काम कर रही हैं। सुंजना का कहना है— “अपने सपनों को किसी एक देश से नहीं, बल्कि अपनी क्षमताओं और लक्ष्यों से जोड़ना चाहिए।”

H-1B वीजा में भारतीयों का दबदबा (आंकड़े)

अमेरिका के साइंस और इंजीनियरिंग कार्यबल में विदेशी मूल के विशेषज्ञों का बहुत बड़ा योगदान है। ‘नेशनल साइंस फाउंडेशन’ के अनुसार, अमेरिका के इस सेक्टर में 22% कार्यबल विदेशी मूल का है। इनमें मास्टर्स डिग्री धारकों में 39% और पीएचडी धारकों में 46% वैज्ञानिक विदेशी हैं।

H-1B वीजा लाभार्थियों में देशों की हिस्सेदारी:

  • भारत: 69.9% (2,83,772 लाभार्थी)

  • चीन: 12.1% (49,161 लाभार्थी)

  • अन्य देश: 18.0%

क्षेत्रवार H-1B आवेदन: Professional & Technical Services से 44.5%, Manufacturing से 12.1%, IT Sector से 9.9%, और Finance से 9.0% आवेदन आते हैं।

$100,000 शुल्क से मची अफरातफरी, अनिश्चितता बरकार

ट्रंप प्रशासन ने पिछले साल 20 सितंबर को H-1B वीजा की फीस बढ़ाकर 1 लाख डॉलर ($1,00,000) करने का फैसला सुनाया था। इस घोषणा के तुरंत बाद कंपनियों और कर्मचारियों में नौकरी व ट्रैवल को लेकर भारी असमंजस पैदा हो गया। हालाँकि, बाद में कानूनी प्रक्रिया के तहत इस बढ़ी हुई फीस पर रोक लग गई थी, लेकिन सितंबर 2026 में प्रशासन द्वारा इस नीति को एक साल के लिए और आगे बढ़ा दिया गया है।

‘माइग्रेशन पॉलिसी इंस्टीट्यूट’ का मानना है कि पिछले 20 वर्षों में विदेशी प्रतिभाओं का ऐसा पलायन कभी नहीं देखा गया। शोधकर्ताओं को अमेरिका से जोड़ने वाली जो पाइपलाइन थी, वह अब धीरे-धीरे कमजोर हो रही है।

स्वदेश लौटेगी प्रतिभा, भारत के स्टार्टअप व IT सेक्टर को मिलेगा फायदा

अमेरिका में बढ़ते इस अनिश्चितता के माहौल से भारत के लिए नए दरवाजे खुल रहे हैं। भारतीय मूल के वैज्ञानिक, इंजीनियर और टेक एक्सपर्ट्स अब स्वदेश वापसी को प्राथमिकता दे रहे हैं। भारत में तेजी से उभरते स्टार्टअप्स, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), आईटी और रिसर्च सेक्टर में इन वैश्विक प्रतिभाओं के जुड़ने से देश के तकनीकी और आर्थिक विकास को नई रफ्तार मिलने की उम्मीद है।

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha