India UNSC Permanent Membership: संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में स्थायी सदस्यता और वीटो पावर (Veto Power) पाने के लिए भारत लंबे समय से अपनी मजबूत दावेदारी पेश कर रहा है। हालांकि चीन के अड़ंगों और राजनीतिक रुख के कारण यह प्रक्रिया अब तक अटकी हुई है। इसके बावजूद, वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती ताकत और प्रभाव को देखते हुए अब कई प्रमुख यूरोपीय देशों ने भारत के समर्थन में अपनी आवाज बुलंद की है। हाल ही में यूरोप के चार प्रमुख देशों—स्लोवाकिया, पोलैंड, हंगरी और चेक रिपब्लिक—ने भारत को सुरक्षा परिषद में स्थायी सीट दिए जाने का जोरदार समर्थन किया है।
Visegrad 4 देशों ने बताया ‘इंडो-पैसिफिक की सुपरपावर’
इन चारों देशों के समूह जिसे ‘Visegrad 4’ (V4) कहा जाता है, की ओर से स्लोवाकिया के विदेश मंत्री जुराज ब्लानर ने बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि V4 ग्रुप के सभी सदस्य देश इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की महाशक्ति भारत का समर्थन करते हैं और भारत को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता दी जानी चाहिए।
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने V4 देशों के इस ऐतिहासिक समर्थन का स्वागत करते हुए कहा कि ये देश रक्षा और कूटनीतिक क्षेत्रों में लंबे समय से भारत के भरोसेमंद साझेदार रहे हैं। उन्होंने आगे कहा कि भारत अब इन देशों के साथ मिलकर अपने द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को एक नई दिशा देने पर गंभीरता से विचार कर रहा है।
1994 से दावेदारी: 8 बार अस्थायी सदस्य रह चुका है भारत
भारत पिछले 30 से अधिक वर्षों से यूएनएससी में स्थायी सदस्यता की वकालत कर रहा है। भारत ने सबसे पहले 1994 में 49वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा के दौरान स्थायी सीट की आधिकारिक मांग की थी। इसके बाद वर्ष 2000 में न्यूयॉर्क में आयोजित संयुक्त राष्ट्र शिखर सम्मेलन के दौरान तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने स्थायी सदस्यता के लिए भारत का दावा बेहद मजबूती से पेश किया था।
आपको बता दें कि भारत अब तक 8 बार यूएनएससी का अस्थायी सदस्य रह चुका है। वर्तमान में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में 5 स्थायी सदस्य (अमेरिका, रूस, चीन, फ्रांस और ब्रिटेन) हैं, जिनके पास वीटो पावर है। इसके अलावा 10 अस्थायी सदस्य होते हैं, जिन्हें दो-दो साल के कार्यकाल के लिए समय-समय पर चुना जाता है।
1965 के बाद नहीं हुआ बदलाव, निष्पक्षता पर उठे सवाल
संयुक्त राष्ट्र संघ (UN) की स्थापना वर्ष 1945 में हुई थी और इसके बाद से अब तक सुरक्षा परिषद में केवल एक बार (1965 में) विस्तार किया गया है। 1965 में यूएन चार्टर में संशोधन करके 4 गैर-स्थायी सीटें बढ़ाई गई थीं, जिससे कुल सदस्यों की संख्या 11 से बढ़कर 15 हो गई थी। हालांकि, 5 स्थायी सदस्यों की स्थिति में कोई बदलाव नहीं किया गया।
भारत का स्पष्ट मानना है कि बीते छह दशकों में दुनिया का भू-राजनीतिक परिदृश्य पूरी तरह बदल चुका है। वर्तमान वैश्विक चुनौतियों से निपटने में यूएनएससी अपनी प्रासंगिकता और निष्पक्षता खो रहा है। भारत ने हमेशा से दुनिया भर में संयुक्त राष्ट्र के शांति अभियानों में सबसे बड़ा योगदान दिया है और आज वह ‘ग्लोबल साउथ’ (Global South) की सबसे बुलंद आवाज बनकर उभरा है। ऐसे में यूएनएससी के दकियानूसी ढांचे में सुधार और भारत को स्थायी सदस्यता देना समय की मांग बन चुका है।















