किचन में प्याज ने निकाले आम आदमी के आंसू: एक साल में दोगुनी हुईं कीमतें, जानें कब मिलेगी राहत

भारतीय रसोइयों का बजट एक बार फिर गड़बड़ा गया है। पिछले एक साल की तुलना में प्याज की खुदरा कीमतें लगभग दोगुनी से अधिक हो चुकी हैं। यह खुलासा उपभोक्ता मामलों के मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों से हुआ है। थोक और खुदरा दोनों ही बाजारों में प्याज के तेवर तीखे बने हुए हैं। थोक बाजार की बात करें तो 21 सितंबर 2026 को प्याज 4615.98 रुपये प्रति क्विंटल के स्तर पर पहुंच गया, जो ठीक एक साल पहले 3299.85 रुपये प्रति क्विंटल था। थोक बाजार में प्याज की कीमतों में करीब 135 प्रतिशत तक का उछाल दर्ज किया गया है।

प्याज की कीमतें लगभग 10 महीनों तक शांत रहने के बाद पिछले दो महीनों से अचानक तेजी से बढ़ी हैं। आंकड़ों के मुताबिक, एक महीने पहले देशभर में प्याज की औसत कीमत 40.79 रुपये प्रति किलो थी, जो 21 सितंबर 2026 को बढ़कर 54.23 रुपये प्रति किलो हो गई। देश के प्रमुख महानगरों में कीमतें तेजी से उछली हैं:

  • दिल्ली: 32 रुपये से बढ़कर 53 रुपये/किलो

  • मुंबई: 30 रुपये से बढ़कर 58 रुपये/किलो

  • चेन्नई: 30 रुपये से बढ़कर 60 रुपये/किलो

  • रांची: 25 रुपये से बढ़कर 57 रुपये/किलो

क्यों बढ़े प्याज के दाम?

प्याज के दाम में आई इस हालिया तेजी के पीछे प्रमुख मौसमी और आपूर्ति से जुड़े कारण हैं:

  • बेमौसम बारिश से नुकसान: देश के सबसे बड़े प्याज उत्पादक राज्य महाराष्ट्र में मार्च के दौरान हुई बेमौसम बारिश से रबी फसल को भारी नुकसान पहुंचा।

  • स्टॉक की बर्बादी: केंद्रीय एजेंसियों और व्यापारियों के बफर स्टॉक में रखा लगभग 30% प्याज नमी और गर्मी के कारण खराब हो गया।

  • अंतरराष्ट्रीय बाजार का असर: बांग्लादेश में प्याज का घरेलू उत्पादन बढ़ने से भारतीय प्याज की वैश्विक मांग प्रभावित हुई है और प्रतिस्पर्धा कठिन हो गई है।

कब तक घटेंगे दाम और मिलेगी राहत?

राहत की बात यह है कि पिछले एक सप्ताह से प्याज के भाव में स्थिरता आई है और आगे बहुत बड़ी तेजी की संभावना कम जताई जा रही है।

वर्तमान में बाजार में प्रीमियम क्वालिटी वाले प्याज की मुख्य मांग बीज कंपनियों (Seed Companies) की ओर से बनी हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि बीज कंपनियों की यह मौसमी खरीदारी पूरी होते ही प्याज के खुदरा दामों में 5 से 10 रुपये प्रति किलो तक की गिरावट आ सकती है। इसके अलावा, खरीफ (Kharif) सीजन की नई फसल की आवक मंडियों में शुरू होने के बाद आपूर्ति स्थिति बेहतर होगी, जिससे ग्राहकों को महंगाई से बड़ी राहत मिलेगी।

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