
आजमगढ़। उत्तर प्रदेश के आजमगढ़ जिले के अहरौला थाना क्षेत्र अंतर्गत शंभूपुर गहजी गांव में मंगलवार शाम शुरू हुआ खूनी तांडव 7 घंटे तक चले हाई-वोल्टेज ऑपरेशन के बाद खत्म हो गया। सिरफिरे अरविंद सिंह (40) ने अपनी सनक में पूरे परिवार को तबाह कर दिया। इस दिल दहला देने वाली वारदात में कुल 5 लोगों की जान चली गई। घटना के बाद बदनसीबी ऐसी रही कि पति, पत्नी और मासूम बेटे के अंतिम संस्कार के लिए न तो ससुराल पक्ष से कोई आगे आया और न ही परिवार से।
आक्रोशित ग्रामीणों ने तीनों शवों को गांव में घुसने तक नहीं दिया और सीमा से ही शव वाहनों को वापस लौटा दिया। इसके बाद ‘भारत रक्षा दल’ नामक एक सामाजिक संगठन ने आगे बढ़कर अरविंद, उसकी पत्नी बबीता और बेटे शौर्य का एक ही चिता पर अंतिम संस्कार कराया।
पूजा-पाठ और अंधविश्वास के विवाद में तीन को मारी गोली
मिली जानकारी के अनुसार, अरविंद सिंह मंगलवार शाम करीब 6 बजे जब बाजार से लौटा, तो घर में अनुष्ठान चल रहा था। दरअसल, वर्ष 2018 में अरविंद के भाई की हत्या हो गई थी, जिसके बाद से परिवार में ‘भूत-प्रेत के साए’ की बात कहकर पूजा-पाठ कराई जा रही थी। अरविंद इस अनुष्ठान का लगातार विरोध कर रहा था, जबकि उसकी मां और पत्नी बबीता इसे जरूरी मान रही थीं।
घर पहुंचते ही अरविंद का पूजा करा रहे पुजारियों से तीखा विवाद शुरू हो गया। देखते ही देखते बहस इतनी बढ़ी कि अरविंद ने अपनी रिवॉल्वर निकालकर अंधाधुंध फायरिंग कर दी। गोली लगने से उसकी पत्नी बबीता सिंह (40) और दो पुजारियों—महेंद्र पाठक (60) व अखिलेश मिश्रा (55) की मौके पर ही मौत हो गई।
मासूम बच्चों को बंधक बना कमरे में छिपा, 7 घंटे चला ATS ऑपरेशन
त्रिबल मर्डर को अंजाम देने के बाद अरविंद अपने तीन मासूम बच्चों को लेकर कमरे में बंद हो गया। सूचना मिलते ही पुलिस बल ने पूरे गांव को छावनी में तब्दील कर दिया। लाउडस्पीकर के जरिए लगातार सरेंडर करने की अपील की जाती रही, लेकिन वह बाहर नहीं आया। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस ने एटीएस (ATS) कमांडोज को मोर्चे पर लगाया।
लगभग 7 घंटे बाद जब कमरे के भीतर से गोली चलने की आवाज आई, तब एटीएस कमांडोज ने स्टन और टीयर गैस ग्रेनेड का इस्तेमाल कर धावा बोला। पुलिस से खुद को घिरता देख अरविंद ने अपने बेटे शौर्य को गोली मार दी। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 6 राउंड फायरिंग के दौरान अरविंद गंभीर रूप से घायल हो गया। अस्पताल ले जाते समय रास्ते में बेटे शौर्य की मौत हो गई, जबकि इलाज के दौरान आरोपी अरविंद ने भी दम तोड़ दिया।
मायके पक्ष के गंभीर आरोप और अंधविश्वास का एंगल
घटना के बाद मृतका बबीता की मां ने अरविंद के परिवार पर बेहद गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि बबीता के चरित्र पर लगाए जा रहे आरोप सरासर झूठे हैं। बबीता की मां का दावा है कि अरविंद के भाई की मौत के बाद परिवार में यह हवा फैला दी गई थी कि उस पर मृत भाई की आत्मा आती है। इसी अंधविश्वास और प्रेत बाधा को दूर करने के नाम पर जबरन अनुष्ठान कराया जा रहा था, जिसने अंततः इस पूरे परिवार को लील लिया।
घर में बचीं सिर्फ 2 मासूम बच्चियां और 70 साल की बूढ़ी मां
इस खौफनाक वारदात के बाद अरविंद के परिवार में अब सिर्फ 5 साल की मासूम परी, 7 महीने की दूधमुंही बच्ची और 70 वर्षीय बुजुर्ग मां बची हैं। पूरी तरह बेसहारा हो चुकीं इन दोनों बच्चियों की जिम्मेदारी अब बूढ़ी दादी के कंधों पर आ टिकी है। मां को खो चुकी 5 साल की परी लगातार बिलख रही है, वहीं 7 महीने की मासूम को तो यह भी अहसास नहीं है कि उसकी दुनिया उजड़ चुकी है।











