
ग्रेटर नोएडा। दिल्ली-एनसीआर से सटे ग्रेटर नोएडा में यमुना एक्सप्रेसवे पर एक अत्यंत दर्दनाक हादसा सामने आया है। नोएडा से लगभग 35 यात्रियों को लेकर महोबा जा रही एक प्राइवेट डबल डेकर स्लीपर एसी बस में अचानक भीषण आग लग गई। इस खौफनाक हादसे में 9 यात्रियों की जिंदा जलने और दम घुटने से दर्दनाक मौत हो गई, जबकि कई लोग गंभीर रूप से झुलस गए हैं।
दयानतपुर गांव के पास हुआ हादसा, धू-धू कर जली बस
यह भयावह दुर्घटना यमुना एक्सप्रेसवे पर ग्रेटर नोएडा से आगरा की ओर जाते समय दयानतपुर गांव के पास हुई। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब बस दयानतपुर गांव के पास से गुजर रही थी, तभी अचानक उसमें से घना धुआं और तेज लपटें उठने लगीं।
चालक ने सूझबूझ का परिचय देते हुए बस को तुरंत एक्सप्रेसवे के किनारे रोक दिया। हालांकि, देखते ही देखते पूरी बस आग के गोले में तब्दील हो गई। जब तक यात्री कुछ समझ पाते, बस के भीतर दमघोंटू काला धुआं भर गया और चीख-पुकार मच गई।
“चारों तरफ धुआं था, जूते तक छोड़ने पड़े”: चश्मदीद का खौफनाक बयान
हादसे में बाल-बाल बचे एक यात्री ने उस खौफनाक मंजर को याद करते हुए बताया, “मैं सो रहा था, तभी किसी के चिल्लाने और दरवाजा खटखटाने पर आंख खुली। अंदर इतना धुआं था कि कुछ दिखाई नहीं दे रहा था। मैंने अपना सामान और जूते तक छोड़ दिए, केवल मोबाइल हाथ में लेकर बाहर की तरफ भागा। जो लोग पीछे फंसे रह गए, वे बाहर नहीं निकल सके और अंदर ही तड़पने लगे।”
शॉर्ट सर्किट मानी जा रही वजह, राहत कार्य जारी
हादसे की सूचना मिलते ही यमुना एक्सप्रेसवे के सुरक्षाकर्मी, फायर ब्रिगेड की कई गाड़ियां और स्थानीय पुलिस बल तुरंत मौके पर पहुंचे। कड़ी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया और घायलों को तुरंत पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया। शुरुआती जांच में आग लगने की मुख्य वजह शॉर्ट सर्किट मानी जा रही है, हालांकि पुलिस मामले की विस्तृत जांच में जुटी है।
CM योगी आदित्यनाथ ने लिया संज्ञान, दिए त्वरित इलाज के निर्देश
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस दुखद हादसे पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री कार्यालय (CMO) के अनुसार, सीएम योगी ने मृतकों के परिजनों के प्रति अपनी संवेदना प्रकट की है। उन्होंने जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को मौके पर पहुंचकर राहत और बचाव कार्य में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं।
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट आदेश दिए हैं कि सभी घायलों को सर्वोत्तम इलाज मुहैया कराया जाए और पीड़ितों के परिवारों को हर संभव प्रशासनिक सहायता तत्काल प्रदान की जाए।












