2,000 से अधिक के UPI लेनदेन पर MDR: ग्राहकों पर नहीं पड़ेगा एक भी रुपये का बोझ, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी बड़ी राहत

नई दिल्ली। देश में 2,000 रुपये से अधिक के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) लेनदेन पर लगने वाले मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) को लेकर चल रही तमाम अटकलों और चिंताओं पर विराम लगाते हुए केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है। वित्त मंत्री ने साफ किया है कि इस शुल्क का भुगतान आम ग्राहकों को नहीं करना होगा, बल्कि यह खर्च व्यापारी या दुकानदार वहन करेंगे। वित्त मंत्री के इस बयान के बाद डिजिटल पेमेंट करने वाले करोड़ों देशवासियों को बड़ी राहत मिली है।

MDR कोई टैक्स या सेस नहीं, व्यापारी ही उठाएंगे पूरा खर्च

देश भर में फैली भ्रम की स्थिति को दूर करते हुए वित्त मंत्री ने स्पष्ट किया कि एमडीआर कोई सरकारी टैक्स, सेस या सरचार्ज नहीं है, बल्कि यह एक प्रोसेसिंग शुल्क है जो सीधे सरकार के खाते में नहीं जाता। उन्होंने उपभोक्ताओं को आश्वस्त करते हुए कहा कि उन्हें इस बदलाव से जरा भी चिंतित होने की आवश्यकता नहीं है। जिस तरह क्रेडिट कार्ड से स्वाइप करने पर लगने वाले एमडीआर शुल्क का भुगतान ग्राहक नहीं बल्कि व्यापारी करते हैं, ठीक उसी व्यवस्था के तहत यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाला एमडीआर भी केवल व्यापारियों द्वारा ही दिया जाएगा।

15 अक्टूबर से लागू होंगे नए नियम: अधिकतम सीमा 300 रुपये तय

नए डिजिटल पेमेंट फ्रेमवर्क के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 से पर्सन-टू-मर्चेंट (P2M) यानी किसी दुकान या कारोबारी को 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई भुगतान पर 0.40 प्रतिशत तक का एमडीआर लागू होगा। हालांकि, राहत की बात यह है कि केंद्र सरकार ने एमडीआर की अधिकतम कैपिंग सीमा 300 रुपये निर्धारित कर दी है, यानी किसी भी बड़े ट्रांजैक्शन पर 300 रुपये से अधिक का एमडीआर नहीं वसूला जा सकेगा। इसके अलावा, एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति (P2P) को किया जाने वाला आम यूपीआई ट्रांसफर पूरी तरह से मुफ़्त रहेगा और उस पर कोई शुल्क नहीं लगेगा।

7 अक्टूबर को जीएसटी काउंसिल बैठक: एमडीआर पर 18% GST पर हो सकता है फैसला

सरकारी सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, 2,000 रुपये से अधिक के यूपीआई ट्रांजैक्शन पर लगने वाले एमडीआर पर जीएसटी लगाने के प्रस्ताव पर जीएसटी परिषद (GST Council) विचार करेगी। केंद्रीय वित्त मंत्री की अध्यक्षता में 7 अक्टूबर को प्रस्तावित इस बैठक में ग्राहकों के व्यापक हितों का ध्यान रखते हुए एमडीआर पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगाने के बिंदु पर चर्चा हो सकती है। टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि यदि एमडीआर पर जीएसटी लागू किया जाता है, तो कारोबारी उस पर चुकाए गए टैक्स का इनपुट टैक्स क्रेडिट (ITC) क्लेम कर सकेंगे, जिससे व्यापारियों पर भी इसका वित्तीय बोझ कम होगा।

 

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