
संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) के 81वें सत्र में भारत के विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को वैश्विक मंच पर करारा जवाब दिया। न्यूयॉर्क में उच्च-स्तरीय आम बहस को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री ने भारत की ‘जीरो-टॉलरेंस’ नीति को दोहराया और स्पष्ट किया कि आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले देश अब इसे सामान्य बताकर इसके नतीजों से नहीं बच सकते। उन्होंने पाकिस्तान का नाम लिए बिना कहा कि इस सभा के सामने तथ्यों को गलत तरीके से पेश किया गया है, लेकिन दोस्ती और सद्भावना कभी भी आतंकवाद के साथ नहीं चल सकतीं।
आतंकवाद पर जीरो-टॉलरेंस नीति, भारत इस्तेमाल करता रहेगा अपना अधिकार
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने दुनिया के नेताओं को संबोधित करते हुए कहा कि आतंकवाद शांति के लिए सबसे बड़ा खतरा बना हुआ है। भारत आतंकवाद के खिलाफ अपना बचाव (Self Defense) करने के अपने अधिकार का इस्तेमाल आगे भी करता रहेगा। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि आतंकवाद फैलाने वाली सरकारों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए और इसके वित्तीय नेटवर्क (Financial Aspects) को उजागर कर उस पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। विदेश मंत्री ने साफ शब्दों में कहा कि आतंकवाद फैलाने वाले देश को ही अपना रवैया बदलना होगा, वरना ऐसी सोच पर आधारित समझौतों पर सवाल उठते रहेंगे।
शहबाज शरीफ का झूठा नैरेटिव और कश्मीर का राग
दरअसल, जयशंकर का यह कड़ा रुख पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के उस बयान के जवाब में आया है, जिसमें उन्होंने UNGA के मंच से भारत के साथ 2025 के संघर्ष का जिक्र करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तारीफ की थी। शरीफ ने अपने 23 मिनट के भाषण में पारंपरिक रूप से कश्मीर मुद्दा उठाने की कोशिश की थी। जयशंकर ने पाकिस्तान की इन दलीलों को खारिज करते हुए दुनिया को संदेश दिया कि आतंकवाद को जायज ठहराने की कोई भी कोशिश अब टिकने वाली नहीं है।
मिडिल ईस्ट में शांति के लिए ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ की वकालत
पश्चिम एशिया (Middle East) में जारी हिंसा और तनाव पर गहरी चिंता व्यक्त करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि क्षेत्र में स्थायी शांति केवल ‘टू-स्टेट सॉल्यूशन’ (Two-State Solution) के जरिए ही संभव है। भारत इस दिशा में हर संभव मदद देने के लिए तैयार है और लगातार फिलिस्तीनी लोगों के लिए मानवीय राहत सामग्री पहुंचा रहा है। उन्होंने कहा कि शांति का मतलब सिर्फ युद्ध का न होना नहीं है, बल्कि दुनिया में स्थिरता और सुरक्षा का माहौल बनाना भी बेहद जरूरी है।
यूक्रेन युद्ध पर जयशंकर का संदेश: ‘यह अंतहीन युद्ध का समय नहीं, शांति बहाल करने का समय’
यूक्रेन संघर्ष का जिक्र करते हुए विदेश मंत्री ने कहा कि यह युद्ध अब अपने पांचवें साल में प्रवेश कर चुका है, जो पूरे विश्व के लिए चिंता का विषय है। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के संदेश को दोहराते हुए कहा कि अब अंतहीन युद्ध की जगह शांति की ठोस पहल होनी चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने वैश्विक खाद्य, अनाज, ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री जहाजों के सुरक्षित आवागमन को सुनिश्चित करने पर तुरंत ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया।















