नई दिल्ली। अगर आपको इस सप्ताह बैंक से जुड़ा कोई भी जरूरी काम निपटाना है, तो आपके लिए राहत भरी खबर है। देश भर में 28, 29 और 30 सितंबर को होने वाली तीन दिवसीय राष्ट्रव्यापी बैंक हड़ताल फिलहाल टल गई है। रविवार देर रात इंडियन बैंक एसोसिएशन (IBA) और यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस (UFBU) के बीच हुई मैराथन बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इस समझौते से छमाही क्लोजिंग (Half-yearly closing) के समय पर वित्तीय कामकाज ठप होने से बच गया है।
आइए 7 आसान सवाल-जवाब के जरिए समझते हैं कि आखिर हड़ताल का फैसला क्यों टला और बैंक कर्मचारियों की मुख्य मांगें क्या हैं:
1. देर रात की मीटिंग में क्या फैसला हुआ?
रविवार रात करीब 9:30 बजे IBA (बैंक प्रबंधन का प्रतिनिधि) और UFBU (बैंक यूनियनों का संयुक्त मंच) के बीच उच्चस्तरीय बैठक हुई। मीटिंग में तय हुआ कि कर्मचारियों की लंबित मांगों पर विचार करने के लिए एक हाई लेवल कमेटी बनाई जाएगी। प्रबंधन से लिखित आश्वासन मिलने के बाद यूनियनों ने 28 से 30 सितंबर तक प्रस्तावित हड़ताल को स्थगित करने की घोषणा कर दी।
2. 5-डे वर्किंग (5-Day Work Week) पर क्या अपडेट है?
बैंक कर्मचारियों की सबसे पुरानी मांग हर शनिवार को छुट्टी (हफ्ते में 5 दिन काम) की है। वर्तमान में केवल दूसरे और चौथे शनिवार को अवकाश रहता है। यह मांग मार्च 2024 के वेतन समझौते का हिस्सा थी, लेकिन फाइल लंबे समय से अटकी थी। अब नई कमेटी सभी पक्षों से बात करके ऐसा समाधान तलाशेगी जिससे ग्राहकों और कर्मचारियों दोनों का अहित न हो।
3. बोनस (PLI) के नए नियम पर क्यों फंसा है पेंच?
सरकार ने स्केल-4 और उससे ऊपर के वरिष्ठ अधिकारियों के लिए परफॉर्मेंस लिंक्ड इंसेंटिव (PLI) का नया नियम बनाया है, जिसके तहत बेहतर प्रदर्शन पर 365 दिन की बेसिक सैलरी तक का बोनस मिल सकता है। यूनियनों का तर्क है कि यह नीति भेदभावपूर्ण है। बैठक में तय हुआ कि सरकार को कोई भी नया प्रस्ताव भेजने से पहले प्रबंधन यूनियनों के साथ चर्चा करेगा।
4. 10 साल बाद संडे को क्यों खोलने पड़े थे बैंक?
हड़ताल की आशंका को देखते हुए वित्त मंत्रालय के निर्देश पर रविवार (27 सितंबर) को देश भर में बैंक शाखाएं खोली गई थीं। इससे पहले साल 2016 में नोटबंदी के दौरान रविवार को बैंक खुले थे। मकसद यही था कि तीन दिनों की संभावित बंदी से पहले ग्राहक चेक क्लियरेंस और कैश जमा जैसे जरूरी काम निपटा सकें।
5. हड़ताल में कितनी यूनियनों की थी भागीदारी?
इस हड़ताल का आह्वान बैंकिंग सेक्टर की 7 बड़ी यूनियनों—AIBEA, AIBOC, NCBE, AIBOA, BEFI, INBEF और INBOC ने मिलकर किया था। देश के लगभग 90% से अधिक बैंक कर्मचारी इन संगठनों से जुड़े हैं, जिससे हड़ताल होने पर बैंकिंग व्यवस्था पूरी तरह ठप हो सकती थी।
6. हाफ ईयरली क्लोजिंग पर क्या असर पड़ेगा?
सितंबर का अंतिम सप्ताह बैंकों में छमाही क्लोजिंग (Half-yearly closing) का समय होता है। हड़ताल टलने से चेक क्लियरेंस, लोन डिस्बर्समेंट, ड्राफ्ट और सरकारी लेनदेन जैसे सभी वित्तीय कार्य बिना किसी बाधा के समय पर पूरे हो सकेंगे।
7. आम ग्राहकों के लिए अब क्या स्थिति है?
अब देश के सभी सरकारी और प्राइवेट बैंकों में कामकाज सोमवार से पूरी तरह सामान्य रहेगा। ग्राहक बिना किसी रुकावट के अपनी शाखाओं में जाकर बैंकिंग सेवाएं ले सकते हैं। अब सभी की नजरें 5-डे वर्किंग पर गठित होने वाली कमेटी की सिफारिशों पर टिकी हैं।
















