
वाशिंगटन/नई दिल्ली। अमेरिका में 1 अक्टूबर से नए वित्तीय वर्ष (FY 2027 Cap Year) की शुरुआत के साथ ही H-1B वर्क वीजा प्रोग्राम में बड़ा ऐतिहासिक बदलाव होने जा रहा है। अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) अब पहली बार ‘वेटेड सिलेक्शन सिस्टम’ (Weighted Selection System) लागू कर रही है। नए नियमों के तहत अब केवल किस्मत या लॉटरी में नाम आना ही काफी नहीं होगा, बल्कि विदेश से आने वाले वर्कर्स की ‘सैलरी’ और ‘स्किल लेवल’ यह तय करेगा कि उन्हें H-1B वीजा मिलेगा या नहीं। इस बदलाव का सीधा असर अमेरिका जाने का सपना देख रहे भारतीय आईटी पेशेवरों और कुशल कामगारों पर पड़ेगा।
क्या है नया H-1B ‘वेटेड सिलेक्शन’ लॉटरी सिस्टम?
नए नियम के तहत, अमेरिकी श्रम विभाग (US Department of Labor) के ‘ऑक्यूपेशनल एम्प्लॉयमेंट एंड वेज स्टैटिस्टिक्स’ (OEWS) वेज लेवल के आधार पर उम्मीदवारों की प्राथमिकता तय होगी। जिस वर्कर को जितना अधिक सैलरी पैकेज और वेज लेवल ऑफर किया जाएगा, लॉटरी के सेलेक्शन पूल में उसके चुने जाने की संभावना उतनी ही ज्यादा होगी।
फेडरल रजिस्टर के फाइनल नियमों के अनुसार, वेज लेवल के आधार पर लॉटरी पूल में एंट्री इस प्रकार मिलेगी:
-
वेज लेवल IV (उच्चतम सैलरी): सेलेक्शन पूल में 4 एंट्री (चुने जाने की अनुमानित संभावना ~61.16%)
-
वेज लेवल III: सेलेक्शन पूल में 3 एंट्री (चुने जाने की अनुमानित संभावना ~45.87%)
-
वेज लेवल II: सेलेक्शन पूल में 2 एंट्री (चुने जाने की अनुमानित संभावना ~30.58%)
-
वेज लेवल I (एंट्री लेवल/कम सैलरी): सेलेक्शन पूल में 1 एंट्री (चुने जाने की अनुमानित संभावना ~15.29%)
नोट: USCIS ने स्पष्ट किया है कि वेज लेवल I (कम सैलरी) वाले वर्कर भी प्रक्रिया से बाहर नहीं होंगे, लेकिन लेवल IV वाले उम्मीदवारों को उनकी तुलना में चार गुना अधिक एंट्री का लाभ मिलेगा। साथ ही, USCIS प्रति व्यक्ति केवल एक ही रजिस्ट्रेशन की गिनती करेगा, भले ही उसके लिए कितनी भी अर्जी क्यों न लगाई गई हों।
रजिस्ट्रेशन के दौरान सैलरी की सटीक जानकारी देना अनिवार्य
नए वेटेड सिस्टम में रजिस्ट्रेशन के समय दी गई सैलरी की जानकारी बेहद निर्णायक होगी।
-
दस्तावेजी सबूत देना होगा: यदि किसी वर्कर का रजिस्ट्रेशन लॉटरी में चुना जाता है, तो एम्प्लॉयर (कंपनी) को H-1B याचिका के साथ वह सबूत देना होगा जो रजिस्ट्रेशन के समय बताए गए वेज लेवल को साबित करता हो।
-
SOC कोड और डेटा मैचिंग: H-1B याचिका में दी गई जानकारी और रजिस्ट्रेशन के समय दिए गए SOC (Standard Occupational Classification) कोड व सैलरी डेटा में कोई अंतर नहीं होना चाहिए।
-
अंतर होने पर रिजेक्शन: यदि जानकारी में कोई अंतर पाया जाता है और कंपनी उसका सही कारण व ठोस दस्तावेज नहीं दे पाती है, तो USCIS याचिका को सीधे खारिज (Reject) कर देगा।
डुप्लीकेट पिटीशन फाइल करने पर कड़ा अलर्ट
USCIS ने कंपनियों को एक ही उम्मीदवार (Beneficiary) के लिए एक से अधिक या फर्जी डुप्लीकेट याचिकाएं दायर करने के खिलाफ सख्त चेतावनी जारी की है। एजेंसी के अनुसार, ऐसा करने पर याचिका तुरंत रद्द कर दी जाएगी और जमा की गई फाइलिंग फीस भी वापस नहीं की जाएगी।















