उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले INDIA गठबंधन के सीट बंटवारे को लेकर बयानबाजी का दौर तेज हो गया है। इसी कड़ी में भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के कद्दावर नेता और पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह का एक बड़ा बयान सामने आया है। उन्होंने अखिलेश यादव की अनुपस्थिति और कांग्रेस के दावों पर तंज कसते हुए कहा कि “अखिलेश के बिना सब सूना है।” उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दिल्ली में INDIA गठबंधन की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की जा रही है और सपा प्रमुख अखिलेश यादव इसमें शामिल नहीं हो रहे हैं।
150 सीटों के दावे पर बृजभूषण का करारा जवाब
दिल्ली में मीडिया से बातचीत के दौरान पत्रकारों ने बृजभूषण शरण सिंह से सवाल किया कि यूपी कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने 150 सीटों पर चुनाव लड़ने और गठबंधन में सम्मानजनक हिस्सेदारी का दावा किया है। इस पर बृजभूषण ने चुटकी लेते हुए पूछा, “कौन?” जब पत्रकारों ने दोबारा दोहराया कि कांग्रेस यूपी में 150 सीटों की मांग कर रही है, तो उन्होंने साफ लहजे में कहा कि अखिलेश के बिना कुछ भी संभव नहीं है। बता दें कि कांग्रेस का कहना है कि सीटों का मामला जल्द फाइनल हो जाएगा, लेकिन बृजभूषण के इस बयान ने विपक्षी खेमे में नई हलचल पैदा कर दी है।
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बृजभूषण और अखिलेश के बीच बढ़ती नजदीकी के क्या हैं मायने?
उत्तर प्रदेश के सियासी गलियारों में इन दिनों बृजभूषण शरण सिंह और अखिलेश यादव के बीच बढ़ती नजदीकी चर्चा का विषय बनी हुई है। बृजभूषण लगातार अखिलेश यादव की तारीफ कर रहे हैं। हाल ही में उन्होंने सपा प्रमुख को एक ‘धार्मिक व्यक्ति’ और ‘सच्चा हिंदू’ भी बताया था। जब अखिलेश यादव से बृजभूषण के सपा में शामिल होने की संभावनाओं पर सवाल पूछा गया, तो उन्होंने कोई सीधा जवाब न देते हुए कहा कि राजनीति में कब क्या मोड़ आए, यह वक्त ही तय करेगा।
“अखिलेश छोटे भाई जैसे, पर पाला बदलने का इरादा नहीं”
तमाम अटकलों और चर्चाओं के बावजूद बृजभूषण शरण सिंह ने स्पष्ट कर दिया है कि उनका बीजेपी छोड़ने या पाला बदलने का कोई इरादा नहीं है। उन्होंने कहा कि वे बीजेपी के ही समर्पित कार्यकर्ता हैं और अखिलेश उनके लिए छोटे भाई की तरह हैं। अच्छी राजनीतिक परंपरा के तहत वे उनकी सराहना करते हैं। गौरतलब है कि बृजभूषण शरण सिंह अतीत में सपा के टिकट पर भी चुनाव लड़कर सांसद रह चुके हैं और मुलायम सिंह यादव के परिवार से उनके रिश्ते काफी पुराने माने जाते हैं।
दबाव की राजनीति या पूर्वांचल में असंतोष की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पिछले लोकसभा चुनाव में टिकट न मिलने और पार्टी नेतृत्व से कथित मनमुटाव की खबरों के बीच बृजभूषण शरण सिंह का यह रुख बीजेपी हाईकमान पर दबाव बनाने की रणनीति हो सकता है। दूसरी तरफ, अखिलेश यादव भी इस मौके का इस्तेमाल पूर्वांचल और अवध क्षेत्र में बीजेपी के भीतर असंतोष को हवा देने के लिए कर रहे हैं। फिलहाल, बृजभूषण के इस तंज ने यूपी के चुनावी माहौल को और गरमा दिया है।
















