
अयोध्या स्थित श्रीराम जन्मभूमि मंदिर के चढ़ावा चोरी प्रकरण में पुलिस जांच पूरी होने और अदालत में आरोप पत्र (चार्जशीट) दाखिल होने के बाद श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के पूर्व महासचिव चंपत राय की भूमिका को लेकर राजनीतिक व प्रशासनिक गलियारों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, चंपत राय को अयोध्या से बाहर स्थानांतरित किए जाने की योजना को फिलहाल टाल दिया गया है। अब उत्तर प्रदेश में आगामी 2027 के विधानसभा चुनाव तक उनके अयोध्या में ही बने रहने की प्रबल संभावना जताई जा रही है।
चार्जशीट में आरोपी नहीं, गवाह बनाए गए चंपत राय
पुलिस द्वारा अदालत में दाखिल की गई चार्जशीट में चंपत राय का नाम आरोपियों की सूची में शामिल नहीं है। पुलिस ने उन्हें इस मामले में सरकारी गवाह के रूप में सूचीबद्ध किया है। इस कानूनी स्थिति के स्पष्ट होने के बाद चंपत राय की भूमिका आरोपी के रूप में न होकर एक मुख्य गवाह की है। आने वाले समय में अदालत में होने वाली न्यायिक सुनवाई और गवाही की प्रक्रिया के दौरान उनकी भूमिका का कानूनी पक्ष और अधिक स्पष्ट होगा।
जांच के दौरान बाहर भेजने की थी चर्चा, अब बदला फैसला
सूत्रों के मुताबिक, जब चढ़ावा चोरी प्रकरण की प्राथमिक जांच चल रही थी, तब चंपत राय को प्रक्रिया की निष्पक्षता बनाए रखने के लिए अयोध्या से बाहर किसी अन्य केंद्र पर भेजने पर विचार किया गया था। हालांकि, अब जांच मुकम्मल होने और कोर्ट में चार्जशीट दाखिल हो जाने के बाद इस फैसले को टाल दिया गया है। इसके पीछे अयोध्या की संवेदनशीलता, चंपत राय का राम मंदिर आंदोलन से दशक पुराना जुड़ाव और आगामी राजनीतिक समीकरणों को मुख्य वजह माना जा रहा है।
जनआक्रोश और विरोध की आशंका से लिया गया निर्णय
प्रकरण की जांच पूरी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर इसे लेकर कई तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं। रणनीतिकारों का मानना है कि ऐसे माहौल में चंपत राय को अचानक अयोध्या से बाहर भेजे जाने पर जनता में गलत संदेश जा सकता है और विरोध या आक्रोश की स्थिति पैदा हो सकती है। चंपत राय वर्ष 2020 में ट्रस्ट के गठन के बाद से ही महासचिव के पद पर रहते हुए मंदिर निर्माण की गतिविधियों के केंद्र में रहे हैं।
2027 चुनाव से पहले नए विवाद से बचने की रणनीति
वर्ष 2027 का उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव नजदीक होने के कारण राम मंदिर और उससे जुड़े मुद्दे राजनीतिक विमर्श का अहम हिस्सा बन चुके हैं। हाल ही में विश्व हिंदू परिषद (VHP) के अंतरराष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष आलोक कुमार ने भी कहा था कि विपक्षी दल चढ़ावा प्रकरण को चुनावी मुद्दा बनाने का प्रयास कर रहे हैं। ऐसे में चुनाव से ठीक पहले चंपत राय को अयोध्या से हटाने से राजनीतिक बयानबाजी और नए सवालों को हवा मिल सकती थी, जिससे बचने के लिए उन्हें अयोध्या में ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया है।












