उत्तर प्रदेश राज्यसभा चुनाव में बड़ा उलटफेर: सपा ने उद्योगपति धनराज नथवानी को मैदान में उतारकर चला ‘मास्टरस्ट्रोक’, बदला 10वीं सीट का पूरा समीकरण

उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10वीं सीट को लेकर सियासी हलचल चरम पर पहुंच गई है। समाजवादी पार्टी (सपा) द्वारा रिलायंस इंडस्ट्रीज के ग्रुप प्रेसिडेंट व प्रमुख उद्योगपति धनराज नथवानी के नाम की आहट से राज्यसभा चुनाव की पूरी बिसात बदलती दिखाई दे रही है। सपा इसे अपना सबसे बड़ा ‘मास्टरस्ट्रोक’ मानकर चल रही है, जिसने सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के सामने अपने 8वें प्रत्याशी को जिताने के लिए नई अंकगणितीय और रणनीतिक चुनौती खड़ी कर दी है। हालांकि, नथवानी के नाम की चर्चा शुरू होते ही सपा खुद भी अपने राजनीतिक विरोधियों और सहयोगियों के निशाने पर आ गई है।

तीसरे प्रत्याशी पर सपा का सस्पेंस, एनडीए खेमे में एकजुटता बनाए रखने की चुनौती

सपा ने अभी अपने तीसरे उम्मीदवार के नाम पर पूरी तरह पर्दा डाल रखा है, लेकिन पार्टी रणनीतिकारों का मानना है कि यदि 11वां उम्मीदवार मैदान में उतरता है तो वोटिंग के दिन कई विधायक अपनी ‘अंतरात्मा की आवाज’ पर पाला बदल सकते हैं। ऐसे में भाजपा के सामने अपने आठवें प्रत्याशी की जीत पक्की करने के लिए एनडीए गठबंधन के सहयोगियों (सुभासपा, निषाद पार्टी, रालोद) को एकजुट रखने का बड़ा दारोमदार है। राज्यसभा चुनाव के इतिहास को देखें तो दूसरी वरीयता के वोटों के प्रबंधन, वोटों के आवंटन और मजबूत वित्तीय व रणनीतिक असर से चुनावी नतीजे अक्सर अप्रत्याशित साबित होते रहे हैं।

एनडीए के बागी और पीडीए पृष्ठभूमि वाले विधायकों पर सपा की पैनी नजर

वर्ष 2024 के पिछले राज्यसभा चुनाव में सपा के कई विधायकों ने बगावत कर भाजपा के पक्ष में क्रॉस वोटिंग की थी, जिससे उद्योगपति संजय सेठ चुनाव जीतने में सफल रहे थे। इस बार सपा उसी तर्ज पर एनडीए में शामिल दलों के उन विधायकों में सेंधमारी की फिराक में है, जो पूर्व में सपा से जुड़े रहे हैं या फिर ‘पीडीए’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वर्ग से आते हैं। एनडीए गठबंधन की सहयोगी सुभासपा के 3 और रालोद के 2 मुस्लिम विधायकों को अपने पाले में लाने की जिम्मेदारी सपा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश के दो कद्दावर नेताओं को सौंपी है। इसके अलावा जिन विधायकों को आगामी विधानसभा चुनाव में अपना टिकट कटने का डर है, उनके भी इधर-उधर होने की प्रबल आशंका है।

अनिल अंबानी के बाद दूसरा बड़ा दांव, विरोधियों और अपनों के निशाने पर आई सपा

यह पहली बार नहीं है जब सपा ने किसी बड़े उद्योगपति पर दांव लगाया है। इससे पहले वर्ष 2004 में सपा ने दिग्गज उद्योगपति अनिल अंबानी को राज्यसभा भेजा था, जब उनकी कंपनी दादरी में पावर प्रोजेक्ट पर काम कर रही थी (हालाँकि बाद में उन्होंने इस्तीफा दे दिया था)। धनराज नथवानी को आगे कर सपा ने भाजपा के लिए मुश्किल तो खड़ी की है, लेकिन सुभासपा, एआईएमआईएम और यहां तक कि कांग्रेस भी सपा पर तीखे तंज कस रही है। उधर, सपा के भीतर से भी राज्यसभा टिकट के लिए सलीम शेरवानी और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्य सचिव आलोक रंजन जैसे दिग्गज नेता अभी भी प्रमुख दावेदार माने जा रहे हैं।

 

खबरें और भी हैं...

Leave a Comment

Are you human? Please solve:Captcha