
उत्तर प्रदेश की 10 राज्यसभा सीटों पर 16 अक्टूबर को होने जा रहे चुनाव ने राज्य के सियासी पारे को अचानक बढ़ा दिया है। आगामी विधानसभा चुनाव से ठीक पहले हो रहे इस चुनाव को सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सबसे बड़े ‘शक्ति परीक्षण’ के रूप में देखा जा रहा है। संख्याबल के मौजूदा आंकड़ों के हिसाब से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की आठ सीटों पर और समाजवादी पार्टी (सपा) की दो सीटों पर सीधी जीत तय मानी जा रही थी। हालांकि, भाजपा की ओर से नौवां पर्चा खरीदे जाने के बाद पूरे मुकाबले का मिजाज बदल गया है और सपा के वोट बैंक में बड़ी सेंधमारी की अटकलें तेज हो गई हैं।
नौवां पर्चा खरीदकर भाजपा ने बढ़ाई हलचल, विधायकों पर कड़ा पहरा
भाजपा द्वारा नौवां नामांकन पत्र खरीदे जाने से यह साफ संकेत मिल रहे हैं कि सत्तारूढ़ दल अतिरिक्त उम्मीदवार उतारकर 10वीं सीट पर कब्जा जमाने के लिए बिसात बिछा रहा है। यद्यपि भाजपा ने अभी अपने आधिकारिक प्रत्याशियों के नामों का औपचारिक एलान नहीं किया है, लेकिन नौवें पर्चे के सामने आते ही विपक्षी खेमे में हलचल मच गई है। दोनों प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों को एकजुट रखने और किसी भी तरह के पाला बदलने से रोकने के लिए रणनीतिक चौकसी बरत रहे हैं।
सपा के दो उम्मीदवारों का नामांकन दाखिल, तीसरे दांव की तैयारी
दूसरी ओर, समाजवादी पार्टी ने अपने दो प्रमुख प्रत्याशियों—वरिष्ठ नेता प्रो. रामगोपाल यादव और रिलायंस ग्रुप के वरिष्ठ एग्जीक्यूटिव धनराज नाथवानी का नाम फाइनल कर उनके नामांकन पत्र दाखिल करा दिए हैं। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी संकेत दिए हैं कि यदि पर्याप्त संख्याबल और अन्य असंतुष्ट विधायकों का समर्थन जुटता है, तो पार्टी तीसरा प्रत्याशी मैदान में उतारने से पीछे नहीं हटेगी।
तीसरे प्रत्याशी से खत्म होगी निर्विरोध चुनाव की गुंजाइश, क्रॉस वोटिंग का खतरा बढ़ा
यदि सपा तीसरा उम्मीदवार उतारती है या भाजपा अपने नौवें पर्चे पर प्रत्याशी का पर्चा दाखिल कराती है, तो चुनाव निर्विरोध समाप्त होने की गुंजाइश पूरी तरह खत्म हो जाएगी। ऐसे हालात में दोनों राजनीतिक दलों को अपने-अपने विधायकों का समर्थन बरकरार रखना सबसे बड़ी चुनौती होगा। पूर्व के राज्यसभा चुनावों में हुई क्रॉस वोटिंग के इतिहास को देखते हुए दोनों दल अतिरिक्त वोटों के समीकरण बैठाने और विरोधी खेमे की कमजोर कड़ियों में सेंध लगाने की रणनीति में जुट गए हैं।













