
महाराष्ट्र की राजधानी मुंबई स्थित ऐतिहासिक शिवाजी पार्क में गांधी जयंती (2 अक्टूबर, 2026) के अवसर पर आयोजित एक विरोध प्रदर्शन के दौरान दुखद हादसा सामने आया है। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) द्वारा आयोजित इस प्रदर्शन में शामिल होने आए 75 वर्षीय एक बुजुर्ग की दिल का दौरा (हार्ट अटैक) पड़ने से मौत हो गई। पुलिस के अनुसार मृतक की पहचान ठाणे निवासी गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई के रूप में हुई है। घटना के बाद प्रदर्शन स्थल और आसपास के इलाके में अफरा-तफरी का माहौल बन गया।
गेट नंबर 6 के पास बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में इलाज के दौरान तोड़ा दम
पुलिस द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, गोपालकृष्ण सुब्बैया पिल्लई शाम करीब 4:30 बजे शिवाजी पार्क पहुंचे थे। शाम लगभग 5:00 बजे मैदान के गेट नंबर 6 के पास उन्हें अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत हुई। स्थिति को देखते हुए मौके पर तैनात पुलिसकर्मियों और अन्य प्रदर्शनकारियों ने तुरंत उनकी मदद की। प्रदर्शन स्थल पर मौजूद एक डॉक्टर ने प्राथमिक उपचार दिया, जिसके बाद उन्हें तत्काल पास के सुश्रूषा अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल में इलाज के दौरान उनकी स्थिति बिगड़ती चली गई और डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
कड़क धूप और बिना अनुमति जुटी हजारों की भीड़
सीजेपी का यह विरोध प्रदर्शन दोपहर करीब 4:00 बजे शुरू हुआ था, जब इलाके में काफी तेज धूप और उमस थी। पुलिस की आधिकारिक अनुमति नहीं मिलने के बावजूद शिवाजी पार्क और उसके आसपास हजारों लोगों का हुजूम जमा हो गया था। मैदान और सड़कों पर लोगों की अत्यधिक भीड़ के कारण आवाजाही में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा, जिसे नियंत्रित करने के लिए पुलिस को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ी।
सीजेपी प्रमुख अभिजीत दीपके का बड़ा हमला: सीएम फडणवीस को दी चुनौती
प्रदर्शन के दौरान समर्थकों को संबोधित करते हुए सीजेपी के संस्थापक अभिजीत दीपके ने सूबे की सरकार और केंद्र पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के तत्काल इस्तीफे की मांग दोहराते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को खुले मंच से चुनौती दी कि वे शिवाजी पार्क में जुटे शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जेल भेजकर दिखाएं।
‘दो महीने के भीतर दूसरा बड़ा आंदोलन’, केंद्र सरकार पर साधा निशाना
अपने भाषण में अभिजीत दीपके ने केंद्र सरकार की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार की नीतियां इतनी असफल साबित हो रही हैं कि NEET पेपर लीक मामले को लेकर जंतर-मंतर पर हुए आंदोलन के महज दो महीने के भीतर ही देश की जनता को दोबारा सड़कों पर उतरने के लिए मजबूर होना पड़ा है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि चुनाव आयोग और सरकार ने जनता की मांगों को गंभीरता से नहीं लिया तो यह आंदोलन आगे और व्यापक रूप लेगा।











