मदीना में मस्जिद-ए-नबवी के पावर स्टेशन पर ड्रोन हमला: सऊदी अरब ने हूतियों को ठहराया जिम्मेदार, मुस्लिम देशों में भारी आक्रोश

सऊदी अरब के पवित्र शहर मदीना में पैगंबर मुहम्मद की ऐतिहासिक मस्जिद (मस्जिद-ए-नबवी) को बिजली आपूर्ति करने वाले मुख्य पावर स्टेशन पर एक ड्रोन हमला हुआ है। सऊदी अरब नीत सैन्य गठबंधन ने इस दुस्साहसिक हमले के लिए यमन के हूती विद्रोहियों को जिम्मेदार ठहराया है। इस हमले के कारण प्रभावित क्षेत्र में कुछ समय के लिए बिजली बाधित हो गई। मक्का के बाद अब मदीना जैसे अति-पवित्र स्थल को निशाना बनाए जाने की कोशिश से दुनिया भर के मुस्लिम देशों और खाड़ी राष्ट्रों में भारी आक्रोश व्याप्त हो गया है।

पावर स्टेशन का ट्रांसफॉर्मर क्षतिग्रस्त, बड़े नुकसान से बचा बिजली नेटवर्क

स्थानीय प्रशासन और सैन्य गठबंधन के अनुसार, यह हमला सीधे तौर पर मस्जिद-ए-नबवी सहित आसपास की नागरिक सुविधाओं को बिजली प्रदान करने वाले स्टेशन को निशाना बनाकर किया गया था। हमले के दौरान पावर स्टेशन का एक प्रमुख ट्रांसफॉर्मर बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि त्वरित राहत और वैकल्पिक व्यवस्था के कारण मुख्य बिजली नेटवर्क पर कोई बड़ा स्थायी असर नहीं पड़ा। सुरक्षा बलों द्वारा की गई प्राथमिक जांच और घटनास्थल से बरामद ड्रोन के मलबे के विश्लेषण से इस हमले में हूती विद्रोहियों की संलिप्तता की पुष्टि होने का दावा किया गया है।

सऊदी गठबंधन का बड़ा बयान: ‘मुसलमानों की भावनाओं को भड़काने की साजिश’

सऊदी गठबंधन ने आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि यह हमला इस्लाम के दो सबसे पवित्र स्थलों (मक्का और मदीना) को अस्थिर करने और दुनिया भर के करोड़ों मुसलमानों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाने का गंभीर प्रयास है। गौर करने वाली बात यह है कि महज दो हफ्ते पहले मक्का शहर पर भी एक ड्रोन हमले का प्रयास किया गया था, जिसे सऊदी रक्षा प्रणालियों ने हवा में ही नाकाम कर दिया था। अब मदीना को निशाना बनाए जाने के बाद क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया है।

हूती विद्रोहियों ने आरोपों को नकारा, बताया सऊदी का दुष्प्रचार

दूसरी तरफ, हूती विद्रोहियों ने इस हमले में अपनी किसी भी भूमिका से साफ इनकार किया है। हूती-नियंत्रित ‘साबा’ समाचार एजेंसी के हवाले से एक सैन्य सूत्र ने इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए इसे सऊदी अरब का झूठा प्रचार करार दिया। हूती पक्ष का कहना है कि मक्का पर पहले लगाए गए आरोपों के सबूत पेश न कर पाने की अपनी नाकामी को छिपाने के लिए सऊदी प्रशासन अब मदीना हमले का मनगढ़ंत दावा कर रहा है।

2022 के युद्धविराम के बाद फिर क्यों सुलग रही है जंग?

सऊदी अरब और ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के बीच यह हालिया घटनाक्रम सबसे गंभीर सैन्य तनाव का रूप ले चुका है। गौरतलब है कि वर्ष 2022 में संयुक्त राष्ट्र (UN) की मध्यस्थता में हुए ऐतिहासिक समझौते के बाद दोनों पक्षों के बीच सीमा पार से होने वाले हमलों में काफी कमी आई थी। हालांकि, इस साल जुलाई में हूती विद्रोहियों द्वारा सऊदी अरब की समुद्री नाकेबंदी की घोषणा करने और सऊदी क्षेत्र व वाणिज्यिक जहाजों पर दोबारा हमले शुरू करने के बाद से दोनों पक्षों के बीच संघर्ष एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है।

 

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