उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर ‘इंडिया’ (INDIA) गठबंधन के बीच सीटों के बंटवारे (Seat Sharing) की औपचारिक बातचीत शुरू होने से ठीक पहले कांग्रेस ने बड़ा संगठनात्मक फेरबदल कर दिया है। पार्टी ने अजय राय की जगह विधायक आराधना मिश्रा ‘मोना’ को उत्तर प्रदेश कांग्रेस का नया प्रदेश अध्यक्ष नियुक्त किया है। इस रणनीतिक बदलाव के पीछे आराधना मिश्रा और उनके पिता वरिष्ठ कांग्रेस नेता प्रमोद तिवारी के समाजवादी पार्टी (सपा) नेतृत्व के साथ मधुर और पुराने राजनीतिक संबंध माने जा रहे हैं। हालांकि, प्रदेश नेतृत्व में सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाए जाने के बाद यह सवाल भी गरमा गया है कि क्या सपा और कांग्रेस के बीच सीट शेयरिंग का फॉर्मूला बिना किसी खींचतान के हल हो पाएगा।
ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम समीकरण: कांग्रेस का नया ‘PDA’ दांव
कांग्रेस ने प्रदेश संगठन में बड़े स्तर पर ‘सोशल इंजीनियरिंग’ लागू की है। सपा के पारंपरिक PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले की काट और अपने पुराने जनाधार को वापस पाने के लिए कांग्रेस ने नया समीकरण तैयार किया है:
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ब्राह्मण चेहरा: प्रदेश अध्यक्ष पद पर आराधना मिश्रा की ताजपोशी से कांग्रेस ने प्रदेश के पारंपरिक ब्राह्मण वोट बैंक को साधने की कोशिश की है।
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मुस्लिम चेहरा: पश्चिमी यूपी के कद्दावर नेता और सांसद इमरान मसूद को कार्यकारी अध्यक्ष बनाकर मुस्लिम समुदाय में पकड़ मजबूत करने का संदेश दिया गया है।
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दलित कार्ड: पार्टी ने दिल्ली सरकार के पूर्व मंत्री और दलित नेता राजेंद्र पाल गौतम को पहले ही प्रदेश प्रभारी की कमान सौंपी हुई है।
इसके अलावा कांग्रेस प्रभारी का मानना है कि बहुजन समाज पार्टी (बसपा) से छिटका एक बड़ा धड़ा अब कांग्रेस गठबंधन को समर्थन दे रहा है, जिससे जमीनी स्तर पर पार्टी का ढांचा मजबूत हुआ है।
150 से बात शुरू, 100 सीटों पर अड़ने का मूड: कांग्रेस का सख्त रुख
सीटों के समीकरण को लेकर कांग्रेस के आंतरिक खेमे में हलचल तेज है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम के अनुसार पार्टी ने पूरे उत्तर प्रदेश में संगठन सृजन के जरिए सभी 403 विधानसभा सीटों पर कैडर खड़ा कर लिया है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक, गठबंधन की मेज पर बातचीत की शुरुआत 150 सीटों की मांग से होगी और पार्टी किसी भी स्थिति में 100 से कम सीटों पर चुनाव लड़ने के मूड में नहीं है। वहीं, स्वामी प्रसाद मौर्य की अधिकार जनता पार्टी (AJP) भी इस बार कांग्रेस के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा कर चुकी है।
सपा का फॉर्मूला: 60 सीटों पर सिमटने का दबाव
दूसरी तरफ समाजवादी पार्टी के सूत्रों का गणित कांग्रेस के दावों से बिल्कुल जुदा है। सपा नेताओं का तर्क है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने यूपी में 6 सीटें जीती थीं, उस हिसाब से हर लोकसभा में 5 विधानसभा सीटें मानकर कांग्रेस का न्यायसंगत हिस्सा 30 सीटों का बनता है, जिसे बढ़ाकर अधिकतम 60 सीटों तक किया जा सकता है।
हालांकि, कांग्रेस नेता इस तर्क को खारिज करते हुए कहते हैं कि सपा के 37 लोकसभा सीटें जीतने के आधार पर उन्हें सीधे 185 सीटें ही दी जाएं, ऐसा गठबंधन की राजनीति में संभव नहीं होता। 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद राहुल गांधी की राष्ट्रीय स्तर पर बढ़ी छवि को कांग्रेस यूपी में बड़ा राजनीतिक एक्स-फैक्टर मान रही है।
राहुल, प्रियंका और अखिलेश की सीधी बैठक में ही तय होगा अंतिम फॉर्मूला
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि राज्य स्तर पर भले ही दोनों दलों के नेताओं के बयानों से तल्खी नजर आ रही हो, लेकिन इंडिया गठबंधन एक साथ मिलकर चुनाव लड़ेगा। सीट शेयरिंग के पेचीदा फॉर्मूले का अंतिम समाधान निचले स्तर के बयानों से नहीं, बल्कि राहुल गांधी, प्रियंका गांधी और सपा प्रमुख अखिलेश यादव की सीधी हाई-लेवल बैठक के बाद ही निकलेगा।
















