
नई दिल्ली। ईरान के खिलाफ सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल हो रहे ब्रिटेन के रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण RAF फेयरफोर्ड (RAF Fairford) एयरबेस से अमेरिका ने अपने सभी घातक बॉम्बर्स (Bombers) को अचानक वापस बुला लिया है। यह बड़ा कदम एयरबेस पर कथित आतंकी हमले की साजिश की जारी जांच के बीच उठाया गया है। पेंटागन के एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, RAF फेयरफोर्ड पर तैनात सभी अमेरिकी बॉम्बर्स को सुरक्षित रूप से अमेरिका स्थित उनके मुख्य होम बेस पर वापस भेज दिया गया है।

उल्लेखनीय है कि RAF फेयरफोर्ड से अमेरिका के B-52 और B-1 जैसे आधुनिक व विनाशकारी बॉम्बर्स लगातार उड़ान भर रहे थे। एविएशन ट्रैकिंग संस्था ‘मिलिट्री एयर ट्रैकिंग अलायंस’ की रिपोर्ट के मुताबिक, हाल के दिनों में कई B-1 बॉम्बर्स को इस ब्रिटिश एयरबेस से प्रस्थान करते हुए रिकॉर्ड किया गया था।
आतंकी साजिश और गिरफ्तारियों के बाद लिया गया बड़ा फैसला RAF फेयरफोर्ड एयरबेस पर सितंबर के अंत में एक संदिग्ध सुरक्षा घटना सामने आई थी। इसके बाद काउंटर-टेररिज्म जांच तेज करते हुए ब्रिटिश पुलिस ने सेंट्रल लंदन से एक ब्रिटिश-ईरानी नागरिक को आतंकी हमले की साजिश के संदेह में गिरफ्तार किया। इस पूरे मामले की तफ्तीश के दौरान कुल छह लोगों को हिरासत में लिया गया था, जिन्हें प्राथमिक पूछताछ के बाद जमानत पर रिहा कर दिया गया है।
ब्रिटिश सुरक्षा अधिकारियों ने इस साजिश के तार ईरान से जुड़े होने का अंदेशा जताया है। हालांकि, तेहरान ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है। इससे पहले ईरान ने चेतावनी जारी की थी कि उसके खिलाफ सैन्य अभियानों में इस्तेमाल होने वाले किसी भी विदेशी सैन्य ठिकाने को वह अपना सीधा और वैध निशाना मानेगा।
डोनाल्ड ट्रंप के अगले कदम पर दुनिया की नजरें अमेरिकी बॉम्बर्स की वापसी ऐसे नाजुक वक्त में हुई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान के खिलाफ आगे की सैन्य कार्रवाई और नए हमलों के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं। ट्रंप ने हालिया बयान में कहा कि ईरान इस वक्त भारी दबाव और तबाही के दौर से गुजर रहा है और आगे का रास्ता आसान या बेहद मुश्किल हो सकता है। उन्होंने यह भी स्पष्ट संकेत दिया कि ईरान नीति को लेकर अंतिम और निर्णायक फैसला वे खुद लेंगे।
लंदन से लगभग 160 किलोमीटर पश्चिम में स्थित RAF फेयरफोर्ड दशकों से मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) में अमेरिकी वायुसेना के प्रमुख रणनीतिक आधार के रूप में कार्य करता रहा है।
मध्य पूर्व में बनी हुई है अमेरिकी नौसेना की विशाल मौजूदगी ब्रिटेन से बॉम्बर्स की वापसी के बावजूद मध्य पूर्व के समुद्री और रणनीतिक क्षेत्र में अमेरिका की विशाल सैन्य मौजूदगी बनी हुई है। पेंटागन के अधिकारियों के अनुसार, अमेरिकी नौसेना का परमाणु संचालित विमानवाहक पोत USS Theodore Roosevelt और USS Makin Island एम्फीबियस रेडीनेस ग्रुप तेजी से इस क्षेत्र की ओर बढ़ रहे हैं।
इन युद्धपोतों पर 7,000 से अधिक नौसैनिक और लगभग 2,000 मरीन कमाडो तैनात हैं। रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक, इस नई तैनाती के बाद इस महीने के अंत तक मध्य पूर्व में एक साथ तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर ग्रुप मौजूद हो सकते हैं।














