
उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में उफनाई गोमती नदी ने विकराल रूप धारण कर लिया है। बीते कई दिनों से लगातार हो रही बढ़ोतरी के चलते गोमती का जलस्तर सामान्य से करीब आठ फीट ऊपर चढ़कर 108.14 मीटर के खतरनाक निशान तक पहुंच गया है। नदी का पानी अब तटीय इलाकों से निकलकर शहर के प्रमुख रिहायशी, पर्यटन और धार्मिक स्थलों को अपनी जद में लेने लगा है। शहर के प्रसिद्ध हनुमंत धाम (हनुमान सेतु मंदिर) परिसर, प्राचीन शनि देव मंदिर और लक्ष्मण मेला मैदान के आसपास भारी जलभराव हो गया है। खतरे को देखते हुए प्रशासन ने गोमती रिवरफ्रंट स्थित ‘फूड वैली’ को एहतियातन अस्थायी रूप से बंद करवा दिया है।

‘मां गोमती करा रहीं हनुमान जी को स्नान’, 2006 के बाद पहली बार ऐसे हालात
गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के कारण प्रसिद्ध लेटे हुए हनुमान मंदिर परिसर में नदी का पानी भर गया है। मंदिर के मुख्य पुरोहित विनोद तांगड़ी ने स्थिति को भयावह बताते हुए कहा कि वर्ष 2006-07 के बाद पहली बार नदी का पानी इस स्तर तक पहुंचा है। उन्होंने बताया कि मां गोमती, श्री हनुमान जी के चरणों तक पहुंच चुकी हैं और उन्हें स्नान करा रही हैं। पुरोहित के अनुसार, धार्मिक मान्यताओं के तहत जब मंदिर परिसर जलमग्न होता है, तो हनुमान जी ‘विश्राम अवस्था’ में चले जाते हैं। ऐसे में उन्हें परेशान न करते हुए मूर्ति पर लाल चादर रखी जाती है और बाहर से ही दूर से भोग व आरती अर्पित की जाएगी। उन्होंने याद दिलाया कि 1956 से 1983-84 के दौर में गोमती हर साल हनुमान जी को स्नान कराया करती थी। इस उफान से डाउनस्ट्रीम की करीब 20 से 25 फीसदी आबादी प्रभावित हुई है।
ग्रामीण इलाकों में तबाही: बीकेटी के गांवों में 30 नावें और 4 राहत शिविर तैनात
शहर के साथ-साथ ग्रामीण इलाकों में भी गोमती के रौद्र रूप से हालात बेहद नाजुक बने हुए हैं। बख्शी का तालाब (BKT) तहसील के लासा, बहादुरपुर, सुल्तानपुर और अकड़िया मऊ जैसे गांवों में हालांकि पानी का स्तर हल्का सा नीचे गिरा है, लेकिन ग्रामीणों की दिक्कतें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। प्रशासन ने आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने के लिए 30 नावें तैनात की हैं। इसके अलावा 4 राहत शिविर और सहायता केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां बाढ़ पीड़ितों को शरण देने के साथ भोजन और अन्य बुनियादी सुविधाएं दी जा रही हैं।
डीएम और जेसीपी ने नाव से परखी जमीनी हकीकत, दिए सख्त निर्देश
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए जिलाधिकारी (DM) विशाख जी और संयुक्त पुलिस आयुक्त (JCP) बबलू कुमार ने खुद मोर्चा संभाला। दोनों अधिकारियों ने प्रभावित इलाकों में नाव से दौरा कर राहत और बचाव कार्यों का जायजा लिया। डीएम ने अधिकारियों को सख्त हिदायत दी है कि राहत कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रभावित गांवों में मेडिकल किट और पानी साफ करने के लिए क्लोरीन की गोलियां बांटी जा रही हैं। वहीं, पशुपालन विभाग की टीमें मवेशियों के चारे-भूसे का प्रबंध करने और बीमार मवेशियों के इलाज में जुटी हैं।
फैजुल्लागंज में ड्रोन से छिड़काव, 24 घंटे अलर्ट पर प्रशासन
फैजुल्लागंज इलाके में भी बाढ़ का पानी घुसने से स्थिति गंभीर बनी हुई है। डीएम विशाख जी ने नाव से पहुंचकर प्रभावित परिवारों को ड्राई राशन किट वितरित की और उनकी समस्याएं सुनीं। इसके साथ ही नगर आयुक्त गौरव कुमार ने फैजुल्लागंज का मुआयना कर जल निकासी, फॉगिंग और सफाई व्यवस्था की समीक्षा की। नगर निगम की ओर से पंपसेट लगाकर रिहायशी बस्तियों से पानी निकाला जा रहा है। जलभराव के कारण मच्छरों और बीमारियों के खतरे को देखते हुए पहली बार ड्रोन की मदद से एंटी-लार्वा का छिड़काव कराया जा रहा है। स्थानीय प्रशासन और राजस्व विभाग के अधिकारियों को 24 घंटे अलर्ट मोड पर रखा गया है।













