त्योहारों के सीजन में महंगाई की मार: RBI ने वित्त वर्ष 2027 का अनुमान बढ़ाकर 5.2% किया, क्रूड ऑयल और अल-नीनो बने सबसे बड़े विलेन

केवल भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया इस समय महंगाई की भीषण आग से जूझ रही है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक के दौरान देश के सामने खड़ी इस गंभीर चुनौती को जगजाहिर कर दिया है। केंद्रीय बैंक के नए आकलन के अनुसार, चालू वित्त वर्ष 2027 की तीसरी (दिसंबर) तिमाही में देश की खुदरा महंगाई दर 6 फीसदी के स्तर को छू सकती है। यही वह समय है जब देश में दिवाली और छठ का फेस्टिव सीजन चरम पर होता है। आरबीआई ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि यदि वैश्विक और मानसूनी हालात में सुधार नहीं हुआ, तो आगामी दिसंबर की समीक्षा बैठक में भी ब्याज दरों (Policy Rates) में एक और रेट हाइक देखने को मिल सकता है।

आपूर्ति संकट और कच्चे तेल से बढ़ा दबाव: RBI ने बढ़ाए महंगाई के आंकड़े

आरबीआई ने वित्त वर्ष 2027 के लिए अपने औसत खुदरा महंगाई अनुमान को 5.0 फीसदी से बढ़ाकर 5.2 फीसदी कर दिया है। गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि अगस्त महीने में 4 फीसदी से ज्यादा महंगाई वाली वस्तुओं का वेटेड शेयर बढ़कर लगभग 37 फीसदी हो गया था, जो दिखाता है कि कीमतों का दबाव अर्थव्यवस्था में व्यापक हो रहा है। आरबीआई के नए तिमाही आंकड़े इस प्रकार हैं:

  • दूसरी तिमाही (Q2): 4.9%

  • तीसरी तिमाही (Q3 – फेस्टिव सीजन): 6.0%

  • चौथी तिमाही (Q4): 5.7%

  • वित्त वर्ष 2028 की पहली तिमाही (Q1): 5.6%

महंगाई भड़काने वाले 3 सबसे प्रमुख कारण

  1. 100 डॉलर पार पहुंचा कच्चा तेल: मध्य पूर्व (West Asia) में जारी युद्ध और भू-राजनीतिक तनाव के चलते ब्रेंट क्रूड ऑयल अंतरराष्ट्रीय बाजार में 100 डॉलर प्रति बैरल के पार निकल गया है। इससे आयात लागत और ट्रांसपोर्टेशन कॉस्ट में भारी उछाल आया है।

  2. रुपये में 6% की गिरावट: अमेरिकी डॉलर के मुकाबले भारतीय रुपया इस साल करीब 6 फीसदी कमजोर हुआ है, जिससे क्रूड, खाद और अन्य जरूरी आयातित सामान भारतीय बाजार में और महंगे हो गए हैं।

  3. अल-नीनो का कहर और मानसून की कमी: देश में अल-नीनो के प्रभाव के चलते मानसून सामान्य से कम और असमान रहा है। इसका सीधा असर रबी और खरीफ फसलों के उत्पादन पर पड़ने की आशंका है, जिससे सब्जियों, दालों और अनाजों की कीमतें आसमान छू रही हैं।

अर्थशास्त्रियों के अनुमान पर खरी उतरी आरबीआई की पॉलिसी

नीतिगत दरों में 0.25% की बढ़ोतरी का फैसला बाजार और अर्थशास्त्रियों की उम्मीदों के बिल्कुल अनुरूप रहा। आईडीएफसी फर्स्ट बैंक (IDFC First Bank) ने तीसरी तिमाही में महंगाई 6.1% रहने, जबकि एसबीआई रिसर्च (SBI Research) ने अक्टूबर और नवंबर में महंगाई के 6.5% के पार जाने का अनुमान जताया था। अगस्त में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 4.82% पर पहुंच गई थी, जो आरबीआई के 4% के मध्यम अवधि लक्ष्य से काफी ऊपर थी।

दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपना रहे हैं सख्त रुख

वैश्विक स्तर पर महंगाई का यह संकट इतना भयावह है कि दुनिया भर के दिग्गज सेंट्रल बैंक अपनी नीतियां सख्त (Monetary Tightening) कर रहे हैं:

  • US फेडरल रिजर्व: फेड रिजर्व ने अपनी पॉलिसी रेट को 25 बेसिस प्वाइंट्स बढ़ाकर 3.75%-4.00% कर दिया है।

  • यूरोपीय सेंट्रल बैंक (ECB): ईसीबी ने भी अपनी मुख्य दरों में 0.25% का इजाफा किया है और 2026 के लिए महंगाई अनुमान बढ़ाकर 3% कर दिया है।

  • बैंक ऑफ जापान (BOJ): जापान ने भी अपनी पॉलिसी रेट को 31 साल के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है और कमज़ोर येन व कच्चे माल की महंगाई से निपटने के लिए और सख्ती के संकेत दिए हैं।

 

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