वाशिंगटन/ओस्लो। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को इस वर्ष का नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर उन्होंने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। शुक्रवार को नोबेल समिति के फैसले की सार्वजनिक रूप से आलोचना करते हुए ट्रंप ने इसे ‘शर्मनाक और अपमानजनक’ करार दिया। ट्रंप ने कहा कि इस निर्णय से नॉर्वे और नोबेल समिति की साख पर ऐसा दाग लगा है जिसे मिटाना आसान नहीं होगा, और वे इस फैसले को कभी नहीं भूलेंगे।
इस वर्ष नोबेल शांति पुरस्कार के लिए चुनी गईं अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (ICC) की पूर्व जज नवानेथेम ‘नवी’ पिल्लै (Navanethem Navi Pillay) के चयन पर भी ट्रंप ने सवाल उठाए। उन्होंने पिल्लै की पहचान पर चुटकी लेते हुए कहा, “आज नोबेल शांति पुरस्कार ऐसे शख्स को दे दिया गया, जिसके बारे में मैंने पहले कभी सुना ही नहीं। कोई नहीं जानता कि वे कौन हैं।” ट्रंप ने आरोप लगाया कि वैश्विक शांति के लिए उनके द्वारा किए गए ऐतिहासिक कार्यों को जानबूझकर नजरअंदाज किया गया है।
‘मैंने 8 युद्ध खत्म कराए, मुझे मिलने चाहिए थे 8 नोबेल पुरस्कार’
अपनी कूटनीतिक उपलब्धियों का बखान करते हुए ट्रंप ने दावा किया कि उन्होंने दुनिया भर में आठ बड़े सैन्य संघर्षों को सुलझाने या रोकने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उन्होंने कहा, “मैंने गाजा और ईरान से जुड़े भीषण संघर्षों को रोका। मैंने ईरान को पूरे मध्य पूर्व, यूरोप और अमेरिका के कुछ हिस्सों में तबाही मचाने से रोका। किसी भी अमेरिकी राष्ट्रपति ने शायद ही कभी एक युद्ध सुलझाया हो, लेकिन मैंने आठ युद्ध खत्म कराए हैं। इस काम के लिए मुझे एक नहीं, बल्कि आठ नोबेल शांति पुरस्कार मिलने चाहिए थे।”
ट्रंप ने अपने दावों में भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव कम कराने के अलावा रवांडा-कांगो, थाईलैंड-कंबोडिया, आर्मेनिया-अजरबैजान, मिस्र-इथियोपिया और सर्बिया-कोसोवो के बीच जारी विवादों में हस्तक्षेप करने का जिक्र किया।
दावों पर उठे सवाल और पुरानी चाहत
हालांकि, अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों और विश्लेषकों ने ट्रंप के दावों पर सवाल खड़े किए हैं। आलोचकों का कहना है कि जिन 8 विवादों का जिक्र ट्रंप ने किया है, उनमें से कई मामलों में स्थितियां पूरी तरह सामान्य नहीं हुई हैं और कई जगह अब भी छिटपुट संघर्ष जारी है। ऐसे में इन विवादों के समाधान का पूरा श्रेय ट्रंप को देना तर्कसंगत नहीं है।
यह पहली बार नहीं है जब डोनाल्ड ट्रंप ने नोबेल शांति पुरस्कार पाने की अपनी तीव्र इच्छा जाहिर की है। अपने पिछले और मौजूदा कार्यकाल के दौरान वे बार-बार यह दोहराते रहे हैं कि मध्य पूर्व समझौतों और विभिन्न वैश्विक तनावों को कम करने के प्रयासों के लिए वे इस प्रतिष्ठित सम्मान के सबसे बड़े हकदार हैं। इस बार पुरस्कार न मिलने से बौखलाए ट्रंप ने सीधा निशाना नॉर्वे की नोबेल समिति पर साधा है।



















