नई दिल्ली। देश की राजधानी दिल्ली में विरोध-प्रदर्शन को लेकर एक बार फिर सियासी ड्रामा गरमा गया है. कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के तीन प्रमुख नेताओं—सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को दिल्ली पुलिस ने बुधवार सुबह गिरफ्तार कर लिया है. इस कार्रवाई की पुष्टि करते हुए CJP की लीगल हेड रत्ना सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (X) पर एक विस्तृत पोस्ट साझा की है.
उल्लेखनीय है कि मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर इलाके में बिना अनुमति प्रवेश करने, धारा 144 का उल्लंघन करने और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर नारेबाजी करने के आरोप में इन नेताओं के खिलाफ प्राथमिकी (FIR) दर्ज की थी.
‘रात 3 बजे प्राइवेट वैन में लाए, वकीलों से भी नहीं मिलने दिया’
CJP की लीगल प्रमुख रत्ना सिंह ने दिल्ली पुलिस के रवैये पर कड़े सवाल उठाए हैं. उन्होंने एक्स पर लिखा कि दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन में गिरफ्तार रखा है. उन पर बिना इजाजत प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश करने, बेल बॉन्ड का उल्लंघन करने और सरकारी कर्मचारी के कार्य में बाधा पहुंचाने जैसी धाराएं लगाई गई हैं.
रत्ना सिंह ने आरोप लगाया कि तीनों नेताओं को तड़के 3 बजे एक प्राइवेट वैन में संसद मार्ग थाने लाया गया और देर रात तक उन्हें अपने वकीलों से भी मिलने नहीं दिया गया. उन्हें स्पेशल एग्जिक्युटिव मजिस्ट्रेट (SEM) कोर्ट में पेश किया जाएगा, जहां से उन्हें तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत (JC) में भेजे जाने की आशंका है. उन्होंने कहा कि पुलिस की इस गैर-कानूनी कार्रवाई के बावजूद कार्यकर्ताओं के हौसले बुलंद हैं.
कोर्ट रख सकती है सख्त जमानत शर्तें, जेल जाने का खतरा
दरअसल, तीनों एक्टिविस्ट्स ने मंगलवार सुबह भारी बैरिकेडिंग को लांघकर जंतर-मंतर क्षेत्र में प्रवेश किया था और केंद्र सरकार व चुनाव आयोग के खिलाफ नारेबाजी की थी. जिसके बाद उन्हें हिरासत में लेकर डिटेंशन सेंटर भेजा गया था. नियमानुसार, हिरासत के 24 घंटे पूरे होने से पहले इसे प्रिवेंटिव अरेस्ट में बदला गया.
सूत्रों के मुताबिक, जब पुलिस इन नेताओं को SEM कोर्ट में पेश करेगी, तब वह कोर्ट को यह जानकारी भी देगी कि सौरव दास और आशुतोष रांका को महज 4 दिन पहले ही बेल बॉन्ड की शर्तों के साथ रिहा किया गया था. शर्तों का उल्लंघन होने के कारण इस बार अदालत उनके खिलाफ सख्त रुख अपना सकती है और जमानत याचिका खारिज कर उन्हें जेल भेज सकती है.
क्यों भड़का विवाद? SIR के खिलाफ CJP का हल्लाबोल
राजधानी में यह पूरा विवाद वोटर लिस्ट के ‘स्पेशल इंटेंसिव रिविजन’ (SIR) प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों को लेकर शुरू हुआ है. CJP और कई अन्य सामाजिक संगठन लगातार SIR के विरोध में प्रदर्शन कर रहे हैं.
प्रदर्शनों को दबाने का आरोप लगाते हुए CJP ने कहा है कि हाल ही में 11 अक्टूबर को दिल्ली पुलिस कमिश्नर अनुराग कुमार ने एक आदेश जारी कर जंतर-मंतर को प्रदर्शन स्थल की आधिकारिक सूची से हटा दिया था. नए आदेश के अनुसार, प्रदर्शनकारियों के लिए रामलीला मैदान, बुराड़ी ग्राउंड और सीबीडी (CBD) ग्राउंड तय किए गए हैं. CJP ने इस फैसले का कड़ा विरोध करते हुए कहा है कि देश के मुख्य राजनीतिक केंद्र से विरोध प्रदर्शनों को दूर धकेलना जनता की आवाज को दबाने की साजिश है.


















