नई दिल्ली। देशभर में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर जारी तीखी राजनीतिक बहस और कानूनी खींचतान के बीच भारत निर्वाचन आयोग ने एक और बड़ा कदम उठाया है। चुनाव आयोग ने देश के 17 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में मतदाता सूची को अपडेट करने के लिए विशेष संक्षिप्त संशोधन (SSR) कार्यक्रम की आधिकारिक घोषणा कर दी है।
आयोग का मुख्य उद्देश्य नए पात्र मतदाताओं के नाम जोड़ना, वंचित और कम प्रतिनिधित्व वाले समूहों की भागीदारी बढ़ाना और वोटर लिस्ट में मौजूद गड़बड़ियों को दूर कर पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
SIR और SSR में क्या है अंतर?
अक्सर लोग SIR और SSR को एक ही मान लेते हैं, जबकि दोनों की कार्यप्रणाली में बड़ा अंतर है। SIR (विशेष गहन पुनरीक्षण) में चुनाव आयोग की टीमें व्यापक स्तर पर गहन जांच-पड़ताल करती हैं, जबकि SSR (विशेष संक्षिप्त संशोधन) जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 की धारा 21 के तहत संचालित एक निश्चित समयावधि का नियमित संशोधन अभियान है।
इस बार SSR के तहत 1 जनवरी 2027 को मुख्य अर्हता तिथि (Qualifying Date) माना गया है।
SSR अभियान के 20 प्रमुख प्रावधान और नियम: एक नजर में
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घर-घर जाकर गणना नहीं: चूंकि यह एक ‘संक्षिप्त संशोधन’ है, इसलिए बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) हर मतदाता के घर-घर जाकर सर्वे या जनगणना नहीं करेंगे।
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18 साल पूरा करने वालों को एडवांस आवेदन: 1 जनवरी 2027 को 18 वर्ष की आयु पूरी करने वाले युवाओं के अलावा, वर्ष 2027 में 1 अप्रैल, 1 जुलाई और 1 अक्टूबर को पात्र होने वाले नागरिक भी अग्रिम (Advance) आवेदन जमा कर सकेंगे।
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नए पोलिंग स्टेशन का गठन: फील्ड वेरिफिकेशन में जरूरत सामने आने पर जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO) राजनीतिक दलों के साथ बैठक कर नए मतदान केंद्रों को अंतिम रूप देंगे।
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हेल्प डेस्क की स्थापना: जिला और विधानसभा स्तर पर विशेष हेल्प डेस्क बनाए जाएंगे, ताकि प्रवासियों, गरीबों और वंचितों को फॉर्म भरने में सहूलियत हो।
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विशेष शिविरों का आयोजन: नए नाम जोड़ने और त्रुटि सुधार के लिए विशेष पोलिंग बूथ कैंप और अभियान आयोजित किए जाएंगे।
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राजनीतिक दलों के साथ साप्ताहिक बैठक: निर्वाचक पंजीकरण अधिकारी (ERO) हर सप्ताह मान्यता प्राप्त राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों के साथ बैठक कर अपडेट साझा करेंगे।
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पूरक दस्तावेजों की शेयरिंग: ड्राफ्ट लिस्ट से पहले जोड़े गए, हटाए गए या सुधारे गए नामों के पूरक दस्तावेज राजनीतिक दलों को दिए जाएंगे।
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डिजिटल और प्रिंटेड वोटर लिस्ट: राजनीतिक दलों को ड्राफ्ट व अंतिम मतदाता सूची की हार्ड कॉपी के साथ-साथ सर्च करने योग्य PDF की सॉफ्ट कॉपी उपलब्ध कराई जाएगी।
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चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों को फ्री कॉपी: चुनाव घोषित होने पर मान्यता प्राप्त दलों के उम्मीदवारों को अंतिम वोटर लिस्ट और सॉफ्टवेयर से तैयार सप्लीमेंट्री लिस्ट की एक कॉपी मुफ्त दी जाएगी।
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फॉर्म-7 जमा करने पर सख्त सीमा: चुनाव आयोग ने 9 अक्टूबर 2026 के अपने निर्देश संख्या 23/Inst/2026-ERS के तहत नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने वाले ‘फॉर्म-7’ को जमा करने की अधिकतम सीमा तय की है, ताकि गलत नीयत से बड़े पैमाने पर नाम न काटे जा सकें।
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पेनड्राइव में मिलेगी इलेक्ट्रॉनिक कॉपी: चुनाव के दौरान रिटर्निंग ऑफिसर प्रत्याशियों की मांग पर पेनड्राइव में वर्णक्रम (Alphabetical order) के अनुसार तैयार पढ़ने योग्य PDF उपलब्ध कराएंगे।
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e-EPIC डाउनलोड की सुविधा: नया नाम जुड़ते ही मतदाताओं को पंजीकृत मोबाइल नंबर पर SMS मिलेगा, जिसके बाद वे ‘ECINET’ ऐप या पोर्टल से डिजिटल वोटर कार्ड (e-EPIC) डाउनलोड कर सकेंगे।
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भौतिक वोटर आईडी डिलीवरी: ओरिजिनल प्लास्टिक EPIC कार्ड मतदाता के पते पर स्पीड पोस्ट या बीएलओ के माध्यम से भेजा जाएगा।
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ERO और AERO के फैसलों की स्क्रूटनी: अधिकारियों द्वारा पारित आदेशों का जिला निर्वाचन अधिकारी (DEO), रोल ऑब्जर्वर और मुख्य निर्वाचन अधिकारी (CEO) स्तर पर री-वेरिफिकेशन किया जाएगा।
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नियमित अपडेट्स व्यवस्था: CEO, DEO और ERO राजनीतिक दलों के साथ पारदर्शी संवाद बनाए रखेंगे।
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BLO और BLA का तालमेल: बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) राजनीतिक दलों के बूथ लेवल एजेंट (BLA) के साथ नियमित बैठकें कर पूरी समय-सारणी साझा करेंगे।
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ड्राफ्ट लिस्ट की संयुक्त जांच: BLO और BLA मिलकर ड्राफ्ट वोटर लिस्ट की एक-एक प्रविष्टि की जांच करेंगे और गलतियों की पहचान करेंगे।
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BLA के लिए सत्यापन घोषणा अनिवार्य: जब BLA आम जनता से फॉर्म एकत्र कर जमा करेंगे, तो उन्हें हलफनामा/घोषणा देनी होगी कि उन्होंने दर्ज विवरणों की स्वयं जांच की है।
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वंचित समूहों पर विशेष फोकस: महिलाओं, ट्रांसजेंडर्स, अनुसूचित जनजातियों (ST), विशेष रूप से कमजोर जनजातीय समूहों (PVTG), वरिष्ठ नागरिकों, दिव्यांगों और दूरदराज क्षेत्रों में रहने वाले गरीबों का नाम जोड़ने के लिए विशेष मोबाइल वैन व कैंप लगाए जाएंगे।
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दस्तावेजों की कड़ी सुरक्षा: मतदाता सूची और सभी आवेदनों के रिकॉर्ड निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण नियम, 1960 के नियम 32 के तहत पूरी गोपनीयता और कानूनी सुरक्षा में रखे जाएंगे।


















