डोनाल्ड ट्रंप का बड़ा फैसला: रूस-ईरान पर कड़े प्रतिबंधों से भारत को दी बड़ी छूट, टैरिफ का खतरा टला…जानिए यू-टर्न की वजह और डीजल समझौता

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने राष्ट्रीय हित का हवाला देते हुए रूस और ईरान पर प्रतिबंध लगाने से संबंधित कानून के तहत प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों से छूट देने का बड़ा आदेश जारी किया है। रूसी तेल और गैस खरीद पर डोनाल्ड ट्रंप के इस फैसले से भारत और चीन समेत कई देशों को बहुत बड़ी राहत मिली है। हालांकि, इसे अमेरिकी राष्ट्रपति का बड़ा यू-टर्न माना जा रहा है, क्योंकि ये कड़े प्रतिबंध और अतिरिक्त शुल्क उनके द्वारा पिछले महीने हस्ताक्षरित विधेयक के तहत लागू होने वाले थे और इनके प्रभावी होने से ठीक एक दिन पहले यह छूट दी गई है।

डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार शाम जारी कार्यकारी आदेश में स्पष्ट किया कि वे ग्राहम कानून के तहत दिए गए प्रतिबंधों, पाबंदियों और शुल्कों के लागू होने से छूट प्रदान कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में ऐसी छूट देना अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है। इस संबंध में राष्ट्रपति ने अमेरिकी कांग्रेस को औपचारिक प्रमाणपत्र भी सौंपा है। यह कार्यकारी आदेश ऐसे समय में आया है जब ट्रंप का रुख रूस के प्रति नरम दिखाई दे रहा है और वे सार्वजनिक रूप से यूक्रेन के रुख पर सवाल उठा चुके हैं।

ट्रंप के यू-टर्न की वजह और डीजल समझौता

हाल ही में ट्रंप ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ एक द्विपक्षीय समझौते का ऐलान किया था, जिसके तहत रूस अमेरिका को तत्काल 3 लाख टन से अधिक डीजल की आपूर्ति करेगा और आने वाले महीनों में अन्य खेप भी भेजी जाएंगी। इस समझौते को लेकर यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कड़ी आलोचना की थी और इसे कमजोर फैसला करार दिया था। वहीं अमेरिकी कूटनीति में आए इस बदलाव को रूस से ऊर्जा आपूर्ति सुरक्षित करने की ट्रंप की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है।

भारत को मिली बड़ी राहत और 100% टैरिफ का खतरा टला

‘लिंडसे ओ ग्राहम सैंक्शनिंग रशिया एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ के तहत अमेरिकी राष्ट्रपति के पास रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले पांच प्रमुख देशों—भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान—पर 100 प्रतिशत तक का भारी टैरिफ लगाने का प्रावधान था। इसकी एक महीने की समयसीमा 18 अक्तूबर को समाप्त हो रही थी। यदि यह छूट न मिलती, तो भारतीय निर्यात पर भारी वित्तीय दबाव पड़ता। भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि वह अपने 1.4 अरब नागरिकों की ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए हर जरूरी कदम उठाएगा और बाजार की परिस्थितियों के अनुसार ऊर्जा स्रोत चुनता रहेगा।

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