
पश्चिमी उत्तर प्रदेश की अदालतों द्वारा हाल ही में सुनाए गए फैसलों ने अपराधियों के बीच कड़ा और स्पष्ट संदेश दिया है। मेरठ में महज दो दिन के भीतर दो अलग-अलग बहुचर्चित मामलों में कुल चार दोषियों को अदालत ने फांसी की सजा (मृत्युदंड) सुनाई है। इन ऐतिहासिक फैसलों के बाद जेल प्रशासन भी पूरी तरह सतर्क हो गया है। जेल सूत्रों के अनुसार, पति की हत्या से जुड़े मामलों में जेल में बंद अन्य महिला आरोपियों की बेचैनी और तनाव काफी बढ़ गया है, जिसे देखते हुए जेल प्रशासन ने उनकी विशेष निगरानी शुरू कर दी है और उनकी काउंसिलिंग कराए जाने की तैयारी है।
वर्ष 2025 के दो बड़े हत्याकांड, जिन्होंने हिला दिया था वर्ष 2025 के दौरान मेरठ के ब्रह्मपुरी थाना क्षेत्र में हुआ ‘सौरभ हत्याकांड’ और बहसूमा के अकबरपुर सादात गांव में हुआ ‘अमित हत्याकांड’ पूरे देश में सुर्खियों में छाए रहे थे। लगभग एक महीने के अंतराल पर सामने आई इन दोनों खौफनाक वारदातों में पतियों की हत्या की साजिश किसी और ने नहीं, बल्कि उनकी अपनी ही पत्नियों ने अपने प्रेमियों के साथ मिलकर रची थी। पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए दोनों ही मामलों में पर्दाफाश किया था और सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
पश्चिमी यूपी की पांच महिलाओं को मिल चुकी है फांसी की सजा पिछले ढाई दशकों के दौरान अपराध की विभिन्न जघन्य वारदातों में शामिल पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कुल पांच महिलाओं को अदालत द्वारा फांसी की सजा सुनाई जा चुकी है। इनमें से तीन दोषियों का संबंध सीधे तौर पर मुजफ्फरनगर जिले से रहा है। इसके अलावा, गंभीर मामलों में आजीवन कारावास की सजा काट रही महिलाओं की संख्या भी काफी अधिक है।
अदालतों द्वारा मृत्युदंड पाने वाली प्रमुख घटनाएं इस प्रकार हैं:
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सोनिया (रेलूराम पूनिया हत्याकांड, 2001): हिसार के बरवाला के पूर्व विधायक रेलूराम पूनिया और उनके परिवार के आठ सदस्यों की 23 अगस्त 2001 की रात उनके फॉर्म हाउस में हत्या कर दी गई थी। इस सनसनीखेज वारदात में मुजफ्फरनगर के सिसौली कस्बे के संजीव कुमार की पत्नी और पूर्व विधायक की बेटी सोनिया को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई गई थी, जिसे बाद में उम्रकैद में बदल दिया गया था।
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शबनम (बावनखेड़ी हत्याकांड, 2008): अप्रैल 2008 में अमरोहा जिले के बावनखेड़ी गांव में शबनम ने अपने प्रेमी सलीम के साथ मिलकर अपने ही परिवार के सात सदस्यों की कुल्हाड़ी से काटकर हत्या कर दी थी। साल 2010 में अमरोहा सत्र अदालत ने दोनों को फांसी की सजा सुनाई थी, जिसे बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट और 2015 में देश की सर्वोच्च अदालत (सुप्रीम कोर्ट) ने भी बरकरार रखा।
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मुकेश उर्फ बिट्टो (भौराकलां हत्याकांड, 2019): भौराकलां थाना क्षेत्र के खेड़ी सूंडियान गांव में किसान शेखर की 70 हजार रुपये के लेन-देन के विवाद में 17 जून 2019 को ईंटों से पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में दोषी महिला मुकेश उर्फ बिट्टो और उसके बेटों प्रदीप, संदीप व सोनू को फास्ट ट्रैक कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी।
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मुस्कान रस्तोगी (मेरठ सौरभ हत्याकांड): मेरठ के ब्रह्मपुरी में हुए सौरभ हत्याकांड में अदालत ने दोषी पत्नी मुस्कान रस्तोगी और उसके प्रेमी साहिल को मृत्युदंड की सजा सुनाई है। इस मामले में सबूत मिटाने के लिए पति के शव को नीले ड्रम में भरकर सीमेंट से चिन दिया गया था, जिसे अदालत ने ‘रेयरेस्ट ऑफ रेयर’ (अत्यंत क्रूर) श्रेणी का अपराध माना।
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रविता (मेरठ अमित हत्याकांड): मेरठ के बहसूमा क्षेत्र के अकबरपुर सादात गांव निवासी अमित कश्यप की हत्या के मामले में अदालत ने उसकी पत्नी रविता और उसके प्रेमी अमरदीप को फांसी की सजा सुनाई है। रविता का मायका मुजफ्फरनगर के सैदपुरा गांव में है और यह वारदात 13 अप्रैल 2025 को हुई थी।














