मिडिल ईस्ट में मंडराए महाविनाश के बादल! अमेरिका-इजरायल का ईरान पर बड़े सैन्य हमले का प्लान; ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ के इस्तेमाल की भी चर्चा

वाशिंगटन/तेहरान। दुनिया एक बार फिर मध्य पूर्व (Middle East) में भीषण जंग की आग में झुलसती नजर आ सकती है। ‘न्यू यॉर्क टाइम्स’ की एक सनसनीखेज रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने अमेरिकी मिडटर्म चुनावों के बाद ईरान के खिलाफ एक नई और बेहद खतरनाक सैन्य कार्रवाई का गुप्त प्लान तैयार कर लिया है। इस संभावित सैन्य अभियान के तहत ईरान के गुप्त परमाणु केंद्रों, मिसाइल-ड्रोन भंडारों और ऊर्जा ढांचे को निशाना बनाया जा सकता है, हालांकि अभी तक इस पर अंतिम मुहर नहीं लगी है।

तीन दिन का तीव्र जंगी अभियान, अर्थव्यवस्था को तोड़ने की साजिश

रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका और इजरायल का यह संभावित सैन्य ऑपरेशन छोटा लेकिन बेहद तीव्र हो सकता है। योजना यह है कि लगातार तीन दिनों तक ताबड़तोड़ हमले कर ईरान की अर्थव्यवस्था की कमर तोड़ दी जाए, ताकि तेहरान को परमाणु समझौते की टेबल पर झुकने के लिए मजबूर किया जा सके। इसी रणनीति के तहत ईरान के परमाणु ठिकानों, मिसाइल व ड्रोन निर्माण क्षमताओं, ऊर्जा ढांचे के साथ-साथ इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (IRGC) के मुख्य कमांड सेंटर्स को विध्वंस का टारगेट बनाने की रूपरेखा तैयार की गई है।

क्या ‘पिकैक्स माउंटेन’ बनेगा अगला निशाना? ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ पर विचार

ईरान के सबसे सुरक्षित और पहाड़ों के सीने में गहरे दबे परमाणु सेंटर ‘पिकैक्स माउंटेन’ को लेकर भी अटकलों का बाजार गर्म है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में संकेत दिए थे कि इस भूमिगत ठिकाने को नेस्तनाबूद करने के लिए 22,000 पाउंड वजनी खतरनाक बम GBU-43/B यानी ‘मदर ऑफ ऑल बॉम्ब्स’ (MOAB) के इस्तेमाल पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, अमेरिकी प्रशासनिक अधिकारियों के बीच इस बात को लेकर भी माथापच्ची चल रही है कि यदि तेल रिफाइनरियों या ऊर्जा ठिकानों पर हमला किया गया, तो अमेरिका में पेट्रोल-डीजल की कीमतें आसमान छू सकती हैं, जिसके चलते एनर्जी इन्फ्रास्ट्रक्चर को टारगेट करने पर अभी संशय बना हुआ है।

ईरान की दो टूक चेतावनी- “जवाब सीमित नहीं, महाविनाश होगा”

दूसरी ओर, तेहरान ने अमेरिका और इजरायल को साफ शब्दों में चेतावनी दी है कि यदि कोई दुस्साहस किया गया, तो उसका पलटवार बेहद खतरनाक और अकल्पनीय होगा। ईरानी अधिकारियों ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि नया हमला होने पर जवाबी कार्रवाई सिर्फ क्षेत्रीय सीमाओं तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि वे सऊदी अरब के तेल प्लांट, अहम डेटा सेंटरों और समुद्र के भीतर बिछी इंटरनेट की अंडरवाटर केबल्स को भी तबाह कर सकते हैं। ईरान का कहना है कि यह युद्ध न तो जल्दी खत्म होगा और न ही इसे सीमित रखा जा सकेगा।

इजरायल का बड़ा शक्ति प्रदर्शन, ईरान सीमा के पास किया युद्धाभ्यास

इस तनाव के बीच इजरायल ने आक्रामक रुख अख्तियार करते हुए सोमवार को ईरान की सीमा के नजदीक अपनी ताकत का बड़ा मुजायरा किया। इजरायली वायुसेना के दर्जनों लड़ाकू विमानों और मिड-एयर रिफ्यूलिंग (ईंधन भरने वाले) विमानों ने अपने देश से 800 मील से अधिक की लंबी दूरी तय की। सीरिया और इराक के आसमान से गुजरते हुए इन विमानों ने ईरान की सरहद के करीब उड़ान भरी और सुरक्षित लौट आए। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यह फ्लाइट रूट ईरान पर भविष्य में होने वाले संभावित हमले के रास्ते जैसा ही था। हालांकि इजरायल ने इसे महज एक ‘सैन्य प्रशिक्षण अभ्यास’ करार दिया है, लेकिन जानकारों का मानना है कि इसका मुख्य मकसद ईरान को खुली चेतावनी देना था।

अमेरिका के सामने हैं तीन बड़ी चुनौतियां, ट्रंप कूटनीति पर कर रहे विचार

पूर्व के अनुभवों और रणनीतिक जोखिमों को भांपते हुए फिलहाल ट्रंप प्रशासन इस सैन्य टकराव से बचता नजर आ रहा है। अमेरिकी अधिकारियों के सामने इस नई जंग को लेकर तीन बड़ी चुनौतियां मुंह बाए खड़ी हैं- पहला, कच्चे तेल की कीमतों में बेकाबू उछाल; दूसरा, पूरे मध्य पूर्व में क्षेत्रीय युद्ध का बेकाबू होना; और तीसरा, अमेरिकी सैन्य शस्त्रागार में मिसाइल-इंटरसेप्टर की कमी। यही कारण है कि तमाम योजनाएं कागजों पर तैयार होने के बावजूद फिलहाल यह तय नहीं हो पाया है कि ट्रंप अंतिम रूप से हमले की मंजूरी देंगे या कूटनीतिक रास्ते से इसका समाधान निकालेंगे।

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