यूपी विधानसभा चुनाव 2027: कांग्रेस ने सपा को सौंपी 172 सीटों की लिस्ट, सीट शेयरिंग को लेकर गठबंधन में तेज हुई हलचल

कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के बीच सीट शेयरिंग पर मंथन शुरू

उत्तर प्रदेश में होने वाले 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर राजनीतिक सरगर्मी तेज हो गई है। विपक्षी ‘INDIA’ ब्लॉक के प्रमुख घटक दलों—कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच सीटों के बंटवारे को लेकर बातचीत और रणनीतिक चर्चाओं का दौर शुरू हो गया है। इसी कड़ी में कांग्रेस नेतृत्व ने जमीनी फीडबैक और चुनावी तैयारियों के आधार पर लगभग 172 सीटों की एक शुरुआती सूची समाजवादी पार्टी को सौंपी है। गौरतलब है कि 2024 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने मिलकर शानदार प्रदर्शन किया था और राज्य की 80 में से 43 सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसमें सपा के खाते में 37 और कांग्रेस के खाते में 6 सीटें आई थीं। अब आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर दोनों दल आपसी तालमेल बिठाने की कोशिश में जुटे हैं।

क्या है कांग्रेस की सीटों का ‘कैटेगरी फॉर्मूला’?

सूत्रों के मुताबिक, कांग्रेस ने सपा को जो करीब 172 सीटों की सूची दी है, उसे स्पष्ट रूप से चार अलग-अलग श्रेणियों (A, B, C और D) में बांटा गया है:

  • ‘A’ कैटेगरी: इस श्रेणी की सीटें लगभग तय मानी जा रही हैं, जिन पर पार्टी का दावा मजबूत है और इनमें कोई बदलाव संभव नहीं है।

  • ‘B’ कैटेगरी: इन सीटों पर स्थानीय समीकरणों के आधार पर थोड़ा-बहुत बदलाव या फेरबदल किया जा सकता है।

  • ‘C’ और ‘D’ कैटेगरी: इन दोनों श्रेणियों की सीटों को लेकर दोनों दलों के बीच पूरी तरह से खुली बातचीत और विचार-विमर्श किए जाने की गुंजाइश रखी गई है।

कांग्रेस नेताओं का यह भी कहना है कि वे सीटों की किसी एक निश्चित संख्या पर जिद या अड़े नहीं हैं, लेकिन पार्टी गठबंधन के भीतर एक सम्मानजनक हिस्सेदारी चाहती है। हालांकि, अंतिम निष्कर्ष तक पहुंचने से पहले दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व के बीच कई दौर की औपचारिक बैठकें और बातचीत होना अभी बाकी है। कांग्रेस का मुख्य उद्देश्य भारतीय जनता पार्टी (BJP) को सत्ता से बाहर करना है और इस साझा लक्ष्य के लिए आवश्यक राजनीतिक त्याग करने से भी पीछे न हटने की बात कही जा रही है।

प्रियंका गांधी की मॉनिटरिंग और ‘जीतने की क्षमता’ पर जोर

इस पूरी रणनीति और सीटों के आकलन की प्रक्रिया पर कांग्रेस की ओर से शीर्ष स्तर पर करीबी नजर रखी जा रही है। सूत्रों के अनुसार, इस पूरी कवायद की मॉनिटरिंग खुद कांग्रेस नेत्री प्रियंका गांधी वाड्रा कर रही हैं और उन्होंने इस सिलसिले में राज्य के प्रमुख नेताओं के साथ कई दौर की महत्वपूर्ण बैठकें भी की हैं।

दूसरी तरफ, समाजवादी पार्टी का रुख यह है कि केवल सीटों की संख्या से ज्यादा महत्वपूर्ण उम्मीदवारों की ‘जीतने की क्षमता’ (Winability) होनी चाहिए। सपा के अंदरूनी हलकों से यह बात भी सामने आ रही है कि पार्टी कांग्रेस को लगभग 50 से 60 सीटें देने के पक्ष में है, जबकि कांग्रेस पार्टी एक बड़ी और सम्मानजनक हिस्सेदारी की मांग कर रही है। बहरहाल, दोनों दलों के शीर्ष नेताओं के बीच होने वाली आगामी बैठकों के बाद ही यह साफ हो पाएगा कि 2027 के चुनावी रण में सीटों का अंतिम गणित किस रूप में तय होता है।

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