दक्षिण अमेरिकी देश पराग्वे इस समय अपने इतिहास के सबसे बड़े और गंभीर राजनीतिक व वित्तीय संकट के दौर से गुजर रहा है. देश के बैंकिंग सेक्टर में मचे भारी कोहराम और उएनो बैंक (Ueno Bank) के डूबने के बाद उपजे राजनीतिक घटनाक्रम के तहत शुक्रवार को पेद्रो अलियाना ने देश के नए राष्ट्रपति के रूप में आधिकारिक तौर पर शपथ ले ली है. इससे ठीक पहले पराग्वे की सीनेट ने एक ऐतिहासिक और कड़ा कदम उठाते हुए पूर्व राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को उनके पद से बर्खास्त कर दिया, जिसके बाद न्यायिक अधिकारियों ने उन्हें हाउस अरेस्ट यानी नजरबंद रखने का सख्त आदेश भी जारी किया है. यह पूरा विवाद देश के पांचवें सबसे बड़े बैंक उएनो बैंक के धराशायी होने से जुड़ा हुआ है, जिसके चलते लाखों आम नागरिकों और खाताधारकों की गाढ़ी कमाई बैंक में ही फंस गई है और वर्तमान सरकार पर सरकारी धन के भारी दुरुपयोग तथा इस बैंक को बचाने के लिए पर्दे के पीछे राजनीतिक मदद मुहैया कराने के गंभीर आरोप लग रहे हैं.
सीनेट में सर्वसम्मति से गिरी सरकार, पूर्व राष्ट्रपति ने ठुकराया था इस्तीफा
इस राजनीतिक उथल-पुथल की शुरुआत तब हुई जब पराग्वे की सीनेट में मौजूद सभी 44 सांसदों ने एकजुट होकर राष्ट्रपति सैंटियागो पेना को उनके पद से हटाने के प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया. पेना पर अपने कार्यकाल के दौरान पदीय दुरुपयोग और गलत गतिविधियों में शामिल होने के पुख्ता आरोप हैं. हालांकि संकट गहराते देख पेना ने गुरुवार को ही अपने पद से इस्तीफा देने की पेशकश कर दी थी, लेकिन देश की कांग्रेस ने उनके इस इस्तीफे को स्वीकार करने से साफ इनकार कर दिया था क्योंकि विपक्ष का कड़ा रुख था कि यदि इस्तीफा मंजूर कर लिया गया तो वे अपनी इस जन-जवाबदेही से आसानी से बच निकलेंगे. अब पूर्व राष्ट्रपति के वकीलों रिकार्डो प्रेडा और एडोल्फो फेरेइरो ने सीनेट के इस फैसले को अदालत में कानूनी चुनौती दी है. अपने विदाई संदेश में पेना ने सफाई देते हुए कहा कि वे नहीं चाहते कि उनकी वजह से देश में किसी भी प्रकार का नया विवाद या अस्थिरता पैदा हो, और उन्होंने अपने ऊपर लगे सभी भ्रष्टाचार के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. पद से इस तरह बर्खास्त किए जाने के कारण अब उन्हें पराग्वे के पूर्व राष्ट्रपतियों को मिलने वाली आजीवन सीनेट सदस्यता और कानूनी अभयदान (इम्यूनिटी) जैसी सुविधाएं भी नहीं मिल सकेंगी.
उएनो बैंक का दिवालिया होना और डूबे हुए अरबों डॉलर का सच
जिस उएनो बैंक को लेकर यह पूरा सियासी भूचाल आया है, उस पर वित्तीय अधिकारियों ने पिछले मंगलवार को पूरी तरह से अपना नियंत्रण या कब्जा कर लिया था. कुल जमा राशि के हिसाब से यह पराग्वे का पांचवा सबसे बड़ा बैंक था, लेकिन जांच में यह बात सामने आई कि इस बैंक को अलग-अलग माध्यमों से 80 करोड़ डॉलर से अधिक का भारी-भरकम सरकारी पैसा मिला था. यहाँ तक कि देश के सरकारी पेंशन फंड ने भी तय कानूनी और सुरक्षित सीमाओं का उल्लंघन करते हुए इसमें करीब 35.5 करोड़ डॉलर की बड़ी रकम जमा कर रखी थी. यह बैंक देश के दो-तिहाई से अधिक वयस्क नागरिकों का प्राइमरी फाइनेंशियल पार्टनर बन चुका था, जिसके रातों-रात बंद हो जाने से आम लोग अपने ही पैसे निकालने या एटीएम और कार्ड के जरिए किसी भी तरह का भुगतान करने में पूरी तरह असमर्थ हो गए. हालांकि, बढ़ते दबाव के बीच गुरुवार से 1 करोड़ गुआरानी यानी लगभग 1,600 डॉलर तक की छोटी जमा राशि लौटानी शुरू कर दी गई है और केंद्रीय बैंक के दावों के मुताबिक करीब 37 हजार डॉलर तक की जमा राशि का बीमा सुरक्षित है, लेकिन फिर भी जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ है.
राजनीतिक दूरियां और अंदरूनी कलह ने बढ़ाई मुश्किलें
सैंटियागो पेना के लिए यह संकट तब और ज्यादा गहरा गया जब उनके राजनीतिक गॉडफादर और देश के पूर्व राष्ट्रपति होरासियो कार्टेस के साथ उनके संबंध तेजी से बिगड़ने लगे. होरासियो कार्टेस ने ही पेना को राजनीति के फलक पर आगे बढ़ाया था, लेकिन राष्ट्रपति की कुर्सी संभालने के बाद पेना ने अपना एक अलग स्वतंत्र राजनीतिक और कारोबारी खेमा तैयार करना शुरू कर दिया, जिससे दोनों दिग्गजों के बीच दूरियां बढ़ गईं. बीते सितंबर महीने में कार्टेस समर्थक सांसदों ने ही उएनो बैंक के भारी-भरकम कर्ज और संदिग्ध लेन-देन पर सवालिया निशान खड़े किए थे, और जब बैंक डूब गया तो कार्टेस ने भी पेना से अपना पल्ला झाड़ते हुए उन्हें पद से हटाने के अभियान का समर्थन कर दिया. अपनी ही पार्टी और राजनीतिक खेमे में पूरी तरह अलग-थलग पड़ चुके पेना के खिलाफ स्थिति तब और विस्फोटक हो गई जब शुक्रवार को देश के गृह मंत्री, चीफ ऑफ स्टाफ और कई शीर्ष व वरिष्ठ अधिकारियों ने भी अपने पदों से ताबड़तोड़ इस्तीफे दे दिए.
सड़कों पर उतरा जनमानस, 27 लोगों पर केस और शिक्षकों की हड़ताल का ऐलान
बैंक में अपनी गाढ़ी कमाई फंसने के कारण हजारों की संख्या में आक्रोशित लोगों ने देश की सड़कों पर उतरकर सरकार के खिलाफ उग्र प्रदर्शन किया, जिन्हें तितर-बितर करने के लिए पुलिस को रबर की गोलियों और पेपर स्प्रे का सहारा लेना पड़ा. हालात की नजाकत का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 40 हजार से अधिक सदस्यों वाली देश की शक्तिशाली शिक्षक यूनियन ने सोमवार से एक अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल पर जाने का बड़ा ऐलान कर दिया है, जिनकी मुख्य मांग सरकारी पेंशन फंड में जमा जनता के पैसों की पूर्ण सुरक्षा सुनिश्चित करना है. इस पूरे मामले की जांच के बाद बैंक के बड़े शेयरहोल्डर मिगुएल वाजकेज समेत कुल 27 प्रभावशाली लोगों के खिलाफ औपचारिक मुकदमे दर्ज किए गए हैं, जबकि बैंक के 6 मुख्य निदेशकों को हिरासत में ले लिया गया है. वित्तीय जांच एजेंसियों ने कार्रवाई करते हुए 9 लग्जरी कारें, एक आलीशान यॉट और एक छोटा विमान भी जब्त किया है. अब जांच के दायरे में केवल बैंक अधिकारी ही नहीं, बल्कि अपदस्थ राष्ट्रपति पेना, नए राष्ट्रपति अलियाना और केंद्रीय बैंक के कई वरिष्ठ अधिकारी भी आ चुके हैं, जिसने पराग्वे को एक दशक से भी लंबे समय के सबसे भीषण राजनीतिक और आर्थिक भंवर में धकेल दिया है.


















