वित्तीय समावेशन में बड़ी छलांग: देशभर में खातों में ₹10,000 करोड़, यूपी से ₹2,000 करोड़ का योगदान

देश के सबसे बड़े BC नेटवर्क BLS E-Services के आंकड़ों से सामने आई तस्वीर

लखनऊ: भारत में वित्तीय समावेशन की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि सामने आई है। देशभर में बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट (BC) नेटवर्क के माध्यम से संचालित वित्तीय समावेशन खातों में कुल ₹10,000 करोड़ से अधिक का बैलेंस दर्ज किया गया है, जिसमें करीब ₹2,000 करोड़ का योगदान अकेले उत्तर प्रदेश से आ रहा है। यह जानकारी देश के सबसे बड़े BC नेटवर्क BLS E-Services Ltd द्वारा साझा किए गए आंकड़ों से सामने आई है।

कंपनी के अनुसार 31 जनवरी 2026 तक ₹10,000 करोड़ का यह बैलेंस पिछले एक दशक में उसके BC नेटवर्क के माध्यम से वित्तीय समावेशन खातों में जुटाए गए उपलब्ध जमा को दर्शाता है। चालू वित्त वर्ष में डिपॉजिट मोबिलाइजेशन पहल के कारण इसमें उल्लेखनीय तेजी देखने को मिली है।

कुल बैलेंस का लगभग 80 प्रतिशत हिस्सा टियर-4 और टियर-5 ग्रामीण बाजारों से आता है, जो छोटे जिलों और ग्रामीण परिवारों की मजबूत भागीदारी को दर्शाता है। इससे यह संकेत मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों में औपचारिक बैंकिंग सेवाओं के प्रति भरोसा लगातार बढ़ रहा है।
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के BC फ्रेमवर्क के तहत ग्राहक जमा राशि पार्टनर बैंकों की पुस्तकों में रहती है, जबकि BC ऑपरेटर खाता खोलने, जमा-निकासी और अन्य बुनियादी बैंकिंग सेवाओं के लिए अंतिम-मील वितरण केंद्र के रूप में कार्य करते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ रही बैंकिंग पहुंच
31 दिसंबर 2025 तक BLS E-Services का नेटवर्क देशभर में 45,800 से अधिक बिजनेस कॉरेस्पोंडेंट्स संचालित कर रहा है। नेटवर्क का बड़ा हिस्सा ग्रामीण क्षेत्रों में केंद्रित है, जहां असिस्टेड बैंकिंग जमा, निकासी और DBT से जुड़े लेनदेन का प्रमुख माध्यम बन चुकी है।
यह नेटवर्क मुख्य रूप से प्रधानमंत्री जन धन योजना (PMJDY) के तहत पार्टनर बैंकों के लिए बेसिक सेविंग्स बैंक डिपॉजिट अकाउंट्स खोलता है। प्रति खाता या लेनदेन औसत टिकट साइज लगभग ₹5,000 है, जो पहली बार बैंकिंग प्रणाली से जुड़ने वाले और कम आय वाले ग्राहकों की छोटी-छोटी बचत को दर्शाता है।

लेनदेन मूल्य के आधार पर उत्तर प्रदेश शीर्ष राज्यों में शामिल है, इसके साथ पश्चिम बंगाल, बिहार, ओडिशा और महाराष्ट्र भी प्रमुख योगदानकर्ता हैं।

लेनदेन गतिविधि में निरंतर वृद्धि
यह BC नेटवर्क सालाना 150 मिलियन से अधिक लेनदेन प्रोसेस करता है, जो प्रति आउटलेट औसतन 750 लेनदेन प्रति माह के बराबर है। इसके अलावा कंपनी का मासिक ग्रॉस ट्रांजैक्शन वैल्यू (GTV) भी ₹10,000 करोड़ के पार पहुंच चुका है, जिसमें जमा, निकासी और अन्य असिस्टेड बैंकिंग सेवाओं का कुल लेनदेन शामिल है।

BLS का दृष्टिकोण
इस उपलब्धि पर टिप्पणी करते हुए BLS E-Services के COO लोकनाथ पांडा ने कहा:
“भारत में वित्तीय समावेशन की कहानी अब केवल बैंक खाते खोलने तक सीमित नहीं है। पिछले कुछ वर्षों में हमने देखा है कि ग्रामीण और छोटे जिलों में बैंकिंग सेवाओं का वास्तविक उपयोग तेजी से बढ़ा है। हमारे BC नेटवर्क के माध्यम से लाखों लोग अब नियमित रूप से जमा, निकासी और DBT से जुड़े लेनदेन कर रहे हैं। ₹10,000 करोड़ का बैलेंस इस बात का संकेत है कि छोटे-छोटे बचत खातों और नियमित लेनदेन के जरिए ग्रामीण भारत में औपचारिक बैंकिंग प्रणाली के प्रति भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्यों से मिल रहा योगदान यह दर्शाता है कि अंतिम-मील बैंकिंग इंफ्रास्ट्रक्चर वित्तीय समावेशन को वास्तविक रूप से आगे बढ़ा रहा है।”

उन्होंने आगे कहा कि कंपनी का फोकस आने वाले समय में एजेंट नेटवर्क का विस्तार करने, असिस्टेड डिजिटल बैंकिंग सेवाओं को मजबूत करने और उन जिलों तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाने पर रहेगा जहां अभी भी औपचारिक बैंकिंग की पहुंच सीमित है।

राजस्व और विस्तार
BC वर्टिकल पार्टनर बैंकों के साथ कमीशन आधारित व्यवस्था के जरिए सालाना लगभग ₹250 करोड़ का राजस्व उत्पन्न करता है। Atyati अधिग्रहण पूरा होने के बाद कंपनी के कुल राजस्व में BC आय का योगदान लगभग 50 प्रतिशत होने की उम्मीद है।
BLS E-Services ने State Bank of India और HDFC Bank सहित कई बैंकों के साथ RBI के BC फ्रेमवर्क के तहत साझेदारी की है। कंपनी का कहना है कि वह आने वाले समय में अपने एजेंट नेटवर्क का और विस्तार करेगी और कम सेवा प्राप्त जिलों में अंतिम-मील बैंकिंग ढांचे को और मजबूत करेगी।

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