फ्रेंच हेल्थ एजेंसी के अनुसार वेपिंग सिगरेट की तुलना में कम नुकसानदायक – भारत में सिगरेट से होने वाले नुकसान को कम करने की रणनीति के लिए अध्ययन महत्वपूर्ण

फ्रांस की एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) ने हाल ही में एक विस्तृत वैज्ञानिक अध्ययन के परिणाम जारी किए जिसमें कहा गया है कि वेपिंग से होने वाले स्वास्थ्य जोखिम पारंपरिक सिगरेट की तुलना में काफी कम हैं। हालाँकि ऐसा नहीं है कि इससे स्वास्थ्य को कोई भी नुकसान न होता हो। ये नतीजे 2,500 से अधिक अध्ययनों की समीक्षा से मिले हैं, जिनमें वेपिंग के टॉक्सिकोलॉजिकल प्रभाव की जाँच की गई थी।

एजेंसी ने बताया कि वेपिंग और सिगरेट के बीच मुख्य अंतर यह है कि इसमें तंबाकू जलती नहीं है। पारंपरिक सिगरेट में तंबाकू जलता है, जिससे बहुत ज्यादा मात्रा में टॉक्सिक और कार्सिनोजेनिक कंपाउंड निकलते हैं। वहीं, ई-सिगरेट में एक लिक्विड गर्म होता है, जिससे एरोसोल बनता है इन एयरोसोल में बहुत कम नुकसानदायक पदार्थ होते हैं और वो भी बहुत थोड़ी मात्रा में होते हैं।

रिपोर्ट में सामने आया कि फ्रांस में वेपिंग करने वाले 98 प्रतिशत वयस्क वर्तमान में या पहले से सिगरेट पीते आए हैं। इनमें से 61 प्रतिशत लोग दोनों का एक साथ उपयोग करते हैं। दैनिक वेपिंग केवल 6.1 प्रतिशत है, तथा दैनिक सिगरेट का सेवन गिरकर 18.2 प्रतिशत पर पहुँच गया है, जो 1990 के दशक के बाद अब तक का सबसे निचला स्तर है। इन आँकड़ों से इस बात को बल मिलता है कि वेपिंग सिगरेट पीने वालों के लिए मुख्य तौर से नुकसान को कम करने का टूल रहा है, न कि सिगरेट न पीने वालों के लिए कोई मनोरंजन का सामान।

जोनाथन लिविंगस्टोन – बैंक्स, पीएचडी, लैक्चरर एवं सीनियर रिसर्चर, प्रमाण आधारित हेल्थकेयर, यूनिवर्सिटी ऑफ ऑक्सफोर्ड ने कहा, ‘‘हमारी रिसर्च में इस बात के काफी मजबूत प्रमाण मिले हैं कि ई-सिगरेट लोगों को सिगरेट छोड़ने में मदद करने का एक प्रभावशाली तरीका है। ई-सिगरेट पूरी तरह से सुरक्षित तो नहीं हैं, पर यह बात विश्वास के साथ कही जा सकती है कि वो सिगरेट के मुकाबले काफी ज्यादा सुरक्षित हैं।’’

भारत में, जहाँ सिगरेट पीने से होने वाली बीमारियाँ जन स्वास्थ्य की एक बड़ी समस्या बनी हुई हैं, वहाँ एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) के अध्ययन से मिले ये नतीजे नीतिनिर्माताओं और हेल्थ प्रोफेशनल्स के लिए महत्वपूर्ण वैज्ञानिक जानकारी पेश करते हैं, जिसकी मदद से वैकल्पिक निकोटीन डिलीवरी सिस्टम की भूमिका का आकलन किया जा सकता है। हालाँकि, धूम्रपान पूरी तरह छोड़ देना ही सबसे सुरक्षित विकल्प है। लेकिन जो लोग सिगरेट छोड़ने में समर्थ नहीं हैं, उनके लिए प्रमाणों से प्रदर्शित होता है कि रैगुलेटेड ई-सिगरेट उन्हें पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले कम हानिकारक रसायनों के संपर्क में लाता है। सिगरेट पीने वाले व्यस्कों को ई-सिगरेट टॉक्सिक पदार्थों का संपर्क कम करने का एक सीमित और अस्थायी तरीका प्रदान करता है, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि ई-सिगरेट का उपयोग पारंपरिक सिगरेट छोड़ने के उद्देश्य से जिम्मेदारीपूर्वक किया जाए।

एजेंसी फॉर फूड, एनवायरनमेंटल एंड ऑक्युपेशनल सेफ्टी एंड हेल्थ (ए.एन.एस.ई.एस) ने इस बात पर भी जोर दिया कि जहाँ वेपिंग पारंपरिक सिगरेट के मुकाबले कम नुकसानदायक है, वहीं ई-सिगरेट के लगातार इस्तेमाल के दीर्घकालिक प्रभावों के प्रमाण बहुत कम हैं। इसलिए वेपिंग के जोखिमों को ‘‘संभव’’ या ‘‘संभावित’’ की श्रेणी में रखा गया है, जबकि पारंपरिक सिगरेट पीने के जोखिम बहुत ज्यादा हैं, यह पूरी तरह से साबित हो चुका है।

ए.एन.एस.ई.एस ने यह भी कहा कि जो लोग सिगरेट नहीं पीते हैं, उन्हें वेपिंग शुरू नहीं करना चाहिए। हालाँकि, जो लोग अपनी सिगरेट की आदत छोड़ नहीं पा रहे हैं, उनके लिए ई-सिगरेट नुकसान को कम करने का एक अस्थायी विकल्प प्रदान कर सकता है, जो सबसे अधिक कारगर तब होगा, जब इसका उपयोग सिगरेट और वेपिंग दोनों को छोड़ने के लिए योजनाबद्ध रूप से किया जाए। एजेंसी ने यह निर्देश भी दिया कि ये नतीजे केवल रैगुलेटेड डिवाईस और लिक्विड पर लागू होते हैं, जिन्हें अधिकृत चैनलों द्वारा बेचा जाता है। अनरैगुलेटेड या अवैध उत्पादों में छिपे हुए एडिटिव्स, ज्यादा मात्रा में निकोटीन या नुकसानदायक तत्व मिले हो सकते हैं, जिससे स्वास्थ्य जोखिम काफी बढ़ सकता है।

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