
पुलिस की एक तरफा कार्रवाई से नाराज शिक्षकों ने दी शिक्षण कार्य ठप करने की धमकी
-भास्कर समाचार सेवा-
गुलावठी। रस्सी का सांप और सांप का रस्सी बनाना पुलिस का बाएं हाथ का खेल है और इस कहावत को गुलावठी पुलिस ने उस वक्त चरितार्थ कर दिया, जब पुलिस ने उस शिक्षक के खिलाफ ही एफआईआर दर्ज कर दी, जिसके साथ कॉलेज के ही पास कार सवार द्वारा ही मारपीट करना बताया गया। शिक्षक का दोष केवल इतना बताया जा रहा है कि कार की टक्कर से चोटिल होने के बाद शिक्षक ने कार सवार को लापरवाही से कार चलाने पर नसीहत देने का प्रयास किया। बताया जा रहा है कि शिक्षक की नसीहत देने से कार सवार युवक आपे से बाहर हो गया और उसने शिक्षक को जहां अभद्र शब्द कहे, वहीं उनके साथ हाथापाई पर भी उतारू हो गया। कार सवार युवक की पत्नी एक सत्ताधारी नेता के परिजनों की जानकार बताई जा रही है। सो पुलिस ने भी बिना जांच किए, शिक्षक पर ही मुकदमा ठोक डाला। जैसे ही विद्यालय के स्टाफ को इस बात की खबर लगी तो स्टाफ के समस्त लोग कोतवाली की ओर दौड़े और पुलिस से पुरजोर अपील की कि शिक्षक के साथ यह अन्याय है, लेकिन पुलिस ने एक न सुनी। सो देवनागरी इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य, शिक्षकों ने कप्तान को संबोधित शिकायती पत्र गुलावठी पुलिस के माध्यम से दिया, जिसमें देवनागरी इंटर कॉलेज के वरिष्ठ प्रवक्ता रामपाल सिंह पर गुलावठी पुलिस द्वारा झूठी एफआईआर दर्ज करने का आरोप लगाते हुए देवनागरी कॉलेज के प्रधानाचार्य श्याम सुंदर गुप्ता ने गुलावठी पुलिस की कार्यप्रणाली पर जमकर सवाल उठाए हैं और पुलिस पर दवाब में काम करने का आरोप भी लगाया है। कॉलेज के समस्त स्टाफ ने एक तरफा कार्रवाई करने पर चेतावनी दी है कि अगर पुलिस ने शिक्षक की शिकायत दर्ज नहीं की गई तो विद्यालय के शिक्षक, शिक्षण कार्य ठप कर, विद्यालय बंद कर सड़क पर धरना-प्रदर्शन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदार गुलावठी पुलिस होगी। उधर, छात्रों ने भी अपने गुरू के प्रति अन्याय पूर्ण व्यवहार के खिलाफ आन्दोलन चलाने की चेतावनी दी है। पुलिस कप्तान को दिए शिकायती पत्र में प्रधानाचार्य ने गुलावठी पुलिस पर एक सत्ताधारी के दवाब में काम करने का आरोप भी लगाया है। पत्र की प्रति जिलाधिकारी तथा उप्र माध्यमिक शिक्षक संघ को भी भेजी गई है।
गुलावठी पुलिस का अमानवीय व्यवहार आया सामने
गुलावठी। सबसे अमानवीय व्यवहार पुलिस ने यह किया कि कॉलेज के 58 वर्षीय वरिष्ठ प्रवक्ता रामपाल सिंह जो हृदय रोगी भी हैं, उनके साथ मानवता दर्शाने की भी जहमत नहीं उठाई और ‘गुरूजी’ समय पर दवा लेने के लिए भी तड़फते रहे।













