अनिल कुमार शुक्ला पूर्वांचल वोटर के दम पर कर रहे दिल्ली विधानसभा व एमसीडी चुनाव लड़ने की तैयारी

नई दिल्ली। इस दुनिया में सभी एक समान होते है, पर वो अपनी खूबियों या अपनी विशेषताओं के साथ इस जहां में अपनी अलग पहचान बनाते है। ऐसे व्यक्ति कुछ विशेष और अद्वितीय गुणों को साथ में लेकर पैदा होते है। सबकी अपनी एक अलग पसंद होती है, हर किसी की विचारधाराएं एक दूसरे से अलग होती हैं। हम एक ऐसे नेता की बात करने जा रहे हैं जो आपके दिल, मन और दिमाग को बहुत ही प्रभावित करेगा। पेश है एडवोकेट अनिल कुमार शुक्ला से बातचीत के विशेष अंश।

एनसीपी के अजीत पवार से प्रभावित होकर राजनीति में रखा कदम

एडवोकेट अनिल कुमार शुक्ला पेशे से एक वकील हैं। वर्तमान समय में ये घोंडा विधानसभा दिल्ली के राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) अजीत पवार गुट के अध्यक्ष के रूप में कार्य भी कर रहे हैं। एडवोकेट अनिल कुमार शुक्ला अजीत पवार को अपना गुरू मानते थे। संयोगवश अब उनका साथ छूट गया। अजीत पवार की पत्नी सुनेत्रा पवार के दिखाए गए रास्ते पर चलकर राजनीति में कदम रखा है। एक नेता के अंदर क्या खूबियां होनी चाहिए वो कूट-कूटकर भरी हुई है। जैसे साहस, दूरदर्शिता, प्रामाणिकता, ईमानदारी, निर्णय लेने की क्षमता, संचार कौशल, सहानुभूति, करुणा, और सीखने की ललक। एक नेता का काम टीम के लिए एक उदाहरण स्थापित करना, मुश्किल फैसले लेना, मुश्किल समय में शांत रहना, और अपनी टीम के साथ विश्वास और जुड़ाव बनाए रखना आदि शामिल है।

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले में हुआ इनका जन्म

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के एक छोटे से गाँव द्वारकागंज में इनका जन्म हुआ। बचपन से ही ये दिल्ली आ गये थे। इनकी पढ़ाई-लिखाई दिल्ली से हुई है। वर्तमान समय में ये कड़कड़डुमा कोर्ट में वकालत करते हैं। इनका कहना है कि दिल्ली की स्वास्थ्य और शिक्षा व्यवस्था काफी खराब है। जिसको सुधारने की काफी जरूरत है। इनके शुरुआती जीवन में ही लोगों की सेवा करना। और सत्य का साथ देना इनकी आदत में शामिल है।

जनसेवा की भावना से ओतप्रोत

वकालत करने के साथ ही साथ इनके अंदर सामाजिक सेवा करना इनकी आदत में शुमार है। इनका मानना है कि दिल्ली में पूर्वांचलियों की आबादी 50 लाख से ज्यादा है। सच क्या है इसकी किसी को खबर नहीं। सरकार को भी नहीं। लेकिन इतना साफ है कि दिल्ली की राजनीति को पूर्वांचली प्रभावित करते हैं। पूर्वांचली जिस पार्टी की डोर पकड़ते हैं, उस पार्टी की सरकार बन जाती है। पिछले दो चुनाव में पूर्वांचलियों का वोट आप के साथ गया था, बाकी दलों का सूपड़ा साफ हो गया। लेकिन वर्तमापन समय में पूर्वांचलियों के सहयोग से दिल्ली में भाजपा की सरकार कायम है। इसलिए पूर्वांचलियों पर विश्वास जताते हुए इन्होंने राजनीति में कदम रखा और इनको पूरा भरोसा है कि हम पूर्वांचल के होने के नाते हमें पूर्वांचल के लोगों का पूरा सहयोग मिलेगा।

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